मेरठ में हापुड़ रोड गुलमर्ग सिनेमा के पास हाशिमपुरा की एक गली में नसीम बानो व उसके परिवार में 31 वर्षों से ईद नहीं मनी है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि 31 साल पहले रमजान के अलविदा जुमे के दिन पीएसी वाले सर्च अभियान के दौरान इकलौते भाई सिराज को ले गए थे। बाद में पता चला कि मुरादनगर की नहर पर ले जाकर उसे भी मार दिया गया है। बुधवार को न्यायालय का फैसला आने पर बहनें बोलीं कि अब हम ईद तो मनाएंगे। लेकिन भाई को खोने का दर्द नहीं भूलेंगे।
हाशिमपुरा कांड: इकलौते भाई की हत्या पर जिंदगी भर का गम, बहनों ने 31 साल से नहीं मनाई ईद
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हाशिमपुरा कांड पर आए फैसले पर नसीम बानो ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि हमने अपना भाई सिराज खोया था। उस समय सिराज की उम्र करीब 23 साल थी। सिराज बीए की पढ़ाई कर रहा था। उसका सपना वकील बनने का था। लेकिन हाशिमपुरा कांड ने सारी खुशियों पर पानी फेर दिया था। सिराज को गंवाने का दर्द उनकी चारों बहनों नसीम, शमीम, यासमीन बानो और अमीर खातून के दिलों में आज भी है।
रमजान माह के अलविदा जुमे को इकलौते बेटे और भाई के जाने के गम ने बहनों व माता-पिता को झकझोर दिया था। माता रश्के जहां व पिता शब्बीर की बेटे के गम में कुछ सालों बाद मृत्यु हो गई। मां रश्के जहां बेटे के गम में मानसिक संतुलन खो बैठी थीं। सिराज को खोने का दर्द चारों बहनों को तोड़ रहा था। यही कारण है हाशिमपुरा कांड के बाद बहनों व उनके परिवार में आज तक ईद का त्योहार नहीं मनाया गया। 31 साल बाद फैसला आने के बाद ईद का त्योहार मनाएंगे। लेकिन त्योहार पर भाई को याद कर दिल बहुत दुखेगा।
15 दिनों बाद होनी थी शादी
बहन अमीर बानो ने बताया कि उन दिनों सिराज की 15 दिनों बाद दिल्ली बारात जानी थी। परिवार में इकलौते बेटे की शादी की खुशी का कोई ठिकाना न था। पीएसी के सर्च अभियान में जब सिपाही बेटे सिराज व पिता शब्बीर को ले जाने लगे थे, तो परिवार के लोगों ने विरोध किया। पीएसी जवानों ने कहा था कि कुछ देर में पूछताछ के बाद छोड़ देंगे। पिता को जेल जाने के बाद छोड़ दिया गया। लेकिन बेटे सिराज को मार दिया गया।
फोटो व कपड़ों से पुष्टि हुई
नसीम बानो ने बताया कि हाशिमपुरा कांड में मारे गए 40 से ज्यादा लोगों के परिवारों को शव नहीं मिले। परिवार के लोगों को शव के बिना ही संतोष करना पड़ा। जबकि शिनाख्त के तौर पर सीआईडी अधिकारियों ने फोटो और कपड़ों से मृतकों की पहचान कराई। पीड़ितों का आरोप था कि पीएसी सिपाहियों ने शवों को गंगनहर में फेंक दिया था।