तेजी से बढ़ रहे कोरोना संक्रमण के बीच सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीजों को बेड और इलाज नहीं मिलने से प्रतिदिन लोगों की जान जा रही हैं। ऐसा नहीं है कि प्रशासन के पास सुविधाएं नहीं हैं। बस देखने का फर्क है। अस्पतालों में बढ़ती अव्यवस्थाओं और बेड की कमी के मद्देनजर ‘अमर उजाला’ ने शहर में ऐसे स्थान तलाशे, जहां प्रशासन मरीजों का इलाज करा सकता है।
अमर उजाला की पड़ताल: मरीज लाचार, चार आश्रय गृहों में 360 बेड पड़े बेकार, सबूत हैं ये तस्वीरें
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राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन के तहत मेरठ शहर के चार स्थानों पर बने बहुमंजिले आश्रय गृह मरीजों का सहारा बन सकते हैं। इन आश्रय गृहों में 360 बेड और अन्य सुविधाएं बड़े होटल जैसी हैं। एक जगह हॉल और खुली जगह भी है तो दूसरे आश्रय गृह में जरूरत पड़ने पर बेड की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है। आश्रय गृहों के संचालन और रखरखाव पर प्रतिवर्ष 30 लाख से अधिक खर्च हो रहे हैं।
ये हैं चार आश्रय गृह
- गढ़ रोड स्थित नोबेल पब्लिक स्कूल के निकट : 100 बेड
- दिल्ली रोड स्थित मुकुट महल के पीछे : 100 बेड
- परतापुर रेलवे स्टेशन के पीछे : 80 बेड
- रोहटा रोड स्थित कृष्णा नगर कॉलोनी : 80 बेड
प्रशासन बताए, बाकी काम हम करेंगे
नए कोविड सेंटर का चयन जिला प्रशासन करता है। स्वास्थ्य विभाग यहां मरीजों को चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराता है। आश्रय गृहों में बेड आदि की सुविधा बताई जा रही है। प्रशासन के निर्णय लेगा तो इस पर काम किया जाएगा। - डॉ. अखिलेश मोहन, सीएमओ
सरकार को पूरी जानकारी दी जाएगी
आश्रय गृह के साथ-साथ अन्य भी कई ऐसे स्थान हैं, जो सरकारी संपत्ति हैं और इनका उपयोग मरीजों के उपचार के लिए हो सकता है। डीएम और सीएमओ ने यहां स्टाफ की समस्या बताई है। इस बारे में सरकार को अवगत कराया जाएगा। - सत्यप्रकाश अग्रवाल, विधायक कैंट