निर्भया के दोषियों को फांसी देने के लिए पवन जल्लाद मेरठ से तिहाड़ जेल पहुंचा गया है। तिहाड़ में उसके रहने की व्यवस्था की गई है। पवन जल्लाद का कहना है कि निर्भया के दोषियों को फांसी होने से देश के 130 करोड़ लोगों को खुशी मिलेगी। वहीं दिल्ली जाने से पहले पवन जल्लाद ने कहा कि दोषियों के लिए जो फंदा होगा उसकी जांच परख करूंगा और तख्ता तैयार करूंगा। कैदी के वजन के हिसाब से ही तख्ता और फंदा तैयार किया जाता है। अगली स्लाइडों में जानिए पूरा अपडेट-
निर्भया केस: पवन जल्लाद बोला- दरिंदों को फांसी मिलने से 130 करोड़ देशवासियों को मिलेगी खुशी
जेल सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार को जल्लाद की उपस्थिति में फांसी का अभ्यास किया जाएगा। इस दौरान सभी संबंधित कर्मचारी और अधिकारी मौजूद रहेंगे जिनका जेल मेन्युअल के अनुसार मौजूद रहना जरूरी है। जेल प्रशासन बक्सर से मंगाई गई रस्सी शुक्रवार को अभ्यास के दौरान जल्लाद को सौंपेगा जिससे वह फंदा तैयार करेगा। इसके पहले वह दोषियों की रिपोर्ट देखेगा और फंदे की लंबाई तय करेगा। दोषियों के वजन के अनुसार ही पुतले का वजन तय करेगा। अभ्यास के दौरान फांसी घर में वैसी ही खामोशी रहेगी, जैसी फांसी देने के समय होती है। सारी बातें इशारों में की जाती हैं।
वहीं जेल सूत्रों के अनुसार फांसी की पूरी प्रक्रिया में तीन घंटे का समय लगता है। फांसी के दिन दोषियों को सुबह पांच बजे उठा दिया जाता है।
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होगी पवन जल्लाद की परीक्षा
निर्भया के दरिंदों को फांसी देने में पवन जल्लाद की परीक्षा है। फांसी देते समय झटके से स्पाइनल कॉर्ड (रीढ़ की हड्डी) टूटने से दोषी की मृत्यु तत्क्षण हो जाती है। इस तरीके से फांसी देने में सबसे कम तकलीफ होती है। मानवाधिकारों को देखते हुए फांसी में इस नियम का पालन करना जरूरी है। इसको देखते हुए पवन को तिहाड़ जेल में फांसी देने का तरीका सिखाया जाएगा। फांसी सही से दी या नहीं पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हो जाएगी।
निर्भया के चारों दरिंदों को तिहाड़ जेल में फांसी पर लटकाया जाएगा। जेल में फांसी देने की तैयारियां चल रही हैं। फांसी की प्रक्रिया को लेकर अलग-अलग भ्रांतियां हैं। यूपी के पूर्व डीजीपी सुलखान सिंह ने फांसी देने की प्रक्रिया को लेकर सोशल मीडिया पर जानकारी साझा की थी। कानूनी प्रावधान के अनुरूप फांसी देने की प्रक्रिया से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें हैं। पूर्व डीजीपी के मुताबिक मृत्यु दंड क्रियान्वित करने के तरीकों पर सुप्रीम कोर्ट विचार कर चुका है। यह पाया है कि स्पाइनल कॉर्ड टूटने से दोषी की मौत तत्क्षण हो जाती है। यह सबसे कम तकलीफ और कम क्र्रूरता वाला तरीका है। गोवा में सत्तर के दशक में एक बार इस पर जांच एवं अध्ययन किया गया था।
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