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हाशिमपुर कांड : रमजान का महीना और पीएसी का कत्लेआम, उस्मान की आपबीती सुन कांप जाता है कलेजा

Thu, 01 Nov 2018 12:05 PM IST
अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ
अरीश रिजवी, अमर उजाला, मेरठ Updated Thu, 01 Nov 2018 12:05 PM IST
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Hashimpura massacre cace pac shot police saved usman tells the story meerut
मेरठ न्यूज
हाशिपुरा कांड की कहानी पीड़ित उस्मान ने कुछ यूं सुनाई। रमजान का महीना था, मगरिब की नमाज के बाद का समय था। करीब 50 आदमी थे, जिन्हें छांटकर ट्रक में भर लिया गया, बाकी को छोड़ दिया गया। पीएसी वालों ने कहा कि इसमें बैठ जाओ। दो पीएसी वाले डंडे लेकर खड़े हो गए, ताकि कोई खड़ा न हो। इसके बाद वह ट्रक लेकर चल दिए।
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मेरठ न्यूज
काफी देर हो गई, ट्रक चलता रहा, चलता रहा। घंटों बाद जाकर पता चला कि ट्रक मुरादनगर गंगनहर के पास खड़ा किया। इसके बाद पीछे आकर एक आदमी को उतारा और उसे गोली मार दी। इसके बाद आवाज आई कि किसी को छोड़ेंगे नहीं, सबको मारेंगे। ऊपर वाले का नाम लो और खड़े हो जाओ और इन पर टूट पड़ो।

 
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मेरठ न्यूज
लोग कुछ समझ पाते इससे पहले ही पीएसी वालों ने दनादन गोलियां चली दीं। एक-एक गोली कई-कई को लगी। उन्होंने मुझे उतारा और दो ने हाथ पकड़े और फिर पेट में गोली मार दी, जो पार हो गई। नहर में फेंकने से पहले एक गोली पैर में मारी। मैंने तैरने की कोशिश की, लेकिन मुझसे तैरा नहीं गया। इसके बाद किसी तरह मैं किनारे पर घास पकड़कर लटक गया। 

 
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मेरठ न्यूज
दो तीन घंटे हो गए और कोई आवाज नहीं आई तो मैं पेट के बल ऊपर चढ़ा। मैंने देखा कि दो लड़के ऊपर खड़े हैं, जो मदद कर रहे हैं, पानी पिला रहे हैं। वहां तीन आदमी और घायल थे और मैं चौथा था। इनमें से एक खत्म हो गया।
 
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मेरठ न्यूज
इसके कुछ देर बाद एक लाइट चमकती है। मैंने हाथ का इशारा किया तो वह मोटरसाइकिल थी। वह दरोगा था और एक उसके पीछे बैठा हुआ था। मैंने उसे बताया कि मेरे पेट में गोली लगी है। उसने कहा कि मैं थाने से जीप लेकर आता हूं और तब लेकर जाऊंगा। वह जीप लेकर आया और मुझ समेत तीनों को जीप में डाल दिया।
 
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