यूपी बोर्ड परीक्षा को नकलविहीन और सकुशल संपन्न कराने के लिए पूरा तंत्र लगा हुआ है। सीसी टीवी कैमरे, कंट्रोल रूम से लाइव निगरानी, परीक्षार्थियों के प्रवेश पत्र पर क्यूआर कोड और यहां तक की एसटीएफ भी नजर गड़ाए हुए है।
सुरक्षा के दावे हजार, परीक्षार्थियों की मेहनत से भरी उत्तर पुस्तिकाएं रिक्शा और साइकिल पर ‘सवार’
यूपी बोर्ड परीक्षा 18 फरवरी से शुरू हो चुकी है। शासन बोर्ड परीक्षा में नकल रोकने को लेकर पूरी तरह से सख्त है। नकल रोकने के लिए हर केन्द्र पर मजिस्ट्रेट तैनात किए गए है।
इनके अलावा सुरक्षा के कई अन्य उपाय भी अपनाए गए है। मगर, उत्तर पुस्तिकाओं को संकलन केंद्र तक पहुंचाने के लिए किसी सुरक्षा नियम का पालन नहीं हो रहा है।
अमर उजाला ने इसकी पड़ताल की तो जनता वैदिक इंटर कॉलेज में बनाए गए उप संकलन केन्द्रों पर सुरक्षा नियम ताक पर दिखे। बस, रिक्शा, साइकिल, स्कूटी व बाइक पर कुछ कर्मी उत्तर पुस्तिकाएं लाते नजर आए।
उनके साथ न कोई सुरक्षा व्यवस्था थी और न ही कोई जिम्मेदार। ऐेसे में अगर कोई उत्तर पुस्तिकाओं को लूट ले या बाइक व रिक्शा आदि से कहीं गिर जाए तो परीक्षार्थियों के भविष्य पर सवाल खड़ा हो जाएगा।
बस में छूट गई थींं कॉपियां
वर्ष 2012 में क्षेत्र के एक परीक्षा केंद्र की उत्तर पुस्तिकाओं को लेकर एक कर्मी संकलन केंद्र जाने के लिए बस में सवार हुआ। गंतव्य स्थल पर कर्मी तो उतर गया, लेकिन कॉपियां बस मेें ही छूट गई थी।
विभागीय अफसरों ने किसी तरह मामला दबा लिया था। जिला बनने से पहले जब संकलन केन्द्र मेरठ में कॉपियां जमा कराई जाती थी। उस दौरान भी ऐसी ही एक घटना हुई थी, उसमें कई कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई थी।
बोर्ड परीक्षा खत्म होने के बाद ये बनाए गए है मानक
बोर्ड परीक्षा में प्रतिदिन पेपर समाप्त होने के एक घंटे बाद ही कापियों को संकलन केंद्र पर पहुंचाना होता है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। परीक्षा छूटने के करीबन डेढ़ से दो घंटे बाद तक कॉपियां संकलन केन्द्र पर पहुंच रही है।