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'नीर का पीर' उठाने को मजबूर राधारानी की सखी रंगदेवी के गांव की महिलाएं, रोज होती है पानी से 'जंग'
Tue, 21 Jan 2020 12:08 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Tue, 21 Jan 2020 12:08 AM IST
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गांव रांकौली की महिलाएं पानी लाते हुए
- फोटो : अमर उजाला
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बरसाना राधा रानी की प्रिय सखी रंग देवी का गांव विकास से कोसों दूर है। गांव के मार्ग पर हमेशा कीचड़ भरे रहते हैं। गांव के विकास को मिले 40 लाख रुपये कहां खर्च हो गए, धरातल पर कुछ दिखाई नहीं देता। यहां जरूरी सुविधाओं का अभाव है। गांव में पीने के पानी की भारी किल्लत है।
रंगदेवी सखी का मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
नंदगांव ब्लाक की ग्राम पंचायत रांकौली, ब्लाक से 17 किमी दूर है। गांव की रंगदेवी राधारानी की प्रिय सखियों में से एक थी। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आवागमन में बड़ी परेशानी होती है। गांव में कक्षा आठ तक तो बेटियां पढ़ती हैं। इससे आगे की पढ़ाई के लिए 10 किमी दूर इंटर कॉलेज है। इतनी दूर लड़कियों को कई पढ़ने नहीं भेजता है। गांव में पीने के पानी की भारी किल्लत है। पानी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। गांव में बोरिंग कराकर घर-घर पानी पहुंचाने का प्रयास किया गया, लेकिन खारा पानी होने के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका।
गांव की कीचड़ युक्त गलियां
- फोटो : अमर उजाला
गांव की महिलाएं काफी दूर से पानी लाती हैं। गांव में कई गालियां कच्ची है। गांव नाहरा भी इसी ग्राम पंचायत का मजरा है। चार वर्ष में 40 लाख रुपये भी खर्च हो गए, मगर विकास कुछ भी नहीं हुआ। गांव की श्मशान भूमि पर भी लोगों ने कब्जा कर रखा है। गांव में अस्थायी गोशाला भी बनाई गई है, इसमें 12 गोवंश है। बिजली के तार झूलते नजर आ रहे हैं।
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गांव रांकौली के स्थानीय लोग
- फोटो : अमर उजाला
गांव में शिक्षा के लिए 8वीं तक व्यवस्था ठीक है, लेकिन आगे की पढ़ाई के लिए 10 किमी जाना पड़ता है। आज की स्थिति में बेटियों को इतनी दूर भेजना मुश्किल है। -कन्हैया, ग्रामीण
गांव में खेल मैदान नहीं है। इसके अभाव में खेल प्रतिभाओं के साथ अन्याय हो रहा है। युवाओं को बरसाना, गोवर्धन जाना पड़ता है। -जगमोहन गुर्जर
गांव में खेल मैदान नहीं है। इसके अभाव में खेल प्रतिभाओं के साथ अन्याय हो रहा है। युवाओं को बरसाना, गोवर्धन जाना पड़ता है। -जगमोहन गुर्जर
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गांव रांकौली के स्थानीय
- फोटो : अमर उजाला
गांव में गंदगी है। घरों का गंदा पानी गलियों में बह रहा है। पानी निकासी के लिए नाली नहीं बन सकी है। -प्रेमसिंह
दोनों गांवों में श्मशान की जमीन तो है, लेकिन अवैध कब्जा हो रहे हैं। इस कारण अंत्येष्टि के लिए अपने-अपने खेतों पर जाना पड़ता है। -रवि गुर्जर ग्रामीण
ग्राम पंचायत के लिए जो रुपये आए थे, उससे स्कूल की मरम्मत व सौंदर्यीकरण, गांव में पीने के पानी की व्यवस्था, गलियों का खड़ंजा, निराश्रित गोवंश के लिए अस्थायी गोशाला का निर्माण कराया गया है। वहीं जो काम बचा है, आगामी कार्य योजना में कराया जाएगा। -रफीक, ग्राम पंचायत अधिकारी
दोनों गांवों में श्मशान की जमीन तो है, लेकिन अवैध कब्जा हो रहे हैं। इस कारण अंत्येष्टि के लिए अपने-अपने खेतों पर जाना पड़ता है। -रवि गुर्जर ग्रामीण
ग्राम पंचायत के लिए जो रुपये आए थे, उससे स्कूल की मरम्मत व सौंदर्यीकरण, गांव में पीने के पानी की व्यवस्था, गलियों का खड़ंजा, निराश्रित गोवंश के लिए अस्थायी गोशाला का निर्माण कराया गया है। वहीं जो काम बचा है, आगामी कार्य योजना में कराया जाएगा। -रफीक, ग्राम पंचायत अधिकारी