हवाई हमले का बजता सायरन, बम के धमाके, चारों तरफ अंधेरा, चीख-पुकार, हमले से बचने के लिए जमीन पर लेटते लोग, घायलों को इलाज के लिए ले जाते सिविल डिफेंस के सदस्य, घरों में लगी आग बुझाती अग्निशमन पुलिस... यह ही नजारा बुधवार को बरेली में आईवीआरआई के पास दिखा। यहां युद्ध अथवा किसी भी आपातकालीन स्थिति में नागरिकों को हमले से बचाव और ब्लैक आउट के लिए मॉक ड्रिल (आपातकालीन अभ्यास) किया गया।
रात आठ बजे अभ्यास शुरू होना था लेकिन शाम सात बजे से ही पुलिस, प्रशासन, सिविल डिफेंस, एनसीसी कैडेट्स निर्धारित स्थान पर पहुंचकर अभ्यास की तैयारियां करने लगे। शाम साढ़े सात बजे के बाद डेलापीर और आईवीआरआई ओवरब्रिज से वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया। सिविल डिफेंस और पुलिस वाहनों को डायवर्ट करते रहे।
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मॉक ड्रिल के दौरान सड़क पर लेटे लोग
- फोटो : अमर उजाला
शाम 7:59 मिनट पर सिविल डिफेंस की ओर से प्रशासन को सूचना दी गई कि पाकिस्तान से कुछ लड़ाकू विमान देश की सीमा में प्रवेश कर चुके हैं। फिर हवाई हमले से बचाव का सायरन बजने लगा। धमाके होने लगे। जो जहां था, वहीं बैठ या लेट गया।
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10 मिनट के लिए अंधेरे में डूबा शहर
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आसपास के कार्यालय, सड़क, दुकान, मकान, वाहन, मोबाइल और टावर की लाइट बुझाकर ब्लैक आउट कर दिया गया। ठीक दस मिनट तक ब्लैक आउट के बाद जैसे ही हवाई हमले थमे सुरक्षा और बचाव कार्य संबंधित विभागों ने शुरू कर दिया।
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बरेली में हुआ ब्लैक आउट
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दस मिनट तक जिले के हर इलाके में ब्लैक आउट
गृह मंत्रालय के निर्देशानुसार बुधवार रात आठ से 8:10 बजे तक जिले भर में ब्लैक आउट रहा। शहर और ग्राम वासियों समेत शिक्षण संस्थान, पेट्रोल पंप, शराब की दुकान, ठेला, खोमचे वालों ने ब्लैक आउट से देश के प्रति दायित्व का परिचय दिया। सड़क से गुजर रहे वाहन जहां थे, वहीं ठहर गए। परसाखेड़ा, सीबीगंज औद्योगिक क्षेत्र समेत आवश्यक सेवा में दर्ज अस्पतालों में भी यथासंभव ब्लैक आउट रहा।
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मॉक ड्रिल में मौजूद अधिकारी
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ये रहे मौजूद
कमिश्नर सौम्या अग्रवाल, डीएम अविनाश सिंह, आईवीआरआई डायरेक्टर डॉ. त्रिवेणी दत्त, बीडीए वीसी मनिकंडन ए, सीडीओ जग प्रवेश, एडीएम प्रशासन पूर्णिमा सिंह, एडीएम सिटी सौरभ दुबे, एसपी सिटी मानुष पारीक, एसपी ट्रैफिक मो. अकमल खान समेत अन्य अधिकारी और सिविल डिफेंस के स्वयंसेवक, एनसीसी कैडेट्स, नेहरू युवा केंद्र की टीम व अन्य लोग मौजूद रहे।