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बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे: जमीन के दाम बढ़े, विकास के साथ रोजगार के बहुतेरे मौके खड़े, पढ़ें खास खबर
Wed, 07 Apr 2021 08:35 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 07 Apr 2021 08:35 AM IST
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निर्माणाधीन बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे
- फोटो : अमर उजाला
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निर्माणाधीन बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के आसपास जमीन की कीमत बहुत बढ़ गई है। एक लाख रुपये बीघा की जमीन अब 1.5 और दो लाख तक में बिक रही है। कई लोग वहां बड़े पैमाने पर जमीन खरीद रहे हैं। उन्हें उम्मीद है कि एक्सप्रेस-वे बनने के बाद कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी और तब बड़े पैमाने पर कारखाने, बाजार और होटल बनेंगे। इसके साथ कॉरीडोर भी विकास के साथ रोजगार के नए रास्ते खोलेगा। तब जमीन के मुंहमांगे दाम मिलेंगे। पेश है शैलेश अवस्थी की रिपोर्ट...
चित्रकूट के रजौली गांव में निर्माणाधीन कारखाना
- फोटो : अमर उजाला
चित्रकूट जिले के रौली कल्याणपुर, धरौही, लोहिया, भटौरा और आसपास के गांवों के कई किसानों को एक करोड़ से सात करोड़ रुपये तक मुआवजा मिला है। इसमें से कुछ ने तो पास ही इस उम्मीद पर जमीन खरीद ली कि भविष्य में इसके दाम बहुत बढ़ेंगे, तब बड़ा मुनाफा कमा सकते हैं।
रौली कल्यानपुर (चित्रकूट) गांव में रोड के किनारे मशीनरी-पाटर्स का बड़ा कारखाना लग रहा है। इसके बगल में मतगंजर का मकान है। मौका देख उन्होंने परचून की छोटी सी दुकान घर के बाहर खोल ली। निर्माणाधीन कारखाने के मजदूर और अन्य ग्राहक आते हैं। वह बताते हैं कि इस कारखाने के बनने के बाद आसपास के लोगों को रोजगार मिलेगा।
रौली कल्यानपुर (चित्रकूट) गांव में रोड के किनारे मशीनरी-पाटर्स का बड़ा कारखाना लग रहा है। इसके बगल में मतगंजर का मकान है। मौका देख उन्होंने परचून की छोटी सी दुकान घर के बाहर खोल ली। निर्माणाधीन कारखाने के मजदूर और अन्य ग्राहक आते हैं। वह बताते हैं कि इस कारखाने के बनने के बाद आसपास के लोगों को रोजगार मिलेगा।
एक्सप्रेस-वे के पास निर्माणाधीन मार्केट
- फोटो : अमर उजाला
अभी कलपुर्जे खरीदने के लिए कबरई, महोबा और कानपुर जाना पड़ता है, लेकिन अब कारखाना बनने के बाद यहीं सामान उपलब्ध हो जाएगा। आसपास और भी कई लोग कारखाना और मार्केट बनाने के लिए जमीन के सौदे कर रहे हैं। खरैला (महोबा) के पप्पू की सात बीघा जमीन एक्सप्रेस-वे में चली गई। अच्छा मुआवजा मिला तो उनके पिता ने पास ही एक प्लाट और सात बीघा जमीन कम दाम पर खरीद ली।
उम्मीद है कि आगे बेचने पर इसका अच्छा मुनाफा मिलेगा। चित्रकूट जिले के गोडा करारी गांव के राम नारायण के पिता को मुआवजा मिला तो उन्होंने उनसे कुछ रुपये लेकर निर्माणाधीन एक्सप्रेस-वे (डबरापुरवा मजरा) पर एक छोटा सा ढाबा बना लिया। वह कहते हैं कि जैसे-जैसे एक्सप्रेस-वे निर्माण का काम खत्म होता जाएगा, वैसे-वैसे उनका ढाबा बड़ा रूप लेता जाएगा।
उम्मीद है कि आगे बेचने पर इसका अच्छा मुनाफा मिलेगा। चित्रकूट जिले के गोडा करारी गांव के राम नारायण के पिता को मुआवजा मिला तो उन्होंने उनसे कुछ रुपये लेकर निर्माणाधीन एक्सप्रेस-वे (डबरापुरवा मजरा) पर एक छोटा सा ढाबा बना लिया। वह कहते हैं कि जैसे-जैसे एक्सप्रेस-वे निर्माण का काम खत्म होता जाएगा, वैसे-वैसे उनका ढाबा बड़ा रूप लेता जाएगा।
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दाऊ तिवारी
- फोटो : अमर उजाला
एक बड़ा होटल बनाने का इरादा है। इसी तरह बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के आसपास के सात जिलों में कई छोटी-बड़ी दुकानें, ढाबे, मोबाइल शॉप, मैगी प्वाइंट, गेस्टहाउस, पंचर, वाहन रिपेयरिंग सहित कई और दुकानें खुल रही हैं। कुछ लोग कारखाने लगाने की योजना बना रहे हैं।
बड़े पैमाने पर रोजगार
एक्सप्रेस-वे निर्माण के बाद बुंदेलखंड में बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा। नौकरी के लिए नौजवानों का पलायन रुकेगा। दूसरे शहरों में नौकरी कर रहे कई लोग अपने शहर और गांव लौट रहे हैं। एक्सप्रेस-वे के आसपास जमीन महंगी हो गई है। उद्योग-धंधे, ढाबे स्थापित किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि एक्सप्रेस-वे और कारीडोर बनने के लिए कमाई के लिए बाहर भटकना नहीं पड़ेगा। कनेक्टिविटी बढ़ने से फसल के अच्छे दाम मिल सकेंगे।- दाऊ तिवारी महोबा, सदस्य विकास समिति
बड़े पैमाने पर रोजगार
एक्सप्रेस-वे निर्माण के बाद बुंदेलखंड में बड़े पैमाने पर रोजगार का सृजन होगा। नौकरी के लिए नौजवानों का पलायन रुकेगा। दूसरे शहरों में नौकरी कर रहे कई लोग अपने शहर और गांव लौट रहे हैं। एक्सप्रेस-वे के आसपास जमीन महंगी हो गई है। उद्योग-धंधे, ढाबे स्थापित किए जा रहे हैं। उम्मीद है कि एक्सप्रेस-वे और कारीडोर बनने के लिए कमाई के लिए बाहर भटकना नहीं पड़ेगा। कनेक्टिविटी बढ़ने से फसल के अच्छे दाम मिल सकेंगे।- दाऊ तिवारी महोबा, सदस्य विकास समिति
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रजौली गांव के मतगंजर की दुकान
- फोटो : अमर उजाला
अब दिन बहुरेंगे
एक्सप्रेस-वे निर्माण के साथ रौनक भी बढ़ रही है। इसी उम्मीद में मैंने परचून की दुकान खोली है। अभी तो कोई खास बिक्री नहीं होती, लेकिन भविष्य अच्छा होगा। जरूरत और मांग के मुताबिक दुकान और बड़ी बनाएंगे। बगल में कलपुर्जे का कारखाना बन रहा है तो बिक्री हो जाती है। कई और लोग दुकानें, ढाबे और गेस्टहाउस बना रहे हैं। - मतगंजर, रौली कल्यानपुर (चित्रकूट)
एक नजर
- 11,480 किसानों से खरीदी गई जमीन
- 7 जिलों से निकल रहा है एक्सप्रेस-वे
- 3 गुनी तक महंगी हो गई यहां की जमीन
- 5 लाख से अधिक को रोजगार की उम्मीद
एक्सप्रेस-वे निर्माण के साथ रौनक भी बढ़ रही है। इसी उम्मीद में मैंने परचून की दुकान खोली है। अभी तो कोई खास बिक्री नहीं होती, लेकिन भविष्य अच्छा होगा। जरूरत और मांग के मुताबिक दुकान और बड़ी बनाएंगे। बगल में कलपुर्जे का कारखाना बन रहा है तो बिक्री हो जाती है। कई और लोग दुकानें, ढाबे और गेस्टहाउस बना रहे हैं। - मतगंजर, रौली कल्यानपुर (चित्रकूट)
एक नजर
- 11,480 किसानों से खरीदी गई जमीन
- 7 जिलों से निकल रहा है एक्सप्रेस-वे
- 3 गुनी तक महंगी हो गई यहां की जमीन
- 5 लाख से अधिक को रोजगार की उम्मीद