साल 1966 के करीब की है, मैनपुरी में एक कुश्ती प्रतियोगिता के दौरान जसवंतनगर के विधायक और कुश्ती के माहिर खिलाड़ी रहे नत्थू सिंह (मेमर साहब) की नजर दंगल मैदान पर दांव-पेच दिखा रहे मुलायम सिंह पर पड़ी। मुलायम ने अपने चरखा दांव से भारीभरकम पहलवान को ऐसी पटखनी दी कि नत्थू सिंह उनके मुरीद हो गए। वह मुलायम से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें अपना शार्गिद बना लिया।
Mulayam Singh Yadav: नत्थू सिंह ने बनाया था राजनीतिक दांव-पेंच में माहिर, "चरखा दांव" से दी विरोधियों को पटखनी
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राजनीति में आने के बाद भी नेताजी का कुश्ती के प्रति लगाम कायम रहा। नत्थू सिंह ने उन्हें न सिर्फ कुश्ती के पेच बताए बल्कि राजनीति के दांव में भी भी माहिर बनाया। 1977 में प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार में सहकारिता मंत्री बने। राजनीति में आने से पूर्व मुलायम सिंह यादव आगरा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर (एमए) और बीटी करने के उपरांत जैन इंटर कॉलेज में शिक्षक नियुक्त हुए और सक्रिय राजनीति में आने के बाद नौकरी से त्यागपत्र दे दिया।
पिता चाहते थे पहलवान बनाना
मुलायम सिंह की बचपन से ही सुडौल कदकाठी थी। पिता सुघर सिंह उन्हें पहलवान बनाना चाहते थे। उन्होंने पिता की इच्छा पर पहलवानी की और कई दंगलों में बड़े-बड़े पहलवानों को पटखनी भी दी लेकिन चौधरी नत्थू सिंह के संपर्क में आने के बाद उन्होंने राजनीतिक के मैदान में विरोधियों को पटखनी देनी शुरू कर दी।
राजनीति सफर पर एक नजर
विधान परिषद सदस्य- 1982-1985
विधान सभा सदस्य- 1967, 1974, 1977, 1985, 1989, 1991, 1993 और 1996 (आठ बार)
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में विपक्ष के नेता- 1982-1985
उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता- 1985-1987
बतौर केंद्रीय कैबिनेट मंत्री....
सहकारिता और पशुपालन मंत्री: 1977
रक्षा मंत्री: 1996-1998
तीन बार बने मुख्यमंत्री
बतौर मुख्यमंत्री कार्यकाल मुलायम सिंह यादव तीन बार मुख्यमंत्री बने। पहला कार्यकाल दिसंबर 1989 से 24 जनवरी 1991 तक रहा। दूसरा कार्यकाल पांच दिसंबर 1993 से तीन जून 1996 तक रहा। तीसरा कार्यकाल 29 अगस्त 2003 से 11 मई 2007 तक रहा। उत्तर प्रदेश में यादव समाज के सबसे बड़े नेता के रूप में मुलायम सिंह की पहचान है।