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फिक्र बढ़ा रहा मिट्टी का मिटता कारोबार, पटाखे नहीं दीपों से सजाएं घर-संसार 

Mon, 05 Nov 2018 05:34 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Mon, 05 Nov 2018 05:34 PM IST
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This Deeawali decorate your home with clay lamps beside chinese jhalar
मिट्टी के दीये

रोशनी के पर्व दीपावली की तैयारियों में हर कोई जुटा है। वहीं, कुम्हार पिछले एक पखवाड़े से मिट्टी के दीपक बनाने में जुटे हैं। जिसके चलते आने वाले त्योहारों पर मिट्टी के बर्तन, दीपक, गणेश और लक्ष्मी मां की मूर्तियां बनाने का काम तेजी से चल रहा है। आधुनिकता के चलते लोगों का मोह मिट्टी के दीपों से कम होता जा रहा है। ऐसे में कुम्हार विलुप्त होते कारोबार को संजोए रखने की जद्दोजहद में लगे हैं। 


 
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मेरठ न्यूज

कुम्हार दीपावली का त्योहार आने से पहले ही दीये बनाने के कारोबार में जुट जाते हैं। जिसके चलते सरूरपुर और रोहटा क्षेत्र में कुम्हार आजकल अपने पुरखों के इस कारोबार को बचाने में लगे हैं। इस बारे में क्षेत्र के अशोक प्रजापति, सुक्खन प्रजापति ने बताया कि वह तीनों भाइयों के साथ मिलकर पुरखों के चाक को चलाकर जीवन यापन कर रहे हैं। हालांकि आज के आधुनिक जमाने में मिट्टी से बने इन दीपों, करवे, कुलिया की लोग लागत देने को भी तैयार नहीं हैं। 

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हालांकि इन्हें बनाने की मिट्टी के साथ पकाने के लिए कोयला एवं लकड़ी आदि सभी महंगा हो गया है। जिसके चलते सदियों से चला आ रहा कारोबार छोड़ने को मजबूर होना पड़ रहा है। व्यवसाय की मंदी और आधुनिकरण की दौड़ में मिट्टी के बर्तन एवं दीये विलुप्त होते जा रहे हैं। भगवान की पूजा-अर्चना के लिए मिट्टी के दिये एवं करवे आज भी पवित्र एवं शुद्ध माने जाते हैं। इस कारण देहात में आज भी दीपावली पर घर की मुंडेर मिट्टी के दीपों से जगमगाने लगती हैं। 

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शहरों में इसकी जगह चायनीज झालरों, ट्यूब लाइट्स एवं जगमगाते हुए आधुनिक बल्ब ने ले ली है। जिसके चलते मिट्टी का ये व्यापार केवल देहात और शहरी क्षेत्र में भी सिमट कर रह गया है। जिससे कुम्हार केवल गर्मी के समय में काम आने वाले बर्तनों को बनाकर बमुश्किल रोजी रोटी का जुगाड़ करते हैं। समाज के लोगों का कहना है कि यदि सरकार उनके व्यवसाय को प्रोत्साहन दे तो उनके पुरखों की कला को संजीवनी मिल सकती है।

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दीपों का त्योहार दीपावली रोशनी का त्यौहार है। पटाखे चलाने के बजाए मिट्टी दिये जलाकर कुम्हारों को खुशियों की सौगात बढ़ाएं। क्षेत्र के बुद्धिजीवियों ने दीपावली पर्व पर लोगों से दीपक जलाकर दीपावली मनाने की अपील की है। डीपीएम स्कूल के सचिव जगदीश त्यागी का कहना है कि पटाखे चलाने से कई बार बच्चे उसकी चपेट में आ जाते हैं। यदि केवल दीये जलाकर ही दीपावली पर्व का आनंद लिया जाए तो ये समस्या नहीं आएगी। 

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