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मरीज कहां जाएं! जब 'अस्पताल ही बीमार है', इस मजबूरी का फायदा उठा रहे झोलाछाप डॉक्टर

Fri, 09 Feb 2018 08:57 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Fri, 09 Feb 2018 08:57 AM IST
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condition of CHC Bangaramu is very poor
सीएचसी बांगरमऊ
यूपी में उन्नाव जिले के बांगरमऊ सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है। यहां न जरूरत के मुताबिक डाक्टर हैं और न ही जांच सुविधाएं हैं। दवाओं का भी टोटा रहता है। इससे क्षेत्र के लोग झोलाछाप से इलाज कराने के लिए मजबूर हैं।





 
condition of CHC Bangaramu is very poor
डेमो पिक
बांगरमऊ सीएचसी में सिर्फ एक विशेषज्ञ चिकित्सक चिकित्साप्रभारी डॉ. प्रमोद दोहरे की तैनाती है। पांच अन्य चिकित्सक संविदा पर तैनात हैं। कस्बे के लोगों के अनुसार डाक्टर कब आते और चले जाते हैं, पता नहीं चलता। संविदा डाक्टर अधिकतर मरीजों को बाहर से खरीदने के लिए दवा लिखते हैं। मरीजों को नर्सिंग होम में इलाज कराने के लिए गुपचुप तरीके से भेज देते हैं। यही वजह है कि लोग सीएचसी में इलाज कराने से कतराने लगे हैं।

 
condition of CHC Bangaramu is very poor
डेमो पिक
इसका फायदा सीएचसी के आसपास सक्रिय निजी डाक्टर, नर्सिंग होम व झोलाछाप उठा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार सीएचसी में पांच विशेषज्ञ चिकित्सक समेत दस चिकित्सक होने चाहिए। तैनाती आठ चिकित्सक की ही है। इनमें दो महिला चिकित्सक भी शामिल हैं। एक्सरे व अल्ट्रासाउंड मशीन कई माह से खराब हैं। ऐसे में मरीजों को जांच व एक्सरे के लिए निजी जांच केंद्रों का सहारा लेना पड़ता है। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार कई बार सीएमओ से इसकी शिकायत की गई लेकिन सुधार नहीं हुआ।

 
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विकास से कोसों दूर हैं गांव

condition of CHC Bangaramu is very poor
सीएचसी बांगरमऊ
एचआईवी की चपेट में आए चकमीरापुर, किरमिदियापुर व कस्बे के प्रेमगंज मोहल्ले के बाशिंदों की हालत ठीक नहीं है। इन गांवाें के बीस फीसदी लोग दिल्ली, पंजाब, हरियाणा व गुजरात में मजदूरी करते हैं। दस फीसदी लोग आसपास के ईंट भट्ठों व पड़ोसी जिलों की फैक्ट्रियों में काम करते हैं। अन्य किसान या खेतिहर मजदूर हैं। आय कम होने से इनकी जिंदगी मुश्किल से कट रही है।

 
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अज्ञानता से आ रहे चपेट में

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डेमो
बांगरमऊ तहसील के ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा का अभाव है। साक्षरता प्रतिशत तीस फीसदी ही है। यही वजह है कि यहां के लोग स्वास्थ्य को लेकर जागरूक नहीं हैं। इसी से इन्होंने एक ही सिरिंज कई मरीजाें को लगाने का पहले विरोध नहीं किया। हालात ज्यादा बिगड़ने पर स्वास्थ्य अधिकारियों से शिकायत की। इस बीच करीब पांच साल झोलाछाप आसपास के लोगों का इलाज करता रहा।
 
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