उत्तर प्रदेश के मेरठ में फर्जी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट की फैक्टरी को लेकर आरोपियों ने बड़ा खुलासा किया है। आरोपियों ने पुलिस को बताया कि 10 से अधिक दुकानों पर फर्जी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट पहुंचाई गई हैं।
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फर्जी नंबर प्लेट बनाने की मशीन
- फोटो : अमर उजाला
मेरठ के अलावा मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद में भी फर्जी प्लेटों को पहुंचाने की जानकारी मिली है। सिविल लाइन पुलिस ने रविवार को मोहनपुरी और सूरजकुंड के पास दो दुकानों पर जांच की। लेकिन ये दोनों ही दुकानें बंद मिलीं। इससे पुलिस का शक और बढ़ गया है। इस मामले के उजागर होने के बाद एसपी सिटी ने थाना प्रभारियों को अभियान चलाकर फर्जी नंबर प्लेट बनाने वालों को चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं।
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आरोपी गिरफ्तार
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शुक्रवार देर रात मोहनपुरी में फर्जी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट बनाने वाली फैक्टरी पकड़ी गई थी। तीन आरोपी तनुज निवासी सम्राट कॉलोनी, श्रीराज निवासी मोहनपुरी और संदीप निवासी थापरनागर गिरफ्तार किए गए थे। तीनों से पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि फर्जी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट की ऑनलाइन डीलिंग होती थी। इन आरोपियों से 415 फर्जी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट बरामद हुई थी। पुलिस का दावा कि आरोपियों ने पूछताछ के दौरान बताया कि हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट बनाने का धंधा वह तीन माह से कर रहे थे।
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आरोपी गिरफ्तार
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पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से पूछताछ में कुछ दुकानों के नाम व पते सामने आए हैं। इन दुकानों की जांच चल रही है। रविवार को दो दुकानों पर छापा मारा गया लेकिन दुकानें बंद मिली। पूछताछ में यह भी सामने आया था कि मेरठ के अलावा मुजफ्फरनगर और गाजियाबाद में भी कुछ नंबर प्लेटें इस गिरोह ने वहां पहुंचाई हैं। आसपास के जिलों के लोग भी इसमें जुड़े हैं। वहीं एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह ने थानेदारों को निर्देश दिए हैं कि फर्जी हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट बनाने और बेचने वालों को चिह्नित कर कार्रवाई की जाए।
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फर्जी नंबर प्लेट बरामद
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दिल्ली से लाई गईं प्लेन नंबर प्लेट
सिविल लाइन पुलिस का कहना है कि दिल्ली के करोल बाग से यह गिरोह प्लेन नंबर प्लेट लेकर आता था। इसमें अलग-अलग लोगों को जिम्मेदारी दी गई थी। नंबर प्लॉटों पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट की तरह ही नंबर डालकर बेचते थे। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के लिए क्यूआर कोड इनके पास नहीं था। इंस्पेक्टर का कहना है कि यह नंबर प्लेट नकली हैं। जांच में इसका पता चला है।