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यूपी: जिनके बीच संघर्ष उनका मंदिर की जमीन से नहीं कोई वास्ता, डबल मर्डर में 11 पर रिपोर्ट
Mon, 16 Mar 2020 10:01 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 16 Mar 2020 10:01 AM IST
औरैया में खूनी संघर्ष, दो की मौत
- फोटो : अमर उजाला
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औरैया जिले में अधिवक्ता मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन को गोलियों से उड़ा देने के मामले में आठ नामजद और तीन अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। मंजुल चौबे के चचेरे भाई आशीष पुत्र अरविंद कुमार की ओर से कराई गई लिखापढ़त में आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 307, 302, 504, 506 के साथ-साथ सेवन क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट एक्ट की धाराओं का भी इस्तेमाल हुआ है।
औरैया में खूनी संघर्ष, दो की मौत
- फोटो : अमर उजाला
नामजदों में शामिल एमएलसी कमलेश पाठक, उनके भाई संतोष पाठक और रामू पाठक तथा भगवताचार्य (कथा वाचक) राजेश शुक्ला को मौके से गिरफ्त किया गया है। दो अन्य भी पुलिस की गिरफ्तार में हैं। हत्या में प्रयोग की गई संतोष पाठक की राइफल भी बरामद कर ली गई है।
औरैया में खूनी संघर्ष, दो की मौत
- फोटो : अमर उजाला
लिखापढ़त में कुलदीप अवस्थी, विपलव अवस्थी, छोटू ड्राइवर, कमलेश पाठक के गनर का नाम भी आया है। एसपी सुनीति ने बताया कि मृतक के परिवार की राय पर रात में ही पोस्टमार्टम कराने की तैयारी है। सोमवार को पुलिस वारदात के पीछे की समूची कहानी से परदा हटा देगी।
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औरैया में खूनी संघर्ष, दो की मौत
- फोटो : अमर उजाला
मंजुल के घर कोहराम
नरायनपुर निवासी शिव कुमार के दो पुत्र और एक पुत्री में मंजुल चौबे दूसरे नंबर पर थे। सबसे बड़े संजय और तीसरे नंबर पर पुत्री रश्मि हैं। मंजुल की पत्नी के अलावा महज तीन माह की पुत्री है। वारदात के बाद से घर के हर सदस्य का रो-रो कर बुरा हाल है।
नरायनपुर निवासी शिव कुमार के दो पुत्र और एक पुत्री में मंजुल चौबे दूसरे नंबर पर थे। सबसे बड़े संजय और तीसरे नंबर पर पुत्री रश्मि हैं। मंजुल की पत्नी के अलावा महज तीन माह की पुत्री है। वारदात के बाद से घर के हर सदस्य का रो-रो कर बुरा हाल है।
मृतक मंजुल चौबे
- फोटो : अमर उजाला
जिनके बीच संघर्ष उनका मंदिर की जमीन से नहीं कोई वास्ता
मंदिर की जिस जमीन को लेकर दो लोगों को जान गंवानी पड़ी उससे दोनों पक्षों में से किसी का सीधा संबंध नहीं है। नरायनपुर मोहल्ले के लोग बताते हैं कि हनुमान मंदिर वर्षों पुराना है। आसपास की कुछ जमीन भजौड़ी सिंह और मथुरा प्रसाद के नाम दर्ज है। भजौड़ी सिंह की कोई संतान नहीं है लेकिन पुत्रवधू है। जमीन बेशकीमती होने के कारण कई लोगों की निगाह है।
इस बाबत पूछने पर एसडीएम सदर विजेता ने बताया कि चूंकि मंदिर निजी जमीन पर है, लिहाजा उसकी संपत्ति के मालिक का कोई सरकारी रिकार्ड नहीं है। सुनने में आया है कि जमीन किसी त्रिपाठी नाम है। मंदिर का ट्रस्ट है या नहीं, इसकी भी जानकारी नहीं है।
मंदिर की जिस जमीन को लेकर दो लोगों को जान गंवानी पड़ी उससे दोनों पक्षों में से किसी का सीधा संबंध नहीं है। नरायनपुर मोहल्ले के लोग बताते हैं कि हनुमान मंदिर वर्षों पुराना है। आसपास की कुछ जमीन भजौड़ी सिंह और मथुरा प्रसाद के नाम दर्ज है। भजौड़ी सिंह की कोई संतान नहीं है लेकिन पुत्रवधू है। जमीन बेशकीमती होने के कारण कई लोगों की निगाह है।
इस बाबत पूछने पर एसडीएम सदर विजेता ने बताया कि चूंकि मंदिर निजी जमीन पर है, लिहाजा उसकी संपत्ति के मालिक का कोई सरकारी रिकार्ड नहीं है। सुनने में आया है कि जमीन किसी त्रिपाठी नाम है। मंदिर का ट्रस्ट है या नहीं, इसकी भी जानकारी नहीं है।