20 दिसंबर को देशभर में हिंसा कराने के लिए चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने पुराने जख्मों को ढूंढकर कुरेदने का काम किया था। किस- किस परिवार को कब और क्यों परेशानी हुई, इसकी जानकारी जुटाई गई। उसके बाद संपर्क कर उन्हें उकसाया गया। परिवार की आर्थिक मदद के बहाने उन्हें हिंसा के लिए तैयार किया गया। इसके लिए करोड़ों रुपये की फंडिंग की गई। लिसाड़ी गेट, नौचंदी और ब्रह्मपुरी में 18 लोगों को चिह्नित कर तय किया कि ये पथराव और गोलीबारी कर हिंसा फैलाएंगे।
पीएफआई ने पुराने जख्म कुरेद रची थी खतरनाक साजिश, हिंसा के लिए तैयार किए थे ये 18 लोग
पुलिस के अनुसार, मेरठ समेत कई शहरों में एक साथ हिंसा कराने के पीएफआई के नापाक मंसूबे थे। तीन तलाक के मुद्दे पर फैसले के बाद पीएफआई सक्रिय होना शुरू हुआ था। सरकार के हर फैसले पर इस संगठन की नजर थी। उस समय भी तीन तलाक को लेकर लोगों को उकसाया गया था। उसके बाद नौ सितंबर 2019 को अयोध्या प्रकरण पर फैसला आया, तो उस समय भी हिंसा कराने का प्रयास हुआ।
पीएफआई भी समझ गया कि पुलिस-प्रशासन का डर लोगों में है। उसके बाद पीएफआई ने हिंसा की चिंगारी भड़काने के लिए लोगों के पुराने जख्मों को ढूंढना शुरू किया। जो लोग दंगे या फिर किसी हादसे के शिकार हुए, उनके परिवार के लोगों से संपर्क साधना शुरू किया गया। उनकी भावनाओं को भड़काया गया। मदद के नाम पर उनके खातों में फर्जी संगठनों की तरफ से रकम डलवाई गई।
नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में ऐसे लोगों को तैयार कर पीएफआई के पदाधिकारियों ने उकसाना शुरू किया गया। कहा गया कि हक की लड़ाई लड़नी है। शहर में पर्चे बंटवाए गए। घनी आबादी वाले मोहल्लों में गुपचुप मीटिंग की गई। खूब पैसा भी खर्च किया। 20 दिसंबर 2019 को जुमे की नमाज के बाद एक साथ हिंसा करने की पटकथा तैयार की गई। हर क्षेत्र में टारगेट दिया गया कि पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों पर तब तक गोलीबारी और पथराव करना है, जब तक वे पीछे नहीं हटते। इस प्लानिंग में लिसाड़ीगेट का अनीस उर्फ खलीफा भी शामिल था। खलीफा का भाई रईस 1987 के दंगे में मारा गया था। बदला लेने के लिये उसको भड़काया गया। खलीफा ने गैंग बनाकर पुलिस पर सीधे गोलियां चलाई। जिसमें छह लोगों की जान गई।
नहीं समझे लोग, बढ़ती गई भीड़
पीएफआई ने मेरठ में मुस्लिम बहुल इलाके में 18 लोगों को इस कदर उकसाया हुआ था, जोकि भीड़ को पीछे नहीं हटने दे रहे थे। सरकार के फैसले और पुलिस की कार्रवाई का डर उनके जेहन से निकाला गया था। इन 18 लोगों ने आम लोगों को भड़काया कि तुम अपने हक के लिये लड़ रहे हो, यह कोई गलत काम नहीं है। लोग समझ नहीं पाए और उनकी भीड़ बढ़ती चली गई थी। पुलिस ने पीएफआई से जुड़े मुईद, नूरहसन, जावेद और अमजद को जेल भेजा। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में उन्होंने भी इसकी पुष्टि की।