हरियाणा के रोहतक-पानीपत मार्ग पर गोहाना में रविवार को हुई भीषण सड़क दुघर्टना में मारे गए जिले के पांच युवकों के शव सोमवार को जब घरों पर पहुंचे तो गम का सैलाब उमड़ गया। इनमें चार कैराना कस्बे और एक शामली शहर का निवासी था। तीन लोग अभी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। सोमवार को एक के बाद एक शव पहुंचे तो हर तरफ चीख पुकार का मंजर था। मृतकों के परिजनों को ढांढस बंधाने और उनके दुख में शरीक होने के लिए लोगों का भारी हुजूम था। हजारों लोगों ने नम आंखों के बीच इन्हें सुपुर्द ए खाक किया। शोक में सोमवार को छड़ियान मोहल्ले के बाजार भी बंद रहे।
भावुक तस्वीरें: पांच शवों को देख मची चीख-पुकार, जनाजों में उमड़ा गम का सैलाब
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यूं तो रविवार शाम को ही जिसे पता लगा, वह शोकाकुल परिवारों को ढांढस बंधाने पहुंचता रहा, लेकिन सोमवार सुबह पांच बजे से ही जनाजों में शामिल होने के लिए लोगों की भीड़ मृतकों के घरों पर जुटने लगी थी। मृतक फरमान और फारूक के आवास पर हजारों लोग सुबह से ही जमा थे। यही हाल गांव पंजीठ में मृतक शबनूर और अकबरपुर सुन्हेटी में मृतक सरवेज के आवास का भी था। बेहद गमगीन माहौल और हर किसी की आंखों में आंसू थे।
सबसे पहले पहुंचा फरमान का शव
सुबह साढे़ 10 बजे हरियाणा से एंबुलेंस में सबसे पहले फरमान का शव आया। जैसे ही एंबुलेंस आकर रुकी तो परिजन और रिश्तेदारों की चीख पुकार मच गई और वे शव की ओर दौडे़। महिलाएं बुरी तरह रो रही थीं। उनके विलाप को देखकर हर आंख में आंसू छलक रहे थे। 11 बजे इसी मोहल्ले में एंबुलेंस से फारूक का शव पहुंचा तो यहां भी गम का सैलाब उमड़ पड़ा। सपा विधायक चौधरी नाहिद हसन और नगर पालिका चेयरमैन हाजी अनवर हसन भी मृतकों के आवास पर पहुंचे और सांत्वना दी।
छड़ियान में एक घंटे में उठे दो जनाजे
दोपहर साढे़ 12 बजे सबसे पहले फरमान के जनाजे की नमाज अदा की गई। इसके बाद जनाजा उठा। इसमें पालिकाध्यक्ष हाजी अनवर हसन सहित कई गणमान्य लोग भी शामिल हुए। बाद में जहानपुरा रोड स्थित कब्रिस्तान में गमगीन माहौल में शव को सुपुर्द ए खाक किया गया। इसके कुछ देर बाद ही फारूक का जनाजा उठा। इसमें भी हजारों की भीड़ शामिल रही। फारूक को भी फरमान की कब्र के पास ही सुपुर्द ए खाक कर दिया गया।
शबनूर की मां का बुरा हाल
सुबह 11 बजे गांव पंजीठ में शबनूर का शव एंबुलेंस से उसके आवास पहुंचा। यहां भी जिधर देखो उधर ही रोने की आवाजें आ रही थीं। शबनूर के भाई और मां का रोकर कर बुरा हाल था। बाद में शबनूर के शव को भी गमगीन माहौल में सुपुर्द ए खाक कर दिया गया।