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हाथरस कांड: बिटिया के आखिरी शब्द बने चार्जशीट के मुख्य आधार, नहीं मिला ऑनर किलिंग का कोई सबूत
Sat, 19 Dec 2020 10:48 AM IST
प्राची प्रियम
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
अमर उजाला नेटवर्क, हाथरस
Published by: प्राची प्रियम
Updated Sat, 19 Dec 2020 10:48 AM IST
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कोर्ट के बाहर तैनात सुरक्षाबल
- फोटो : अमर उजाला
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हाथरस कांड में 67 दिन की गहन जांच-पड़ताल के बाद सीबीआई ने उसी थ्योरी को आगे बढ़ाया, जिस पर स्थानीय पुलिस काम कर रही थी। इसमें बिटिया का 22 सितंबर को अलीगढ़ के जेएन मेडिकल कॉलेज में पुलिस के विवेचना अधिकारी सीओ सादाबाद के समक्ष दिया गया बयान ही मुख्य आधार रहा। वहीं, आरोपी पक्ष की ओर से सीबीआई को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जिससे कि यह मामला ऑनर किलिंग का होता या सीबीआई की जांच में आरोपी निर्दोष पाए जाते।
चार्जशीट दाखिल करने पहुंची सीबीआई की टीम
- फोटो : अमर उजाला
इन्हीं अहम तथ्यों के आधार पर सीबीआई ने इन चारों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र प्रस्तुत किया है। बिटिया के मामले में जब राजनीति शुरू हो गई और आरोपी पक्ष लामबंद होने लगा था तो आरोपी पक्ष ने इस मामले में सीबीआई जांच की जोर-शोर से मांग की थी। साथ ही पीड़ित पक्ष का भी नार्को टेस्ट कराने की मांग की थी।
चार्जशीट दाखिल करने जातीं सीबीआई अधिकारी सीमा पाहुजा
- फोटो : अमर उजाला
चौतरफा घिरता देख प्रदेश सरकार ने सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी थी। सीबीआई ने 11 अक्तूबर को इस मामले की जांच अपने हाथ में ली। यह तथ्य भी गौरतलब है कि इससे पहले 14 सितंबर को जब बिटिया के साथ घटना हुई थी तो उस समय एक आरोपी संदीप के खिलाफ जानलेवा हमले और एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा कायम किया गया था।
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सीआरपीएफ की सुरक्षा में पहुंचीं बिटिया की भाभी
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद 19 सितंबर को इन्हीं धाराओं में पुलिस ने संदीप को गिरफ्तार भी कर लिया और जेल भेज दिया और धारा 354 भी बढ़ाई। इसके बाद बिटिया ने 22 सितंबर को जब जेएन मेडिकल कॉलेज में उपचार के दौरान विवेचना अधिकारी सीओ सादाबाद बह्म सिंह को बयान दिए। इसके आधार पर इस मामले में सामूहिक दुष्कर्म की धारा 376 डी और बढ़ाई गई और तीन आरोपियों रवि, रामू व लवकुश के नाम भी बढ़ा दिए गए। इसके बाद जब बिटिया की मौत हो गई तो पुलिस ने इस मुकदमे में धारा 302 भी बढ़ा दी। मौत से पहले बिटिया ने कहा था कि चारों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म कर जान से मारने की कोशिश की है।
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मामले की जानकारी देते अधिवक्ता
- फोटो : अमर उजाला
सीबीआई की गाजियाबाद इकाई को इस मुकदमे की जांच मिली। सीबीआई ने जब इस प्रकरण की जांच की तो अपनी जांच के 67 दिन के अंदर करीब 80 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की। बिटिया के गांव के दर्जनों चक्कर लगाए। तत्कालीन सीओ, कोतवाल चंदपा सहित दर्जनों पुलिसकर्मियों, ग्रामीणों से पूछताछ की। जेएन मेडिकल कॉलेज और हाथरस के जिला अस्पताल में जाकर भी छानबीन की। हर पहलू को ध्यान में रखकर पूछताछ की। घटना का सीन रिक्रिएट किया। चारों आरोपियों का गांधी नगर (गुजरात) ले जाकर बीआईओएस प्रोफाइलिंग व पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया।