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Vikas dubey: संपत्ति पर संपत्ति बनाता गया, विकास के आर्थिक अपराध को रोकने और कालेधन को पकड़ने में नाकाम रही हर एजेंसी
Sun, 12 Jul 2020 07:54 AM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 12 Jul 2020 07:54 AM IST
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विकास दुबे फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की जिंदगी एक ऐसी किताब है, जिसका कोई भी पन्ना खोल दिया जाए, उसमें सरकार और सरकारी एजेंसियों की नाकामी की दास्तान छिपी मिलती है। 35 साल तक न सिर्फ उसने खूनखराबा और गुंडई की, बल्कि आर्थिक अपराध में भी वह किसी से पीछे नहीं रहा।
विकास दुबे फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
उसने आर्थिक अपराध से जुड़ी हर एजेंसी की आंख में धूल झोंकी है। वह अपने काले कारनामों से संपत्ति पर संपत्ति बनाता गया और जांच एजेंसियां ताकती रहीं। नोटबंदी के बाद हाईटेक हुए बैंक, आयकर विभाग, आर्थिक अपराध को पकड़ने में सबसे सक्षम एजेंसी फाइनेंसियल इंटेलिजेंस यूनिट (एफआईयू) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) इस शातिर के कालेधन को पकड़ने में नाकाम रहीं।
विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
कालाधन पकड़ने के लिए बैंक में हर अप्रत्याशित लेनदेन की जानकारी एफआईयू को स्वत: ही पहुंचती है। खुद बैंक भी सूचनाएं भेजते हैं। एफआईयू लेनदेन की समीक्षा करके जांच के लिए आयकर विभाग को भेजता है।
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विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
आयकर विभाग को भारी भरकम लेनदेन का कारण पता लगाना होता है। इसी तरह 30 लाख रुपये से अधिक की रजिस्ट्री की जानकारी सब रजिस्ट्रार ऑफिस सीधे आयकर विभाग को भेजते हैं। इसकी जांच भी आयकर विभाग करता है।
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विकास दुबे एवं पत्नी रिचा दुबे
- फोटो : amar ujala
हवाला या अन्य तरह की आर्थिक गतिविधियों की जानकारी पर ईडी को सूचित किया जाता है। इस तरह से आर्थिक अनियमितताओं को पकड़ने के लिए हर स्तर पर एजेंसियां काम कर रही हैं। विकास दुबे के आर्थिक अपराध पर अंकुश लगाने एक भी ऐसी जांच नहीं हुई। कारण किसी को नहीं पता।