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UP: सीधा नहीं भाई तिरछा लिखता था, हैंडराइटिंग पर उठाए सवाल; पोस्टमार्टम से भी नहीं सुलझी तीन मौत की गुत्थी

अमर उजाला नेटवर्क, फतेहपुर Published by: Sharukh Khan Updated Fri, 13 Mar 2026 03:29 PM IST
सार

फतेहपुर में परिवार के तीन लोगों की खुदकुशी के मामले में नया मोड़ आ गया है। बहन का कहना है कि भाई कभी भी सीधा नहीं लिखता था वह हमेशा तिरछा लिखता था। ऐसी हैंडराइटिंग भाई की नहीं हो सकती है।

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Fatehpur mass suicide mystery of three deaths remains unsolved even after the post-mortem
Fatehpur mass suicide - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
फतेहपुर में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत के बाद पुलिस ने बृहस्पतिवार को शवों का पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम से भी तीनों की मौत का राज नहीं खुल पाया। रिपोर्ट में संभावना जताई गई है कि तीनों ने पहले जहर खाया फिर तड़पने पर ब्लेड से गले और हाथ पर चोट पहुंचाई। अधिक खून बहने से मौत हो गई। हालांकि गले के घाव को देखकर डॉक्टर स्पष्ट नहीं कह पा रहे हैं कि तीनों ने खुद का गला रेता है। क्योंकि गले के घाव तिरछे हैं।


लखनऊ बाईपास रोड पर चौफेरवा गांव के रहने वाले अमर श्रीवास्तव, मां सुशीला और चाचा सुनील श्रीवास्तव के शव बुधवार शाम को बंद कमरे में लहुलूहान हालत में मिले थे। दरवाजा तोड़कर अमर का पिता सुशील और पड़ोसी अंदर पहुंचे तो अमर और सुशीला मृत पड़े थे। लहुलूहान सुनील ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ दिया था। तीनों के गले और हाथ की नस कटी थी। एक सुसाइड नोट भी मिला था। शवों का पोस्टमार्टम डॉक्टरों के पैनल ने किया इसकी वीडियोग्राफी भी करवाई गई है।
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Fatehpur mass suicide mystery of three deaths remains unsolved even after the post-mortem
मृतक अमर श्रीवास्तव की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पोस्टमार्टम में सल्फास के अंश और अधपचा खाना मिला है। गले पर गहरे घाव थे। अधिक खून बहने की वजह से मौत की पुष्टि हुई है। जहर की जांच के लिए विसरा सुरक्षित किया गया है। विशेषज्ञों के मुताबिक, अक्सर आत्महत्या में गले का घाव सीधा होता है। टेढ़े घाव के निशान जहर खाने के कारण छटपटाहट होने पर भी हो सकते हैं या फिर एक-दूसरे को मारने के कारण भी ऐसा हो सकता है। अब पुलिस की विवेचना में ही स्थिति साफ होगी।
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मौके पर जांच के लिए पहुंची पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
10 मार्च को था अमर का जन्मदिन, पिता ने दिए थे 100 रुपये
घटना से ठीक एक दिन पूर्व अमर श्रीवास्तव ने अपनी जिंदगी के 29 साल पूरे किए थे। इसके बाद सबकुछ खत्म हो गया। परिवार ने 10 मार्च को अमर का जन्मदिन मनाया था लेकिन परिवार के लोगों के मन में क्या चल रहा था यह कोई भांप नहीं सका।

 
Fatehpur mass suicide mystery of three deaths remains unsolved even after the post-mortem
मौके पर जांच के लिए पहुंची पुलिस - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुशील श्रीवास्तव ने बताया कि बेटे अमर का 10 मार्च को जन्मदिन था। उन्होंने बेटे का टीका कर लंबी आयु की कामना की और उपहार के रूप में 100 रुपये दिए। घटना की दोपहर करीब 11 बजे अमर ने उन्हें बुलाया और 170 रुपये देते हुए कहा कि पापा, जाओ दीदी के घर घूमकर आओ। इसके बाद वह साइकिल लेकर पुत्री के घर जाने को निकला।
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मृतक सुनील श्रीवास्तव की फाइल फोटो - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बहनोई अनमोल ने बताया कि अमर ने उन्हें करीब 11 बजे फोन किया था। वह बाइक में थे इसलिए अधिक बातचीत नहीं हो पाई। शाम करीब चार बजे परिवार ने 20 से 30 बार कॉल की लेकिन अमर का मोबाइल बंद आया।
 
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