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Mulayam Singh Yadav: नत्थू सिंह ने बनाया था राजनीतिक दांव-पेंच में माहिर, "चरखा दांव" से दी विरोधियों को पटखनी

Mon, 10 Oct 2022 05:56 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इटावा Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Mon, 10 Oct 2022 05:56 PM IST
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Mulayam Singh Yadav Death,  Nathu Singh had made a master in political maneuvering
: नत्थू सिंह और मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला

साल 1966 के करीब की है, मैनपुरी में एक कुश्ती प्रतियोगिता के दौरान जसवंतनगर के विधायक और कुश्ती के माहिर खिलाड़ी रहे नत्थू सिंह (मेमर साहब) की नजर दंगल मैदान पर दांव-पेच दिखा रहे मुलायम सिंह पर पड़ी। मुलायम ने अपने चरखा दांव से भारीभरकम पहलवान को ऐसी पटखनी दी कि नत्थू सिंह उनके मुरीद हो गए। वह मुलायम से इतने प्रभावित हुए कि उन्हें अपना शार्गिद बना लिया।



बस यहीं से एक साधारण शिक्षक की जिंदगी बदल गई।  नेताजी के करीबी और सैफई के प्रधान रामपाल वाल्मिकी बताते हैं कि  नत्थू सिंह के संपर्क में आने के समय मुलायम सिंह यादव मैनपुरी के करहल स्थित जैन इंटर कॉलेज में शिक्षक थे। नत्थू सिंह ने 1967 के विधानसभा चुनाव में जसवंतनगर की अपनी परंपरागत सीट मुलायम सिंह के लिए छोड़ दी। इस सीट से मुलायम सिंह पहली बार संयुक्त समाजवादी पारघटी से विधायक बने।

Mulayam Singh Yadav Death,  Nathu Singh had made a master in political maneuvering
मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला

राजनीति में आने के बाद भी नेताजी का कुश्ती के प्रति लगाम कायम रहा। नत्थू सिंह ने उन्हें न सिर्फ कुश्ती के पेच बताए बल्कि राजनीति के दांव में भी भी माहिर बनाया। 1977 में प्रदेश में जनता पार्टी की सरकार में सहकारिता मंत्री बने। राजनीति में आने से पूर्व मुलायम सिंह यादव आगरा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर (एमए) और बीटी करने के उपरांत जैन इंटर कॉलेज में शिक्षक नियुक्त हुए और सक्रिय राजनीति में आने के बाद नौकरी से त्यागपत्र दे दिया।

Mulayam Singh Yadav Death,  Nathu Singh had made a master in political maneuvering
मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव। - फोटो : ANI

पिता चाहते थे पहलवान बनाना
मुलायम सिंह की बचपन से ही सुडौल कदकाठी थी। पिता सुघर सिंह उन्हें पहलवान बनाना चाहते थे। उन्होंने पिता की इच्छा पर पहलवानी की और कई दंगलों में बड़े-बड़े पहलवानों को पटखनी भी दी लेकिन चौधरी नत्थू सिंह के संपर्क में आने के बाद उन्होंने राजनीतिक के मैदान में विरोधियों को पटखनी देनी शुरू कर दी।

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Mulayam Singh Yadav Death,  Nathu Singh had made a master in political maneuvering
चार मार्च को जौनपुर में मुलायम सिंह यादव ने की थी चुनावी जनसभा - फोटो : अमर उजाला

राजनीति सफर पर एक नजर
विधान परिषद सदस्य- 1982-1985
विधान सभा सदस्य- 1967, 1974, 1977, 1985, 1989, 1991, 1993 और 1996 (आठ बार)
उत्तर प्रदेश विधान परिषद में विपक्ष के नेता- 1982-1985
उत्तर प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता- 1985-1987

बतौर केंद्रीय कैबिनेट मंत्री....
सहकारिता और पशुपालन मंत्री: 1977
रक्षा मंत्री: 1996-1998

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Mulayam Singh Yadav Death,  Nathu Singh had made a master in political maneuvering
मुलायम सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला

तीन बार बने मुख्यमंत्री
बतौर मुख्यमंत्री कार्यकाल मुलायम सिंह यादव तीन बार मुख्यमंत्री बने। पहला कार्यकाल दिसंबर 1989 से 24 जनवरी 1991 तक रहा। दूसरा कार्यकाल पांच दिसंबर 1993 से तीन जून 1996 तक रहा। तीसरा कार्यकाल 29 अगस्त 2003 से 11 मई 2007 तक रहा। उत्तर प्रदेश में यादव समाज के सबसे बड़े नेता के रूप में मुलायम सिंह की पहचान है।

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