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एजी ऑफिसर में आग : हादसा या साजिश, शीघ्र होगा खुलासा, जांच के लिए लैब भैजे गए फुटेज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 18 Jul 2022 09:46 AM IST
सार
राहत कार्य के दौरान ही पुलिस ने मौकेपर पहुंचकर सीसीटीवी फुटेज खंगाले। साथ ही इसके डीवीआर को भी कब्जे में ले लिया। सूत्रों का कहना है कि फिलहाल जो फुटेज देखी गई, उनमें कोई संदिग्ध गतिविधि बिल्डिंग के भीतर नहीं मिली है।
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Prayagraj News : महाधिवक्ता कार्यालय में लगी भीषण आग।
- फोटो : अमर उजाला।
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महाधिवक्ता कार्यालय में हुई अग्नि दुर्घटना के मामले में जांच पड़ताल शुरू हो गई है। इसके तहत पुलिस ने बिल्डिंग में सीसीटीवी कैमरों का डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर(डीवीआर) भी कब्जे में ले लिया है। साथ ही इसे फोरेंसिक जांच के लिए लैब में भेज दिया है। यहां सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच होगी, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह महज एक हादसा था या इससे इतर भी किसी बिंदु पर जांच की आवश्यक्ता है।
सूत्रों का कहना है कि राहत कार्य के दौरान ही पुलिस ने मौकेपर पहुंचकर सीसीटीवी फुटेज खंगाले। साथ ही इसके डीवीआर को भी कब्जे में ले लिया। सूत्रों का कहना है कि फिलहाल जो फुटेज देखी गई, उनमें कोई संदिग्ध गतिविधि बिल्डिंग के भीतर नहीं मिली है। फुटेज देखने का आशय यह था कि कहीं कोई व्यक्ति अनाधिकृत तौर से तो बिल्डिंग के भीतर नहीं प्रवेश कर गया था। फिलहाल ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है। हालांकि एहतियातन पुलिस अफसरों ने डीवीआर कब्जे में ले लिया। अफसरों का कहना है कि शाम को ही इसे सील कर जांच के लिए एफएसएल भेज दिया गया है। विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार करते वक्त फोरेंसिक लैब में हुई डीवीआर की जांच रिपोर्ट को भी समाहित किया जाएगा।
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Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने महाधिवक्ता कार्यालय में लगी भीषण आग।
- फोटो : अमर उजाला।
बाधा बनीं तेज हवाएं, बौछारों को किया बेअसर
प्रयागराज। महाधिवक्ता कार्यालय में लगी आग पर काबू पाने में 14 घंटे लगे तो इसकी एक वजह तेज हवाएं भी रहीं। सुबह से ही चल रही तेज हवाएं राहत कार्य में बाधा बनीं, जिसके चलते वाटर कैनन जैसी बौछारें भी बेअसर हो गईं। यही वजह रही कि आग बुझाने में दिक्कतों का सामनो करना पड़ा और देखते ही देखते बिल्डिंग के चार तल आग से घिर गए। जिसमें अतिमहत्वपूर्ण दस्तावेज राख के ढेर में तब्दील हो गए।
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Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने महाधिवक्ता कार्यालय में लगी भीषण आग।
- फोटो : अमर उजाला।
अंबेडकर भवन में हुई अग्नि दुर्घटना में फायरब्रिगेड के सामने कई तरह की चुनौतियां थीं। बिल्डिंग की ऊंचाई काफी ज्यादा होना इनमें से एक था। फायर टेंडर से सामान्यतया तीन या चार मंजिला भवनों पर आसानी से आग बुझा ली जाती है। लेकिन यहां बिल्डिंग नौ मंजिल की थी। आग सबसे पहले छठे मंजिल पर लगी। ऐसे में यहां तक पानी पहुंचाने में ही खासा मशक्कत करनी पड़ी। इसमें भी सबसे बड़ी दिक्कत तेज हवाओं ने खड़ी कीं।
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Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने महाधिवक्ता कार्यालय में लगी भीषण आग।
- फोटो : अमर उजाला।
दरअसल हवाएं तेज होने के चलते पानी की बौछार छठें तल तक पहुंचने से पहले ही मुड़ जा रही थीं। इससे पानी नहीं पहुंच पा रहा था और आग फैलती ही जा रही थी। इसे देखते हुए एक फायर टेंडर हाईकोर्ट ओवरब्रिज पर लाया गया और फिर यहां से पानी की बौछार शुरू की गई। लेकिन तेज हवाओं के चलते यहां भी जवानों को निराश ही होना पड़ा। ओवरब्रिज से की जा रही पानी की बौछार की दिशा भी तेज हवाओं के चलते बिल्डिंग के भीतर पहुंचने से पहले ही दूसरी ओर मुड़ जा रही थी। इसी तरह महाधिवक्ता कार्यालय के बगल में स्थित बहुमंजिला इमारत से की जा रही बौछारें भी सामने से तेज हवाएं आने के चलते बिल्डिंग तक नहीं पहुंच पा रही थीं।
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Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट के सामने महाधिवक्ता कार्यालय में लगी भीषण आग।
- फोटो : अमर उजाला।
क्रेन मंगाई गई तब बनी बात
काफी मशक्कत के बाद भी बिल्डिंग तक पानी की बौछारें पहुंचाने में नाकाम रहने के बाद फायरब्रिगेड अफसरों ने क्रेन मंगाने का फैसला किया। इसके बाद निजी सर्विस सेंटर की हाईड्रोलिक क्रेन मंगाई गई। इसके बाद जान की बाजी लगाकर फायर कर्मियों ने हाईड्रोलिक क्रेन पर चढ़कर बिल्डिंग के भीतर पानी की बौछार करना शुरू किया, तब जाकर स्थिति कुछ नियंत्रित की जा सकी। अफसरों का कहना है कि यह तकनीक कारगर रही, जिससे भारी मात्रा में पानी बिल्डिंग के भीतर फेंका गया और इससे काफी हद तक आग की तीव्रता कम हुई।
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