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Kanpur Violence, PFI is also involved in inciting violence, police investigation revealed, members have also been involved in CAA violence
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Kanpur Violence: हिंसा भड़काने में पीएफआई का भी हाथ, पुलिस की तफ्तीश में खुलासा, सीएए हिंसा में भी शामिल रहे हैं सदस्य
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: हिमांशु अवस्थी
Updated Wed, 08 Jun 2022 04:11 PM IST
सार
कानपुर हिंसा की साजिश में भी पीएफआई सदस्य शामिल थे, जिनकी हयात जफर हाशमी से लगातार बात हो रही थी। पुलिस द्वारा जेल भेजे गए पीएफआई सदस्य सीएए हिंसा के मामले में भी जेल गए थे। पुलिस की तफ्तीश में खुलासा हुआ है और हिंसा के दिन भी कई बार बातचीत की भी पुष्टि हुई है।
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पीएफआई
- फोटो : सोशल मीडिया
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कानपुर हिंसा और बवाल के मामले की साजिश में पीएफआई का भी हाथ था। इसका खुलासा मंगलवार को हो गया है। पुलिस ने जिन तीन पीएफआई सदस्यों को गिरफ्तार किया वह पहले भी सीएए हिंसा में जेल जा चुके हैं। बवाल मामले में जब तहकीकात शुरू हुई, तो मोबाइल नंबरों की सीडीआर व व्हाट्सएप चैट से इन तीनों के शामिल होने की पुष्टि हुई। उसी आधार पर इनको गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस ने बवाल के मामले में बजरिया निवासी मोहम्मद उमर, फीलखाना निवासी सैफुल्ला, कर्नलगंज के मोहम्मद नसीम अहमद को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस कमिश्नर विजय सिंह मीणा ने बताया कि यह तीनों हयात जफर हाशमी के संपर्क में थे। बाजार बंदी व बवाल को लेकर आपस में लगातार बातचीत कर रहे थे। जिससे इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाए गए हैं। एक तरह से साजिश में यह भी शामिल रहे हैं। यह पीएफआई के सदस्य हैं। दिसंबर 2020 में हुई सीएए के विरोध में हिंसा के मामले में भी यह जेल भेजे गए थे।
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कानपुर में पथराव और हिंसा के मुख्य आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
एक लापता, एक बीमार, कई और भी शामिल
पुलिस के मुताबिक जेल भेजे गए तीनों पीएफआई सदस्यों के अलावा दो और सदस्य हैं, जिसमें एक बीमार है और एक लापता है। यह दोनों भी सीएए हिंसा के मामले में जेल गए थे। फरार वाले की तलाश की जा रही है। सीपी ने बताया कि जानकारी के मुताबिक कई और पीएफआई के सदस्य शहर में हैं, जिनके संपर्क में हयात एंड कंपनी भी है। सभी के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। सुबूतों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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सीएए हिंसा
- फोटो : सोशल मीडिया
जेल से छूटे मगर हरकतें नहीं छोड़ी
सीएए हिंसा के मामले में पांचों पीएफआई सदस्य जेल गए थे। बाद में जमानत पर छूट गए थे। बवाल में नाम आने के बाद एक बात स्पष्ट हो गई कि आरोपी जेल से छूटे लेकिन हरकतें नहीं छोड़ीं। सूत्रों के मुताबिक पीएफआई के प्रमुख पदाधिकारियों के सीधे संपर्क में ये आरोपी। पुलिस अब इनकी पूरी कुंडली खंगालेगी। इनके खाते भी खंगाले जाएंगे।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
कानपुर हिंसा के पीछे पीएफआई का भी कनेक्शन
कानपुर में जुमे की नमाज के बाद हुई हिंसा को लेकर पुलिस कई एंगल से जांच कर रही थी। कानपुर हिंसा में पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) का भी नाम सामने आया था। साथ ही इसके तार पश्चिम बंगाल और मणिपुर से भी जोड़े जा रहे हैं। पीएफआई ने तीन जून को पश्चिम बंगाल और मणिपुर में बाजार बंद का आह्वान किया था और इसी दिन कानपुर में भी जुमे की नमाज के बाद दुकानों को बंद कराने को लेकर हिंसा भड़की थी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
क्या है पीएफआई
पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया यानी पीएफआई एक चरमपंथी इस्लामी संगठन है। यह अपने को पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के अधिकार में आवाज उठाने वाला संगठन बताता हैं। साल 2006 में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट (NDF) के मुख्य संगठन के रूप में पीएफआई का गठन किया गया था। इस संगठन की जड़े केरल के कालीकट में है और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
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