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सुहाग की कातिल: सजा सुनते ही फफक पड़ी बीना, बच्चों ने मां से फेर ली नजरें, हत्यारे के चेहरे पर नहीं दिखी शिकन

Fri, 14 Aug 2026 02:28 PM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़ Published by: Chaman Kumar Sharma Updated Fri, 14 Aug 2026 02:28 PM IST
सार

अदालत में जब छोटी बेटी रोशनी से उसकी इच्छा पूछी गई थी, तो उसने साफ कह दिया था कि उसे अपनी मां से कोई लगाव नहीं है क्योंकि उसने उसके पापा को मारा है। बच्चों की यही जिद थी कि उनके पापा के हत्यारों को फांसी दी जाए।

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Wife and lover after punishment
दोषी मनोज और दोषी पत्नी बीना - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अलीगढ़ के बरला कस्बे में सुरक्षा गार्ड सुरेश हत्याकांड में सजा सुनते ही बीना फूट-फूटकर रोने लगी, लेकिन उसके तीनों बच्चों ने मां की ओर देखने तक से परहेज किया। अदालत में बीना बार-बार बच्चों को उम्मीद भरी नजरों से देखती रही, मगर बच्चों ने उससे दूरी बनाए रखी।

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पिता की हत्या और मां के जेल जाने के बाद अब तीनों बच्चे बड़ा बेटा नीतेश, मंझला पुनीत और सबसे छोटी बेटी रोशनी अनाथ हो चुके हैं। उनकी बुआ कसूरी ही उनका एकमात्र सहारा हैं। बृहस्पतिवार को जब इस मामले में फैसला आना था, तब मृतक सुरेश के तीनों बच्चे अपनी बुआ कसूरी के साथ अदालत में मौजूद थे।
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इसी दौरान हत्यारोपी प्रेमी मनोज और मृतक की पत्नी बीना को भी अदालत में पेश किया गया। कोर्ट रूम में खड़े बच्चे अपनी मां बीना की तरफ देखने से भी कतराते रहे। उन्होंने एक बार भी अपनी मां की ओर नहीं देखा। बीना बार-बार उम्मीद भरी नजरों से अपने बच्चों की तरफ देख रही थी कि शायद वे उसे एक बार देख लें, लेकिन जब बच्चों का गुस्सा और दूरी देखी, तो वह फूट-फूटकर रो पड़ी। सजा सुनाए जाने के बाद भी वह लगातार रोती रही, जबकि उसके प्रेमी मनोज के चेहरे पर कोई शिकन तक नहीं थी।
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अदालत में जब छोटी बेटी रोशनी से उसकी इच्छा पूछी गई थी, तो उसने साफ कह दिया था कि उसे अपनी मां से कोई लगाव नहीं है क्योंकि उसने उसके पापा को मारा है। बच्चों की यही जिद थी कि उनके पापा के हत्यारों को फांसी दी जाए।

न्याय के लिए लड़ता रहा जेठ, सदमे में गई जान
इस पूरे मुकदमे को न्याय तक पहुंचाने में परिवार ने भारी कीमत चुकाई है। अभियोजन पक्ष की ओर से जेपी राजपूत ने बताया कि मृतक सुरेश के बड़े भाई विजय सिंह ने ही इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी और वही केस की मजबूत पैरवी कर रहे थे।

19 अप्रैल 2026 को किसी ने विजय सिंह को गलत सूचना दे दी कि इस हत्याकांड में आरोपी बीना और मनोज की जमानत हो गई है और वे गांव लौट रहे हैं। इस खबर का सदमा विजय सिंह बर्दाश्त नहीं कर सके और अचानक आए हृदयघात से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। भाई की मौत के बावजूद न्याय की यह लड़ाई रुकी नहीं और महज छह महीने के भीतर ट्रायल पूरा हुआ दोषियों को सजा हुई।

प्रेमी का ही पक्ष लेती थी बीना
मृतक सुरेश दिल्ली में रहकर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था। पत्नी बीना तीनों बच्चों के साथ गांव में ही रहती थी। घर के पास ही परचून की दुकान चलाने वाले अविवाहित मनोज के साथ बीना के पिछले करीब आठ वर्षों से अवैध संबंध थे। जब सुरेश और उसके परिवार को इसकी भनक लगी, तो उन्होंने इसका विरोध किया। कई बार पारिवारिक पंचायतें भी हुईं और सुरेश ने मनोज के खिलाफ थाने में लिखित शिकायत भी दी थी। इसके बावजूद बीना अपने प्रेमी मनोज का ही पक्ष लेती रही, जिसके चलते पुलिस भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सकी। सुरेश परिवार और बच्चों की खातिर सब कुछ सहते हुए पत्नी के साथ निभाता रहा।

हत्या के बाद खुद पहुंचा था थाने
घटना से तीन दिन पहले ही सुरेश दिल्ली से घर आया था और दो दिन बाद उसे वापस ड्यूटी पर लौटना था। 10 जुलाई 2025 को जब सुरेश चबूतरे पर बैठकर मोबाइल देख रहा था, तब मनोज ने आकर उसके सीने में गोली उतार दी। हत्या को अंजाम देने के बाद आरोपी मनोज खुद हत्या में इस्तेमाल तमंचा लेकर थाने पहुंच गया था, जहां पुलिस ने उसे और बाद में बीना को गिरफ्तार कर लिया था।

अंतरंग फोटो और वीडियो बने सजा का आधार
पुलिस ने जब इस मामले की तहकीकात की तो आरोपी मनोज के मोबाइल फोन को जांच के दायरे में लिया। उस मोबाइल से पुलिस के हाथ ऐसे डिजिटल सबूत लगे, जिन्होंने इस केस को और मजबूत बना दिया। मनोज के फोन से पुलिस को उसके और बीना के कई अंतरंग फोटो और वीडियो बरामद हुए। पुलिस ने इन डिजिटल साक्ष्यों को अदालत में पेश किया, जो दोनों के अवैध संबंधों और इस सुनियोजित हत्या के गुनाह को साबित करने में सबसे बड़ा आधार बने।

पति और बच्चों को नशीली गोलियां देकर प्रेमी को बुलाती थी
फिरोजाबाद के रैपुरा क्षेत्र के बीच का नगला की रहने वाली 30 वर्षीय बीना की शादी करीब 12 साल पहले हुई थी। उसका पति सुरेश परिवार के भरण-पोषण के लिए दिल्ली में रहकर सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करता था। हफ्ते-दस दिन में छुट्टी लेकर घर आता था। इसी बीच, घर से महज 20 मीटर की दूरी पर दुकान चलाने वाले मनोज से बीना के अवैध संबंध बन गए। चूंकि मनोज पड़ोसी था, इसलिए उसका घर पर आना-जाना भी शुरू हो गया था। बीना की अपने प्रेमी के प्रति दीवानगी इस हद तक बढ़ चुकी थी कि वह रास्ते के हर कांटे को हटाने के लिए शातिर तरीका अपनाती थी। बच्चों और पति को जब भी प्रेमी से मिलने में रुकावट महसूस होती, बीना उनके खाने में नींद की गोलियां मिला देती थी। गोलियों का असर होते ही पूरा परिवार गहरी नींद में सो जाता था, जिसके बाद वह बेखौफ अपने प्रेमी मनोज को घर बुलाती थी। सुरेश को जब इस बात की भनक लगी तो उसने अपनी पत्नी को समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन बीना पर इसका कोई असर नहीं हुआ।

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