मेरठ निवासी अवनी चार परिवारों की लाड़ली थी और वह इंजीनियर बनना चाहती थी। इंटर की पढ़ाई के साथ-साथ वह जेईई मेंस की तैयारी कर रही थी। प्री-बोर्ड की परीक्षा में कम नंबर पर आने पर वह अवसाद में चली गई। यह बात उसके माता-पिता को मालूम थी। माता-पिता बेटी को बार-बार समझाते थे। उसे हिल स्टेशन पर घुमाकर भी लाए और उसे उपहार भी दिए, बावजूद इसके उसकी जिंदगी नहीं बचा पाए।
छात्रा की खुदकुशी का मामला: काफी समझाया, बाहर घुमाया...बिटिया को न बचा सका परिवार
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परिवार के लोगों ने बताया कि जन्मदिन पर भी सबसे ज्यादा उपहार अवनी को ही मिलते थे। उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि बेटी ऐसा कदम उठा लेगी। घटना का पता चलने पर तीनों भाइयों ने रोहित को फोन किया। उनके शास्त्रीनगर पहुंचने से पहले ही रोहित बेटी का शव लेकर खरखौदा पहुंच गए। यहां शव पहुंचते ही परिजन बिलखने लगे और लोगाें की भीड़ जुट गई।
पुलिस के अधिकारियों को फोन करके कहा कि बेटी का पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते। यह हादसा है, उनको कोई शिकायत नहीं देनी। बेटी तनाव में थी, इसकी जानकारी माता-पिता को पहले से थी। अवनी ने ऐसा कदम उठाया कि परिवार सदमे में है। माता-पिता को परिवार के लोग संभालने में लगे रहे, लेकिन वे गुमसुम हैं। एसएसपी रोहित सजवाण ने बताया कि परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम और अन्य कार्रवाई नहीं कराई है।
परिवार ने बताया कि अवनी सुबह 9:30 बजे अपनी मां आकांक्षा से स्कूल जाने की बात कहकर फ्लैट से गई थी। सफाई कर्मचारी और सीसीटीवी कैमरे की फुटेज के अनुसार सुबह 10:30 बजे अवनी को नीचे पड़ा देखा। सोसायटी के एक युवक ने बताया कि अवनी 40-45 मिनट छत पर घूमती रही। हेलमेट और स्कूल बैग भी छत पर रखा था। अंदेशा है कि काफी देर घूमने के बाद ही अवनी छत से कूदी है। इस दौरान अवनी की किसी से बात हुई या नहीं। इसकी जानकारी भी पुलिस जुटाने में लगी है। वहीं, यह भी बताया गया है कि सोसायटी के एक बुजुर्ग की मौत बीमारी के चलते रविवार रात एक निजी अस्पताल में हो गई थी। सोसायटी के पदाधिकारी और स्थानीय लोग श्रद्धांजलि देने के लिए खड़े थे। कुछ लोगों ने अवनी की चीख सुनी। काफी देर तक उन्हें कुछ समझ नहीं आया। बाद में घटना का पता चला।
विद्यालय में भी शोक जताया
अवनी की मौत की जानकारी के बाद उसके स्कूल में भी शिक्षकों और सहपाठियों ने शोक जताया। कुछ सहपाठियों ने बताया कि पिछले माह प्री-बोर्ड परीक्षा में अवनी ने अच्छे अंक पाए थे और बोर्ड की तैयारियों के बारे में वह अक्सर बातें करती थी। प्रधानाचार्य सपना आहूजा ने कहा कि परीक्षा को लेकर प्रत्येक विद्यार्थी को काउंसलर का नंबर दिया गया था, तनाव जैसी कोई स्थिति नहीं थी। शिक्षक और सहपाठी मंगलवार को अवनी के परिवार को सांत्वना देने पहुंचे।
पांचवीं मंजिल तक कैसे पहुंची अवनी, उठे सवाल
अवनी पांचवीं मंजिल पर कैसे पहुंची, इसे लेकर सोसायटी के लोग भी सवाल उठा रहे हैं। सोसायटी में सिक्योरिटी गार्ड और सफाई कर्मचारी हैं। इसके बावजूद स्कूल ड्रेस में छात्रा कैसे वहां तक पहुंच गई। लोगों का कहना कि सुरक्षा के मद्देनजर भी वहां पर कोई सुविधा नहीं है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि कभी कोई शिकायत नहीं की गई। सोसायटी के सचिव एवं पूर्व प्रिंसिपल डॉ. डीके जैन का कहना कि अवनी बहुत ही हंसमुख थी। उसने ऐसा कदम क्यों उठाया, इससे सभी हैरान हैं।