पाषाण काल के अवशेष मिले: 6 हजार साल पुरानी हड्डी, लाक की चूड़ियां, लौह उपकरण और भी बहुत कुछ, देखें तस्वीरें
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इमिलिया में उत्तर मध्यकालीन भव्य मंदिर व गणेश की प्रतिमा और उमरी में पूर्ण मध्यकालीन प्रतिमाओं के भग्न भाग व ईंटों से निर्मित मंदिर भी भग्नावस्था में पाए गए हैं। कंधौली में पूर्व मध्यकाल में निर्मित विष्णु प्रतिमा, हनुमान की अस्पष्ट प्रतिमा का शीर्ष भाग, उत्तर मध्यकालीन सतीपट्ट व करगांव से प्राचीन टीला सर्वे में मिला है। यहां मध्यकालीन वीरपट्ट भी मिला है।
पुरातत्व अधिकारी ने बताया चिल्ली गांव की सीमा मेें स्थित प्राचीन टीले से कृष्ण लेपित के काले व लाल बर्तन, समकालीन लाल मिट्टी के बर्तनों के अवशेष देखे गए हैं। यहां हनुमान की मध्यकालीन प्रतिमा व रामजानकी मंदिर भी सर्वे में मिला है। जल्ला गांव में पूर्व मध्यकालीन प्रतिमाओं की धरोहरों में विष्णु की प्रतिमा का ऊर्ध्व भाग स्पष्ट रूप से देखा गया है। पुरातत्व अधिकारी ने बताया कि तगारी गांव में प्राचीन टीला से पाषाण औजार, हड्डी, लाख की चूड़ियां, लौह उपकरण व लाल बर्तनों के अवशेष पुरातत्व की दृष्टि से बड़े ही महत्वपूर्ण है। गांव की सीमा में पूर्व मध्यकालीन पत्थर से निर्मित मंदिर स्थित हैं, जहां प्रांगण में समकालीन दो भव्य शिव लिंग सर्वे के दौरान देखे गए हैं।
न्यूरिया गांव के बाहर नाले के दोनों ओर स्थित प्राचीन टीला से नव पाषाण कालीन एक सेल्ट व लाल बर्तनों के अवशेष मिले हैं। इसी के समीप आधुनिक मंदिर में शिवलिंग व पूर्व मध्यकालीन प्रतिमाओं के खंडित भाग पड़े हैं। गांव में उत्तर मध्यकालीन वीर पट्ट भी देखा गया है। वहीं लोदीपुर निवादा में प्राचीन टीले से मध्यकालीन धरोहर मंदिर में स्थित है। पहाड़ी भिटारी में प्राचीन टीला और भव्य धरोहरों के अलावा बड़े-बड़े सकोरे और सुपाड़ीनुमा मटके मिले हैं। चंदेलकाल में ग्रेनाइट से निर्मित मंदिर भी भूतल से नीचे हैं। मंदिर के गर्भगृह व सोलह स्तंभों पर मंडप बना है। यहां उत्तर मध्यकालीन गढ़ी के भी अवशेष व सती पट्ट पुरातत्व की नजर में खास है।
बेतवा नदी के किनारे बसे बजेहटा दरिया गांव में टीलों से सर्वे में लघु पाषाण काल के उपकरण व मध्यकालीन लाल मिट्टी के बर्तनों के अवशेष मिले हैं। जिन्हें शोध के लिए राजकीय संग्रहालय में रखा गया है। यहां भी मध्यकालीन मंदिर देखे गए हैं। बसवारी में पूर्व मध्यकालीन शिवलिंग, हनुमान की भव्य प्रतिमा, उत्तर मध्यकालीन के चतुर्मुख शिवलिंग स्थित हैं। बांधुर बुजुर्ग गांव में एक प्राचीन टीला मिला है। बांधुर खुर्द गांव में मंदिरों और प्रतिमाओं के अलावा अंजनी माता की अद्भुत प्रतिमा मिली है। भटरा गांव से प्राचीन टीले में पाषाण काल के उपकरण औजार व लाल मिट्टी के पके बर्तनों के अवशेष मिले हैं। मुस्करा में चंदेलकालीन मंदिर स्थित है जो ग्रेनाइट पत्थर व ईंटों से बना है।
36 गांवों में पुरातात्विक सर्वेक्षण से इस बात की पुष्टि हो गई है कि यहां पाषाण काल से ही मानव निवास करता आया है। सर्वेक्षण में तीन ऐसे गांव मिले हैं जहां बौद्ध काल के पहले से ही मानव सभ्यता विद्यमान थी। गांवों में चंदेलकाल व परवर्ती काल के पुरातात्विक अवशेष और धरोहरें मिली हैं जो बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। पहाड़ी भिटारी मेें चंदेल काल में जमीन के नीचे ग्रेनाइट पत्थर से बना मंदिर पुरातत्व की नजर में बहुत ही खास है। जिसे अब राजकीय संरक्षण में लिए जाने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुरातात्विक सर्वेक्षण में मिली प्राचीन घरोहरों और पाषाण काल के औजार व अवशेषों पर शोध किया जाएगा। - डॉ. एसके दुबे, क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी, झांसी