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लखीमपुर बवाल: 'विवादित स्थल पर लगाई गई थी मूर्ति', शरारती तत्वों ने बिगाड़ा माहौल, ग्रामीणों ने कही ये बात

अमर उजाला नेटवर्क, लखीमपुर खीरी Published by: Sharukh Khan Updated Wed, 15 Apr 2026 03:19 PM IST
सार

लखीमपुर बवाल के बाद स्थानीय लोगों ने कहा कि प्रतिमा को हटाने के बजाय बीच का रास्ता निकालना चाहिए था। लेकिन महिलाओं पर लाठीचार्ज सूचना से हालात और बिगड़ गए। इस दौरान सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए।

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Lakhimpur Violence Dispute Over Statue Installation Villagers Blame Miscommunication Police Action
भीड़ ने गाड़ी में लगाई आग - फोटो : संवाद
लखीमपुर खीरी में आंबेडकर जयंती पर मोतीपुर में हुई घटना के बाद स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पुलिस ने प्रतिमा को हटाने के बजाय संवाद का रास्ता अपना होता तो बीच का रास्ता निकल सकता था। इसके बाद महिलाओं पर लाठीचार्ज सूचना से हालात और बिगड़ गए। 


इस दौरान सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए।स्थानीय लोगों ने बताया कि मूर्ति हटाने से पहले ग्राम प्रधान और क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों को विश्वास में नहीं लिया गया। जब प्रतिमा स्थापित हो चुकी थी, तो उसे हटाने के बजाय सुरक्षा घेरे में लेकर बातचीत का रास्ता अपनाया जाना चाहिए था। 
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Lakhimpur Violence Dispute Over Statue Installation Villagers Blame Miscommunication Police Action
सरकारी गाड़ी में लगाई आग - फोटो : संवाद
ग्रामीणों का आरोप है कि मोतीपुर गांव में बौद्ध विहार की भूमि पर मूर्ति स्थापना को लेकर पहले से तनाव था। पुलिस ने बिना महिला पुलिस बल की मौजूदगी या उचित संवाद के मूर्ति हटवाने का प्रयास किया, जिससे हालात बिगड़े। जयंती जैसे संवेदनशील मौके पर बिना पूर्व चेतावनी या शांति समिति की बैठक के सीधी कार्रवाई को तनाव का मुख्य कारण बताया गया है।
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कार में की तोड़फोड़ - फोटो : संवाद
स्थानीय खुफिया इकाई भी इस स्थिति को भांपने में विफल रही। उपद्रवियों ने क्षेत्राधिकारी गोला और तहसीलदार के वाहनों में तोड़फोड़ कर उन्हें पलट दिया। दो सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया, जिससे बांकेगंज-गोला मार्ग घंटों बाधित रहा। बचाव में आई पुलिस पर भी जमकर पत्थरबाजी हुई, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए।
Lakhimpur Violence Dispute Over Statue Installation Villagers Blame Miscommunication Police Action
बवालियों ने सड़क पर पलटी कार - फोटो : संवाद
बिना महिला कर्मियों के पहुंची थी पुलिस
आंबेडकर जयंती जैसे संवेदनशील अवसर पर पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि महिलाओं पर लाठीचार्ज किया गया, जबकि कानूनन महिला प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पर्याप्त महिला पुलिस बल अनिवार्य है।
 
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गाड़ियों में तोड़फोड़ करते बवाली - फोटो : संवाद
विवादित स्थल पर लगाई गई थी मूर्ति
गोला तहसील प्रशासन के मुताबिक, मोतीपुर गांव में जिस जगह मूर्ति लगाई थी, वह राजस्व अभिलेखों में खाद के गड्ढों के रूप में दर्ज है। संबंधित स्थल पर ग्रामीणों ने प्रशासन की बिना अनुमति के मूर्ति लगाई थी। इससे सटी भूमि पर आबादी है। इस भूमि का विवाद 40 वर्ष पुराना बताया जा रहा है। तहसीलदार भीमचंद ने बताया कि गोला बांकेगंज मुख्य मार्ग के किनारे ग्रंट नंबर 10 में गाटा संख्या 1167 रकबा 0.061 हेक्टेयर खाद गड्ढे की सरकार जमीन है। जिस पर पुलिस द्वारा कब्जे की शिकायत चार-पांच दिन पहले की गई थी, जिसकी पैमाइश कराकर निशान देही भी कर दी गई थी। आज शाम 3:00 से 4:00 के करीब कुछ लोगों ने बाबा साहब की छोटी सी मूर्ति रख दी थी। जिसे हटाने के लेकर लोगों में असंतोष था। मैं अभी मौके पर ही हूं।
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