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जानें, उस ऐतिहासिक शहर के बारे में जिसने हाल ही में मनाया अपना 214 वां जन्मदिन
Sat, 25 Mar 2017 09:22 AM IST
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 25 Mar 2017 09:22 AM IST
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कानपुर का जन्मदिन
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1803 में 24 मार्च को ईस्ट इंडिया कंपनी ने ऐतिहासिक शहर कानपुर को जिला घोषित किया था। साल 1857 के गदर में कानपुर की धरती खून से लाल हुई थी। समय बीता और कानपुर एक औद्योगिक नगरी के तौर पर विकसित होने लगा। कई मिलें खुलीं इनमें लाल इमली, म्योर मिल, एल्गिन मिल, कानपुर कॉटन मिल और अथर्टन मिल काफ़ी प्रसिद्ध हुईं।
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कानपुर का जन्मदिन
यही असर था कि कानपुर को मिलों की नगरी के नाम से जाने जाना लगा। इतिहास की किताबों में ये कानपुर 'मैनचेस्टर ऑफ़ द ईस्ट' कहलाया जाने लगा। आज़ादी के बाद भी कानपुर ने तरक़्क़ी की. यहां आईआईटी खुला, ग्रीन पार्क इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम बना, ऑर्डनेंस फैक्ट्रियाँ स्थापित हुईं. इस सबके बाद कानपुर का परचम दुनिया में फहराने लगा।
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कानपुर का जन्मदिन
214 साल के लंबे सफर में कहीं कानपुर की गाड़ी शायद पटरी से उतर गई। सिविल लाइंस स्थित लाल इमली मिल की घड़ी जो लंदन के बिग बेन की तर्ज बनी है कभी कानपुर का चेहरा हुआ करती थी। आज घड़ी तो चल रही है पर मिल की मशीनें और लूम शांत पड़ चुकी हैं।
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कानपुर का जन्मदिन
माना जाता है कि इस शहर की स्थापना सचेन्दी राज्य के राजा हिन्दू सिंह ने की थी। कानपुर का मूल नाम 'कान्हपुर' था। नगर की उत्पत्ति का सचेंदी के राजा हिंदूसिंह से, अथवा महाभारत काल के वीर कर्ण से संबद्ध होना चाहे संदेहात्मक हो पर इतना प्रमाणित है कि अवध के नवाबों में शासनकाल के अंतिम चरण में यह नगर पुराना कानपुर, पटकापुर, कुरसवाँ, जुही तथा सीमामऊ गाँवों के मिलने से बना था।
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कानपुर का जन्मदिन
पड़ोस के प्रदेश के साथ इस नगर का शासन भी कन्नौज तथा कालपी के शासकों के हाथों में रहा और बाद में मुसलमान शासकों के। १७७३ से १८०१ तक अवध के नवाब अलमास अली का यहाँ सुयोग्य शासन रहा। 1773 की संधि के बाद यह नगर अंग्रेजों के शासन में आया, फलस्वरूप 1778 ईसवीं में यहाँ अंग्रेज छावनी बनी। गंगा के तट पर स्थित होने के कारण यहाँ यातायात तथा उद्योग धंधों की सुविधा थी।
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