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यूपी में उफान पर गंगा: खेत हुए जलमग्न, पानी में डूबी फसलें, कांवड़ियों की राह भी हुई मुश्किल; तस्वीरें
Sat, 01 Aug 2026 10:07 PM IST
Arun Parashar
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Published by: Arun Parashar
Updated Sat, 01 Aug 2026 10:07 PM IST
सार
यूपी में बढ़ते गंगा के जलस्तर ने तटीय इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। कासगंज में नदी के किनारे के खेत जलमग्न हो गए हैं। फसलें डूब गईं हैं। वहीं, कांवड़ लेकर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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कासगंज में उफान पर गंगा।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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कासगंज जिले में उफनती गंगा का पानी अब तटीय इलाकों के खेतों में भरने लगा है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई हैं। बिजनौर और नरौरा बैराजों से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण बांधों पर दबाव बढ़ गया है, वहीं गंगाघाटों पर बढ़ रहे जलस्तर से कांवड़ियों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं।
निरीक्षण करती सिंचाई विभाग की टीम।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सिंचाई विभाग के अनुसार, रात के समय 2.14 लाख क्यूसेक पानी का प्रवाह बना रहा, जिसके बाद बाढ़ नियंत्रण कक्ष को हाई अलर्ट जारी किया गया। हालांकि, 12 घंटे बाद शनिवार सुबह बिजनौर बैराज का प्रवाह घटकर 1.81 लाख क्यूसेक और नरौरा बैराज का प्रवाह 1.72 लाख क्यूसेक दर्ज किया गया। इसके बावजूद जिले की सीमा में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है।
जलमग्न हुए खेत।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
फसलें डूबीं, आवागमन प्रभावित
तटीय गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने से ग्रामीण सहम उठे हैं। नगला जयकिशन के निवासी उर्वेश ने बताया कि बाढ़ का पानी गांव की पुलिया तक पहुंच गया है। यदि जलस्तर और बढ़ा, तो मार्ग पूरी तरह बंद हो जाएगा और गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएगा। इसके अलावा खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूबने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। पटियाली के नगला हंसी और आसपास के इलाकों में भी बाढ़ की आहट से लोग परेशान हैं। लहरा और कछला गंगाघाटों पर जलस्तर बढ़ने के कारण दुकानदारों ने अपनी अस्थायी दुकानें पीछे हटानी शुरू कर दी हैं।
तटीय गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने से ग्रामीण सहम उठे हैं। नगला जयकिशन के निवासी उर्वेश ने बताया कि बाढ़ का पानी गांव की पुलिया तक पहुंच गया है। यदि जलस्तर और बढ़ा, तो मार्ग पूरी तरह बंद हो जाएगा और गांव बाढ़ की चपेट में आ जाएगा। इसके अलावा खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूबने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। पटियाली के नगला हंसी और आसपास के इलाकों में भी बाढ़ की आहट से लोग परेशान हैं। लहरा और कछला गंगाघाटों पर जलस्तर बढ़ने के कारण दुकानदारों ने अपनी अस्थायी दुकानें पीछे हटानी शुरू कर दी हैं।
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कांवड़ियों को भी हुई दिक्कत।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लहरा घाट पर कांवड़ियों की बढ़ी मुश्किलें
तीर्थनगरी सोरोंजी के लहरा गंगाघाट पर गंगा का जलस्तर बढ़ने से सावन माह में आने वाले कांवड़ियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लहरा की निचली बस्ती में बाढ़ का पानी पहुंचने से दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लहरा घाट पर एनडीआरएफ की टीम और गोताखोरों को तैनात किया गया है, जो लगातार श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोक रहे हैं और सतर्क कर रहे हैं। वहीं, जलभराव के चलते नगर पालिका द्वारा बनाए गए चेंजिंग रूम और अस्थायी प्रसाधन गृह भी पानी में डूब गए हैं।
तीर्थनगरी सोरोंजी के लहरा गंगाघाट पर गंगा का जलस्तर बढ़ने से सावन माह में आने वाले कांवड़ियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। लहरा की निचली बस्ती में बाढ़ का पानी पहुंचने से दुकानदारों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लहरा घाट पर एनडीआरएफ की टीम और गोताखोरों को तैनात किया गया है, जो लगातार श्रद्धालुओं को गहरे पानी में जाने से रोक रहे हैं और सतर्क कर रहे हैं। वहीं, जलभराव के चलते नगर पालिका द्वारा बनाए गए चेंजिंग रूम और अस्थायी प्रसाधन गृह भी पानी में डूब गए हैं।
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गंगा नदी का बढ़ा जलस्तर।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्रशासन और सिंचाई विभाग भी सतर्क
बाढ़ की स्थिति पर नजर रखते हुए सिंचाई विभाग के एसडीओ संदीप जैन ने पटियाली क्षेत्र के किसौल और मुजफ्फरनगर में चल रहे कटानरोधी कार्यों का निरीक्षण किया। यहां गंगा की धारा सीधे कटानरोधी कार्यों से सटकर बह रही है। प्रशासन ने स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखी है ताकि तटबंधों को सुरक्षित रखा जा सके और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
बाढ़ की स्थिति पर नजर रखते हुए सिंचाई विभाग के एसडीओ संदीप जैन ने पटियाली क्षेत्र के किसौल और मुजफ्फरनगर में चल रहे कटानरोधी कार्यों का निरीक्षण किया। यहां गंगा की धारा सीधे कटानरोधी कार्यों से सटकर बह रही है। प्रशासन ने स्थिति पर कड़ी नजर बनाए रखी है ताकि तटबंधों को सुरक्षित रखा जा सके और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।