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बेगम समरू: फरजाना, जेबुन्निशां या जोहाना., कई शख्सियत वाली शेरदिल महिला की दिलेरी के दिलचस्प किस्से

Mon, 20 Jan 2020 05:20 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 20 Jan 2020 05:20 PM IST
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Begum Samru: The Queen of Sardhana Saltnat,a tawaif of Delhi who lived several personality
बेगम समरू - फोटो : अमर उजाला

अंदाज-ए-बरबाद है इश्क, देखो तो राजा को रंक बना दे इश्क,


मगर तवायफ से महारानी बनीं समरू, हुस्न-ओ-हौसला हो तो क्या न करा दे इश्क।


मोहब्बत और हिम्मत की इस कहानी का ऐसा ही बेजोड़ किरदार हैं बेगम समरू, फरजाना, जेबुन्निशां या फिर जोहान नोबोलिश सोम्ब्रे। कई शख्सियतों वाली एक ऐसी महिला जो दिल्ली के चावड़ी बाजार स्थित एक कोठे से निकलकर दौलत शोहरत और ताकत की उन बुलंदियों तक पहुंची जिन्होंने उन्हें हिंदुस्तानी इतिहास का एक दिलचस्प पन्ना बना दिया। बेगम समरु को आखिर कैसे मिले अलग अलग नाम, आज हम आपको इसके पीछे की कहानी से रुबरू कराते हैं:-

Begum Samru: The Queen of Sardhana Saltnat,a tawaif of Delhi who lived several personality
begum samru - फोटो : begum samru

बेगम समरू के प्रेम, हिम्मत, शोहरत और समर्पण की ये कहानी मेरठ से सरधना कस्बे की सांसों में बसी है। उनकी दिलेरी की किस्से आज भी इतिहास में जिंदा है।

अपने तकरीबन पचास दशक के जीवन में आखिर कैसे एक महिला ने अलग-अलग शख्सियत और किरदारों को जीया, इसके पीछे की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है। 


 
Begum Samru: The Queen of Sardhana Saltnat,a tawaif of Delhi who lived several personality
वॉल्टर रेनहार्ड सोम्ब्रे - फोटो : अमर उजाला

दिल्ली के चावड़ी बाजार आए भाड़े के सैनिक वॉल्टर रेनहार्ड सोम्ब्रे को एक कोठे पर तवायफ फराजाना से मोहब्बत हुई और उसे हमेशा के लिए अपना लिया। सोम्ब्रे के प्रेम में फरजाना ने भी चांदनी चौक की रौनक को हमेशा के लिए छोड़कर एक अनजार सफर का दामन थाम लिया।
 

लखनऊ, रुहेलखंड, आगरा, भरतपुर में हुए विभिन्न युद्धों में दोनों ने एक-दूसरे का साथ निभाया। इसी दौरान सोम्ब्रे ने प्रेमिका फरजाना से शादी कर ली तो लोग उन्हें सोम्ब्रे के अपभ्रंश के रूप में बेगम समरू बुलाने लगे।

यह भी पढ़ें: बेगम समरू: दिल्ली के चांदनी चौक की वो तवायफ, जो सिपाही के प्यार में बन गई सरधना सल्तनत की मलिका

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Begum Samru: The Queen of Sardhana Saltnat,a tawaif of Delhi who lived several personality
बेगम समरू व वॉल्टर रेनहार्ड सोम्ब्रे - फोटो : अमर उजाला

बादशाह शाह आलम द्वितीय के कहने पर सोम्ब्रे ने सहारनपुर के रोहिल्ला लड़ाके जाबिता खान को करारी शिकस्त दी। इससे खुश होकर शाह आलम ने सरधना की जागीर सोम्ब्रे के हाथों में सौंप दी। जिसके बाद सोम्ब्रे बेगम समरू के साथ सरधना में ही बस गए।

यहां भी अपनी कूटनीतिक सोच और युद्ध की समझ में निपुणता के कारण वह सोम्ब्रे को युद्ध संबंधी निर्णय लेने में मदद करतीं। लड़ाई के मैदान से कूटनीति के अखाड़े तक बेगम समरू की तूती बोलने लगी थी।

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Begum Samru: The Queen of Sardhana Saltnat,a tawaif of Delhi who lived several personality
बेगम समरू - फोटो : अमर उजाला

बेगम समरू के चार्तुय का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि शाह आलम द्वितीय की मदद कर उसका दिल जीत लिया था। दरअसल, 1783 में बघेल सिंह के नेतृत्व में तीस हजार सिखों ने दिल्ली पर हमला बोल दिया था। 

तब बेगम समरू ने बातचीत कर सिखों और शाह आलम के बीच सुलह कराई जिसके बाद कीमती तोहफे देकर सिखों को वापस पंजाब लौटा दिया। इससे प्रसन्न होकर शाह आलम ने बेगम समरू को अपनी मुहंबोली बेटी का दर्जा दिया। 

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