High Court : नाबालिग की अभिरक्षा मामले में मुस्लिमों पर भी लागू होते हैं अभिभावक व आश्रित अधिनियम
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिम व्यक्तिगत कानून (पर्सनल लाॅ) से शासित होने वाले पक्षकार भी अपने नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा (कस्टडी) प्राप्त करने के लिए ‘अभिभावक एवं आश्रित अधिनियम-1890’ के प्रावधानों का सहारा ले सकते हैं।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि मुस्लिम व्यक्तिगत कानून (पर्सनल लाॅ) से शासित होने वाले पक्षकार भी अपने नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा (कस्टडी) प्राप्त करने के लिए ‘अभिभावक एवं आश्रित अधिनियम-1890’ के प्रावधानों का सहारा ले सकते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह अधिनियम एक सामान्य कानून है, जो धर्म पर ध्यान दिए बिना सभी व्यक्तियों पर लागू होता है। मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत आने वाले लोग भी इसके माध्यम से राहत पाने के हकदार हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति अनिल कुमार-दशम की एकल पीठ ने रिजवाना की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है।
बस्ती निवासी रिजवाना ने दो नाबालिग बच्चों की अभिरक्षा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। याची का तर्क था कि मुस्लिम कानून के अनुसार सात वर्ष से कम आयु के बालक और नाबालिग लड़की की अभिरक्षा का अधिकार मां के पास होता है। साथ ही यह दलील दी गई थी कि अभिभावक एवं आश्रित अधिनियम-1890 मुस्लिम पक्षकारों पर प्रभावी नहीं होता। इसलिए बच्चों की अभिरक्षा का विवाद केवल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका के जरिये ही तय किया जा सकता है।
अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि ‘अभिभावक एवं आश्रित अधिनियम 1860’ की धारा-6 किसी भी वर्ग के व्यक्ति को अदालत जाने से नहीं रोकती, बल्कि यह विभिन्न श्रेणियों के अभिभावकों को मान्यता देने का काम करती है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिभावक शब्द की परिभाषा काफी व्यापक है। इसमें बच्चे की हिरासत का अधिकार भी शामिल है। हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट एक्ट 1984 की धारा-7 के तहत परिवार न्यायालय को नाबालिगों की संरक्षकता और हिरासत से जुड़े मामलों पर निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है।
कोर्ट ने कहा कि बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका एक संक्षिप्त प्रक्रिया है, जिसमें साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन और बच्चों के कल्याण की गहन जांच संभव नहीं है। अंत में अदालत ने याचिका को निस्तारित करते हुए याचिकाकर्ता को सलाह दी कि वह उचित राहत के लिए सक्षम परिवार न्यायालय के समक्ष अपनी बात रखे।