Bareilly News: कूड़े से पटी नहर में गिरकर युवक की मौत, दो दिन बाद मिला शव, मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
बरेली के सीबीगंज क्षेत्र में कूड़े से पटी नहर में गिरकर एक युवक की मौत हो गई। जहां पर हादसा हुआ है, वहां कोई संकेतक नहीं लगा था। डीएम ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं।
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बरेली में 12 मार्च को सेटेलाइट पर नाले में गिरकर हरदोई निवासी तौहीद की मौत का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि बुधवार को सिंचाई विभाग की लापरवाही से नंदोसी गांव में नहर में गिरने से पचा गौटिया निवासी मेघनाथ उर्फ राजू (30 वर्ष) की मौत हो गई। उसका शव दो दिन तक कूड़े से पटी नहर में ही पड़ा रहा। पुलिस ने बुधवार को शव का पोस्टमॉर्टम करवाकर उसे परिजनों को सौंप दिया। शाम को गांव की श्मशान भूमि पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
सीबीगंज पुलिस के मुताबिक, राजू परसाखेड़ा में मजदूरी करते थे। सोमवार को वह मजदूरी करने गए, लेकिन शाम तक घर नहीं लौटे। काफी तलाश के बावजूद उनका कोई पता नहीं लगा तो परिजनों ने परसाखेड़ा चौकी पुलिस को अनहोनी की आशंका जताते हुए शिकायतीपत्र सौंपा।
इंस्पेक्टर सीबीगंज प्रदीप कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि बुधवार को सुबह ग्रामीणों की ओर से नंदोसी गांव में पुलिया के पास नहर में शव पड़ा होने की सूचना मिली। नाले में गंदे पानी के साथ ही कूड़ा-कचरा भरा पड़ा था। पुलिस ने लोगों की मदद से शव को बाहर निकाला। बताया जा रहा है कि जिस नहर से शव बरामद किया गया है, वहां दोनों तरफ आबादी है। लोगों का पूरे दिन जमावड़ा रहता है, इसके बावजूद भी किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। सूचना पर मृतक के परिजन मौके पर पहुंचे और शव की शिनाख्त की। फील्ड यूनिट ने भी अपनी जांच कर फिंगरप्रिंट लिए। पुलिस के मुताबिक, युवक नशे का आदी था।
नहर को बना दिया नाला, हो गए कब्जे
सीबीगंज से नंदोसी गांव में बनी नहर पर लोगों ने कब्जा कर नाला बना दिया है। नहर घनी आबादी से निकलती है, इसके बाद भी वहां पर सुरक्षा के सिंचाई विभाग की ओर से कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। नहर के आसपास न तो कोई बैरिकेडिंग की गई है, न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया है। अक्तूबर 2025 में इसकी सफाई कराई गई थी, लेकिन लोगों के घरों से निकलने वाला गंदा पानी व कचरा इसी नहर में जाता है। इस वजह से नहर में फिर गंदगी जमा हो गई है।
मामले की होगी मजिस्ट्रियल जांच
नदोसी गांव में नहर में गिरकर युवक की मौत के मामले की मजिस्ट्रियल जांच होगी। डीएम के इस फैसले ने अब तक मामले से पल्ला झाड़ रहे सिंचाई विभाग के अफसरों की परेशानी बढ़ा दी है। उन पर कार्रवाई हो सकती है। दरअसल, हादसे के बाद सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता ने जमीन को विभाग का मानने से ही इन्कार कर दिया था। डीएम का कहना है कि मजिस्ट्रियल जांच में सच सामने आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
हादसे को लेकर पहले नगर निगम पर सवाल उठे। तब नगर आयुक्त संजीव कुमार मौर्य ने इसे नहर बताया और जमीन सिंचाई विभाग की होने की बात कही। वहीं, सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अजीत कुमार ने कहा कि जमीन उनके विभाग की है ही नहीं। ऐसे में वहां नहर होने का सवाल ही नहीं उठता। दोनों विभागों की यह तकरार डीएम तक पहुंची तो उन्होंने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए।
क्षेत्रीय पार्षद अंजुल बोलीं-जमीन सिंचाई विभाग की
क्षेत्रीय पार्षद अंजुल ने बताया कि यह जमीन सिंचाई विभाग की है। यहां वर्षों पहले नहर खोदी गई थी, लेकिन पानी आज तक नहीं छोड़ा गया। घरों से निकलने वाला पानी इसमें जाता है। सफाई न होने से कूड़ा-कचरा भरा है। नहर होने के कारण नगर निगम भी इसकी सफाई नहीं कराता।
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने बताया कि युवक की मौत के मामले की मजिस्ट्रियल जांच कराई जाएगी। जांच में हकीकत सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
