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इंदिरा गांधी पर साजिश के तहत गिराया गया था तंबू, जानें उस चुनावी सभा की बैठक का राज
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 01 Nov 2017 07:52 AM IST
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इंदिरा गांधी की अगुवानी करते बांदा के पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व विधायक रामेश्वर प्रसाद। (फाइल फोटो)
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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निधन के 32 वर्षों बाद भी बांदा के बाशिंदे और खासकर बुजुर्ग व कांग्रेसी नेता नहीं भूले। उनके बलिदान दिवस (31 अक्तूबर) पर लोगों के दिलों-दिमाग में इंदिरा गांधी की बांदा से जुड़ी यादें तरोताजा हो गईं। खासकर वह घटना लोग याद करके दोहराते हैं जब इंदिरा गांधी यहां जनसभा में भाषण कर रही थीं और तभी रस्सी काट कर उनके ऊपर तंबू गिरा दिया गया था। नाव में बैठ कर केन नदी पार की थी।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी
बांदाः देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपनी अमिट छाप छोड़ गईं इंदिरा गांधी 17 जनवरी 1957 को लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी राजा दिनेश सिंह के प्रचार में बांदा आईं थीं। शहर के रामलीला मैदान में उनके लिए मंच बनाकर तंबू लगाया गया था। इसी में उनकी जनसभा हो रही थी। इंदिरा गांधी भाषण दे ही रहीं थीं तभी किसी ने शरारत की और तंबू की रस्सी काट दी। तंबू मंच के ऊपर आ गिरा और इंदिरा गांधी उसमें गिर कर ढक गईं। जनसभा में हड़कंप मच गई। मंच और आसपास मौजूद कांग्रेस नेताओं ने आनन-फानन इंदिरा गांधी की तंबू से बाहर निकाला और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। चर्चा थी कि यह हरकत सोशलिस्ट पार्टी नेताओं की रही।
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी
इंदिरा गांधी कई बार बांदा आईं। बुजुर्ग कांग्रेसियों के मुताबिक लगभग 8 बार उनका आगमन हुआ। पहली बार 1952 में वह यहां कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन में अपने पिता पंडित नेहरू के साथ ट्रेन से आईं थीं। 1957 में वह कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष थीं और लोकसभा चुनाव में यहां कांग्रेस के समर्थन में जनसभा करने आईं थीं। 1971 में वह अधिवक्ता संघ के समारोह में शामिल होने आईं और 1977 में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रामेश्वर प्रसाद के चुनाव में जनसभा संबोधित करने आईं। 1978 में फतेहपुर-बांदा संसदीय सीट से चुनाव लड़ रहे कांग्रेस प्रेमदत्त तिवारी के प्रचार में इंदिरा गांधी जसपुरा से तिंदवारी तक रोड-शो किया। 1979 में लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रामनाथ दुबे के पक्ष में राइफल क्लब ग्राउंड में जनसभा संबोधित की। 1980 में विधान सभा चुनाव में बबेरू से कांग्रेस प्रत्याशी रामेश्वर प्रसाद के पक्ष में चुनावी जनसभा करने आईं थीं।
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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी
तीन कटोरी खीर और तीन रोटियां खाईं थीं चंदवारा में
बांदा। बुंदेलखंड के पिछड़े जिले बांदा में नदियों पर पुल की पहली सौगात इंदिरा गांधी ने ही दी। साथ ही उन्होंने उफनाई यमुना नदी को नाव से पार भी किया। बुजुर्ग बताते हैं कि प्रचार के दौरान इंदिरा गांधी कांग्रेस प्रत्याशी प्रेमदत्त तिवारी के चुनाव प्रचार में आईं थीं। तभी उन्हें पैलानी घाट पर केन नदी को नाव से पार करना पड़ा। नाव से उतर कर वह पैदल चलीं और नदी किनारे स्थित दियाबानी मजरा आईं। चंदवारा गांव में जनसभा की। सत्ता में आने के बाद उन्होंने केन और यमुना में पुल बनवाए। दोनों पुलों का उन्होंने ही शिलान्यास एक ही दिन में किया। पूर्व विधायक रामेश्वर प्रसाद बताते हैं कि चंदवारा इंटर कालेज में इंदिरा जी के भोजन की व्यवस्था की गई थी। यहां उन्हें खीर इतनी भाई की तीन कटोरी खीर और तीन रोटियां भी खाईं।
बांदा। बुंदेलखंड के पिछड़े जिले बांदा में नदियों पर पुल की पहली सौगात इंदिरा गांधी ने ही दी। साथ ही उन्होंने उफनाई यमुना नदी को नाव से पार भी किया। बुजुर्ग बताते हैं कि प्रचार के दौरान इंदिरा गांधी कांग्रेस प्रत्याशी प्रेमदत्त तिवारी के चुनाव प्रचार में आईं थीं। तभी उन्हें पैलानी घाट पर केन नदी को नाव से पार करना पड़ा। नाव से उतर कर वह पैदल चलीं और नदी किनारे स्थित दियाबानी मजरा आईं। चंदवारा गांव में जनसभा की। सत्ता में आने के बाद उन्होंने केन और यमुना में पुल बनवाए। दोनों पुलों का उन्होंने ही शिलान्यास एक ही दिन में किया। पूर्व विधायक रामेश्वर प्रसाद बताते हैं कि चंदवारा इंटर कालेज में इंदिरा जी के भोजन की व्यवस्था की गई थी। यहां उन्हें खीर इतनी भाई की तीन कटोरी खीर और तीन रोटियां भी खाईं।
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पूर्व सांसद रामनाथ दुबे
कुशाग्र बुद्धि की थीं इंदिरा गांधी
कांग्रेस के पूर्व सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता रामनाथ दुबे बताते हैं कि इंदिरा गांधी बेहद कुशाग्र बुद्धि की महिला थीं। वह हमेशा दिल और दिमाग का समांजस्य बैठा कर काम करतीं थीं। उनकी सोंच और निर्णय सबसे अलग होते थे। जहां जरूरत पड़ती वहां सख्त रुख अपनातीं और जहां समझतीं तो नर्म दिल भी नजर आतीं थीं। श्री दुबे बताते हैं कि लगभग हरेक जिले में पुराने और सक्रिय कांग्रेस कार्यकर्ता को वह नाम से पहचानती थीं।
कांग्रेस के पूर्व सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता रामनाथ दुबे बताते हैं कि इंदिरा गांधी बेहद कुशाग्र बुद्धि की महिला थीं। वह हमेशा दिल और दिमाग का समांजस्य बैठा कर काम करतीं थीं। उनकी सोंच और निर्णय सबसे अलग होते थे। जहां जरूरत पड़ती वहां सख्त रुख अपनातीं और जहां समझतीं तो नर्म दिल भी नजर आतीं थीं। श्री दुबे बताते हैं कि लगभग हरेक जिले में पुराने और सक्रिय कांग्रेस कार्यकर्ता को वह नाम से पहचानती थीं।