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लॉकडाउन में छात्रों को घर लौटने की खुशी पर भविष्य की चिंता भी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Tue, 28 Apr 2020 11:35 PM IST
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Future concern over the joy of students returning home in lockdown
prayagraj news - फोटो : prayagraj
प्रयागराज। बस्ती के रहने वाले प्रतियोगी छात्र दीपेंद्र शुक्ला मंगलवार शाम बस पकड़ने के लिए लोक सेवा आयोग चौराहे पर पहुंचे तो उनके चेहरे पर घर लौटने की खुशी तो थी, लेकिन उन्हें अपने भविष्य की चिंता भी सता रही थी। दीपेंद्र यहां गोविंदपुर में मेला रोड स्थित एक किराये के कमरे में रहकर पीसीएस-जे एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। घर से जो थोड़ी-बहुत मदद मिली थी, उसी से गुजारा हो रहा था। पांच दिन पहले उनकी जेब खाली गई तो अपने साथियों से राशन उधार लेकर एक वक्त के भोजन का इंतजाम जैसे-तैसे किया। 
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लॉकडाउन के कारण प्रयागराज में फंसे प्रतियोगी छात्र पंकज कुमार का मानना है कि यहां रहें या घर लौटें, दोनों ही परिस्थितियों में नौकरी मिलने तक परिवार वालों पर ही निर्भर रहना होगा। खर्च चलाने के लिए घर से हर महीने पांच-छह हजार रुपये मिल जाते हैं। लॉकडाउन के दौरान यहां रहकर उन्हें फिलहाल कोई फायदा नजर नहीं आता। अगर घर लौट गए तो महीने के पांच-छह हजार रुपये भी बच जाएंगे, सो उन्होंने घर लौटने का मन बनाया और जेब में रखी सौ की नोट के साथ बस पकड़ने निकल पड़े। पकंज ने पीसीएस-2018 और एसीएफ/ आरएफओ-2017 की मुख्य परीक्षा दे रखी है। उन्हें उम्मीद थी कि इस बार सफलता जरूर मिलेगी। 
 
Future concern over the joy of students returning home in lockdown
prayagraj news - फोटो : prayagraj
तमाम छात्रों को आशंका है कि घर लौट तो उन्हें क्वारंटीन किया जा सकता है। 
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
मम्फोर्डगंज में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अशोक पांडेय का लॉज खाली हो चुका है और वह वहां अकेले रह गए हैं। अशोक मूलत: बलरामपुर के हैं। उनका कहना है कि वह घर लौटने की तैयारी में हैं, लेकिन कुछ तय नहीं कर पा रहे हैं। भविष्य को लेकर इस कदर तनाव में हैं कि निर्णय लेने से पहले सौ बार सोचना पड़ता है। गोविंदपुर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे आशीष पांडेय घर लौटने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्होंने प्रयागराज में ही रहकर परिस्थितियों से लड़ने की ठानी। वह मूलत: बस्ती के रहने वाले हैं। प्रतियोगी परीक्षाएं लगातार स्थगित होने से तनाव में हैं। पैसे की कमी के कारण उन्हें भी अन्य छात्रों की तरह राशन और रोजमर्रा की जरूरत वाली वस्तुओं के लिए भटकना पड़ रहा है। आशीष का कहना है कि स्थगित की गईं परीक्षाएं कब होंगी, अभी तय नहीं है। इस विषम परिस्थिति में सरकार नौकरी देगी या नहीं, इसे लेकर आशंकित हैं। 
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prayagraj news - फोटो : prayagraj
स्क्रीनिंग प्रक्रिया पर छात्रों ने उठाए सवाल
सोमवार को तमाम प्रतियोगी छात्र जौनपुर एवं अन्य जिलों के लिए बसों से रवाना किए गए थे। छात्रों ने घर लौटने के बाद अपने साथियों को फोन पर बताया कि जिला मुख्यालय पहुंचने के बाद स्थानीय प्रशासन की ओर से उनके लिए भोजन-पानी की व्यस्था की गई और उनकी स्क्रीनिंग भी हुई। हालांकि छात्रों ने स्क्रीनिंग प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। प्रतियोगी छात्र दीपेंद्र का कहना है कि  छात्रों को यहां बसों में बैठाने से पूर्व स्क्रीनिंग होनी चाहिए। अगर कोई छात्र कोरोना संदिग्ध पाया जाता है तो अन्य छात्रों को संक्रमित होने से बचाया जा सकता है। अगर बिना स्क्रीनिंग के छात्रों को एक साथ बसों में बैठा दिया जाएगा तो सभी पर खतरा मंडराता रहेगा।
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