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पंचायत चुनाव: घर आ जा ‘परदेसी’, तेरा ‘प्रधान’ बुलाए रे, वोटरों को बुलाने के लिए सहूलियतों की लगी झड़ी

Sat, 10 Apr 2021 09:10 AM IST
शिखा पांडेय नीरज दीक्षित, अमर उजाला, जालौन
नीरज दीक्षित, अमर उजाला, जालौन Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 10 Apr 2021 09:10 AM IST
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Panchayat election special story, jalaun up
पंचायत चुनाव - फोटो : अमर उजाला
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में यदि कहीं पर सबसे अधिक जुनून या उत्साह दिखाई दे रहा है तो वह है प्रधानी का चुनाव। फिर चाहे न चाहते हुए भी किसी के पैर छूने पड़े या फिर मन ही मन नापसंद लोगों के दरवाजे पर हाथ जोड़कर खड़े होना पड़े। सब कुछ जायज है और वोट पाने के लिए किया भी जा रहा है। ऐसे ही हथकंडों में एक हथकंडा परदेसी वोटरों को गांव वापस बुलाने का भी अजमाया जा रहा है।
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पंचायत चुनाव - फोटो : अमर उजाला
जनपद में चुनाव भले ही तीसरे चरण यानि 26 अप्रैल को हो लेकिन प्रत्याशी है कि उन घरों में दो तीन चक्कर दिन में लगा ही लेते हैं, जिनके परिवार के ज्यादातर लोग यानि नेता जी के वोट परदेस में रहकर खा कमा रहे हैं। ऐसे लोगों को प्रधानी का दम भरने वाले दावेदारों के समर्थक पूरा भरोसा दिला रहे हैं कि बेटा, भाई और बहू को 26 अप्रैल से पहले बुलवा लो, वे आएंगे कैसे और जाएंगे कैसे, इसकी चिंता मत करो, बस बुलावे की तारीख बताओ, बाकी का काम नेता जी खुद संभाल लेंगे।

मतलब साफ है कि गांव में अपनी सरकार बनाने के लिए दावेदार परदेसी वोटरों के आने जाने का पूरा खर्च झेलने को तैयार हैं। कोई ट्रेन से तो कोई बस से और कोई कोई तो प्राइवेट वाहनों से भी परदेसी वोटरों को बुलाने के लिए उनके नाते रिश्तेदारों के घरवालों पर वादों की बौछार कर रहा है। प्रस्तुत ऐसे ही मामलों पर आधारित रिपोर्ट-

 
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सब्जी विक्रेता गजेंद्र - फोटो : अमर उजाला
चैन, सुकून से बैठना दूभर हो गया 
आटा गांव के सब्जी विक्रेता गजेंद्र का कहना है कि जबसे चुनाव क्या शुरू हुए हैं, शांति से बैठना मुश्किल हो गया है। कभी कोई नेता तो कभी उनके कोई चेला, कभी घर पर तो कभी दुकान पर आकर बस यही पूछता है कि कब बुला रहे हो घरवालों को, आ तो रहे हैं सब, कोई दिक्कत हो तो बताओ। गजेंद्र के मुताबिक उनके परिवार के चार लोग जिसमें पत्नी उर्मिला, भाई राजू और उसकी पत्नी आरती व बेटा देवेंद्र गुजरात में पानी पूरी का धंधा करते हैं। अब इतना दबाव पड़ रहा है तो बुलाना तो पड़ेगा ही।

 
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चाट विक्रेता रतनलाल - फोटो : अमर उजाला
पूरी जिम्मेदारी उठाने को तैयार नेता
आटा स्टैंड पर चाट का ठेला लगाने वाले रतनलाल ने बताया कि उसके चाचा देवेंद्र और चाची मुन्ना देवी के अलावा दो भाई कुलदीप और अजय भी जयपुर में रहकर मेहनत मजदूरी करते हैं। अब इन नेताओं को कौन समझाए कि चुनावी वादों से पेट तो भरता नहीं है। उसके लिए काम जरुरी है लेकिन नेता है कि सिर्फ उन्हें बुलाने के लिए पीछे पड़े हैं, कहते हैं तुम्हें कुछ करने की जरुरत भी नहीं है, बस बुलाने की तारीख बताओ। रिश्तेदारों के आने जाने की सारी जिम्मेदारी उठाने को तैयार हैं नेता। 

 
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जयराम पाल - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन में किसी ने नहीं पूछा
माधौगढ़ तहसील के गांव मचकछा निवासी किसान जयराम पाल ने बताया कि उनके तीन बेटे लाल सिंह, सुनील और गुड्डू के साथ बहू रेखा हरियाणा में रहकर पानी पूरी का धंधा करते हैं, अब नेता लोग आते हैं और उन्हें वोट से पहले घर बुलाने की बात कह रहे हैं। जब लॉकडाउन लगा था, तब किसी को फिक्र नहीं थी कि घरवाले कैसे लौटेंगे और अब हद दूसरे तीसरे दिन पूछने कोई न कोई चला ही आता है। इसी तरह धमना निवासी शिव प्रसाद के दो बेटे और बहू सुघर, सर्वेश और जूली व प्रीती अहमदाबाद में पानी पूरी का काम करते हैं। उन्हें भी वोट के लिए घर बुलाना पड़ सकता है।
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