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कन्नौज कांड में नया खुलासा: जेल अधीक्षक का ड्राइवर था सेकंड जेलर, इसलिए खाली छोड़ी जाती थी एंट्री बुक में लाइन
अमर उजाला नेटवर्क, कन्नौज
Published by: शाहरुख खान
Updated Sat, 10 Jan 2026 12:54 PM IST
सार
कन्नौज में जेल से दो कैदियों के भागने के बाद अब नया खुलासा हुआ है। जेल अधीक्षक का ड्राइवर सेकंड जेलर था। जिला कारागार में जेल मैनुअल की धज्जियां उड़ाई जा रही थीं। अधीक्षक का विश्वासपात्र होने के कारण, ड्राइवर बंदी रक्षकों की ड्यूटी में भी हस्तक्षेप करता है।
कन्नौज की जलालाबाद जिला कारागार में जेल अधीक्षक के ड्राइवर को सेकंड जेलर माना जाता था। वैसे तो वह बंदी रक्षक है, लेकिन अधीक्षक का चहेता होने के कारण उसे विशेष तवज्जो दी जाती है। बताया जाता है कि कई बंदी रक्षक अवैध कमाई का जरिया बने हैं। वहीं अधीक्षक का कहना है कि षडयंत्र के तहत उनके ऊपर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं। जांच में सब स्पष्ट हो जाएगा।
जिला कारागार में जेल मैनुअल की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जेल अधीक्षक अपनी सुविधानुसार जेल के अंदर आते हैं और उनके लिए मेन गेट पर रखी एंट्री बुक में एक लाइन खाली छोड़ दी जाती है। जब वह आते हैं, तो अपनी ड्यूटी के अनुसार, समय डालकर हस्ताक्षर कर देते हैं। अधीक्षक द्वारा छोड़ी गई लाइन के बाद ही अन्य सभी कर्मचारी गेटबुक पर अपनी एंट्री करते हैं।
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जिला कारागार का निरीक्षण करते डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री व एसपी विनोद कुमार
- फोटो : amar ujala
सूत्रों का कहना है कि अधीक्षक शनिवार और रविवार को अपने घर आगरा चले जाते हैं और सोमवार को दो दिनों की गेटबुक में खाली लाइन भरते हैं। जेल सूत्रों के अनुसार, जेल कैंटीन से लेकर बंदी रक्षकों की ड्यूटी तक, हर जगह अवैध कमाई का खेल चल रहा है। इसमें एक बंदी रक्षक, राहुल चौधरी, का नाम प्रमुखता से उभर रहा है।
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जेल की चहारदीवारी के किनारे खाली वॉच टॉवर
- फोटो : amar ujala
कहने को तो वह जेल अधीक्षक का ड्राइवर है, लेकिन उसका रौब इतना है कि बंदी उसे 'सेकंड जेलर' के नाम से जानते हैं। अधीक्षक का विश्वासपात्र होने के कारण, वह बंदी रक्षकों की ड्यूटी में भी हस्तक्षेप करता है। जिस सिपाही की ड्यूटी वह चाहता है, उसी की ड्यूटी लगाई जाती है।
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को बंदियों के जेल से भागने के बाद जांच के लिए आते अफसर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
कैंटीन से होने वाली हजारों रुपयों की आमदनी की वसूली भी वही करता है। जेल में आने वाले नए बंदियों से भी भारी भरकम वसूली की जाती है। सूत्रों का यहां तक कहना है कि जेल अधीक्षक के बाद, यह बंदी रक्षक जेल के अंदर खुलेआम मोबाइल लेकर चलता है। यह सब कुछ सीसीटीवी कैमरों में कैद है।
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को बंदियों के जेल से भागने के बाद जांच करती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बंदी भागने पर सिपाही पर प्राथमिकी तो जेल कर्मियों पर क्यों नहीं?
पांच दिन पूर्व जिला कारागार की दीवार फांदकर बंदी अंकित और डिंपी उर्फ शिवा फरार हो गए थे। जेलर विनय प्रताप सिंह ने इन बंदियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसके बाद, दो सिपाही नवीन कुमार, अतुल मिश्रा, शिवेंद्र यादव, डिप्टी जेलर बद्री प्रसाद और जेलर विनय प्रताप सिंह को निलंबित कर दिया गया है।
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