बुलंदशहर बवाल में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की हत्या के मामले में आरोपी फौजी जीतू के बाद एसटीएफ के टारगेट पर अब जीतू के साथी हैं। आईजी मेरठ रेंज के नेतृत्व में बनी एसआईटी और इंटेलीजेंस की जांच रिपोर्ट में पुलिस की परत दर परत खुलने लगी है। वहीं सामने आ रहा है कि बुलंदशहर बवाल पुलिस की लापरवाही का नतीजा है। बुलंदशहर के एसएसपी, एसपी देहात, सीओ और एसपी सिटी पर शासन की गाज गिरी है। गोकशी को लेकर बुलंदशहर में बवाल हुआ। जिसमें इंस्पेक्टर सुबोध कुमार और छात्र सुमित की मौत हुई।
क्या है बुलंदशहर बवाल की असली सच्चाई ? अब सामने आ रही ये नई बात
इस मामले में भीड़ कैसे उत्तेजित हुई और पुलिस की लापरवाही क्या रही और बवाल कराने वाले कौन-कौन थे, इसकी पड़ताल आईजी मेरठ रेंज रामकुमार वर्मा के नेतृत्व में छह सदस्यीय विशेष टीम कर रही है। एडीजी इंटेलीजेंस भी रिपोर्ट पहले से दे चुके हैं।
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि इंस्पेक्टर स्याना सुबोध कुमार को अकेले छोड़कर साथी पुलिसकर्मी भागे थे। सूचना के तीन घंटे बाद पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। भीड़ पुलिस पर हमला करती रही। लेकिन अधिकारियों ने फोर्स नहीं भेजा। इसी रिपोर्ट के आधार पर पहले एसपी देहात बुलंदशहर, फिर एसएसपी और सीओ स्याना के बाद अब एसपी सिटी प्रवीन रंजन पर गाज गिरी है। मामले में और अधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।
बेगुनाहों को फंसा रही पुलिस
मंगलवार को राष्ट्रीय जाट महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित जाखड़ ने बुलंदशहर कांड में पुलिस पर बेगुनाहों को फंसाने का आरोप लगाया। मृतक सुमित की तेरहवीं में चिंगरावठी पहुंचे रोहित जाखड़ ने कहा कि पुलिस मुख्य आरोपियों को नहीं पकड़ रही है।
पुलिस फौजी को तो सैकड़ों किलोमीटर दूर से ले आई, लेकिन असली आरोपी को नहीं पकड़ सकी है। अगर पुलिस ने किसानों के निर्दोष बेटों को फंसाना बंद नहीं किया तो महासंघ आंदोलन करने पर मजबूर होगा।
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