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Vikas Dubey News: बैंक से सस्ती ब्याज दर पर उपलब्ध कराता था ऋण, कारोबारियों की सुरक्षा के एवज में विकास वसूलता था पैसा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sun, 12 Jul 2020 02:33 AM IST
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हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे फाइल फोटे
- फोटो : अमर उजाला
विकास दुबे कानपुर, कानपुर देहात, उन्नाव, फर्रुखाबाद समेत आसपास के तमाम जिलों में कारोबारियों का आर्थिक संकट भी दूर करता था। यानी किसी कारोबारी को कारोबार के लिए बड़ी रकम की जरूरत पड़ती थी तो वह बैंक का सहारा न लेकर विकास से बैंक से कम ब्याज दर पर ऋण लेता था।
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हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
इस मदद की एवज में विकास कानपुर और कानपुर देहात के तमाम कारोबारियों से अवैध वसूली भी करता था। चुनाव के समय यही कारोबारी उसके फाइनेंसर बनते थे। चर्चा तो ये भी है कि कानपुर और कानपुर देहात के तमाम कारोबारी जान और माल की सुरक्षा के लिए भी उसे भुगतान करते थे।
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विकास दुबे (काले कोट में)
- फोटो : amar ujala
इस कमाई को वह आगे फिर किसी काम में लगता था। धन के इस लेनदेन का नेटवर्क किसी कंपनी की तरह चल रहा था। पहले वसूली और उसका सही जगह निवेश। इसी वजह से विकास की पैठ न सिर्फ नेेताओं और अफसरों के बीच अच्छी थी, बल्कि शहर के कारोबार जगत में भी उसका अच्छा रुतबा था।
विकास दुबे फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
ब्याज का रुपये और सुरक्षा के नाम पर वसूली से ही विकास महीने में 20 से 25 लाख रुपये सिर्फ फैक्टरियों से कमाता था। विकास के एनकाउंटर और एसटीएफ जैसी एजेंसी की जांच के बाद ऐसे कारोबारियों के घिरने की भी आशंका जताई जा रही है। हालांकि विकास के खात्मे के बाद तमाम ऐसे कारोबारियों को राहत भी मिलेेगी जो सिर्फ उसके भय की वजह से अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा उसे देते थे।
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विकास दुबे फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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विकास के नाम कितनी संपत्तियां हैं, इसकी सही जानकारी के लिए जिला प्रशासन का रजिस्ट्री कार्यालय और केडीए दस्तावेज खंगाल रहा है। वहीं विकास को जानने वाले बताते हैं कि उसके पास डेढ़ से दो सौ बीघा जमीन है।
विकास के नाम कितनी संपत्तियां हैं, इसकी सही जानकारी के लिए जिला प्रशासन का रजिस्ट्री कार्यालय और केडीए दस्तावेज खंगाल रहा है। वहीं विकास को जानने वाले बताते हैं कि उसके पास डेढ़ से दो सौ बीघा जमीन है।
