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हाशिमपुरा कांड: अलविदा जुमे का था दिन... और बुझ गए 42 घरों के चिराग

Wed, 31 Oct 2018 09:20 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
यूपी डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 31 Oct 2018 09:20 PM IST
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Hashimpura massacre: died on alvida jumma date of 42 men in Meerut
मेरठ न्यूज

हाशिमपुरा कांड के पीड़ित रियाजुद्दीन और मुस्तकीम बताते हैं कि असल विवाद तो शबे बरात पर पटाखों की चिंगारी के बाद शुरू हुआ था। यह चिंगारी एक टाट में जाकर गिर गई थी, जिससे वहां आग लग गई थी। इसके बाद तरह-तरह की अफवाहें फैलाई गईं, जिससे सांप्रदायिक माहौल खराब हो गया और फिर विवाद बढ़ता चला गया।

Hashimpura massacre: died on alvida jumma date of 42 men in Meerut
मेरठ न्यूज

वह बताते हैं कि रमजान का महीना था। अलविदा जुमे का दिन था। जुमे की नमाज पढ़कर लोग आए थे, जिसके बाद पीएसी वाले आए और तलाशी के नाम पर घरों में घुस गए और जो भी किशोर, नौजवान दिखा, सबको पकड़कर ले गए। जो ट्रक में भरकर ले जाए गए थे उन्हें मार दिया गया, जबकि जो बाकी थे उन्हें जेल में डाल दिया गया।

Hashimpura massacre: died on alvida jumma date of 42 men in Meerut
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पायजामा में रखे 200 रुपये से मिला खाना
मुस्तकीम ने बताया कि जब पीएसी वाले उन्हें पकड़कर ले गए थे उन्हें सिविल लाइन थाने में रखा गया, जहां पुलिस वाले ने उनसे एक बार के खाने के 50 रुपये लिए। इस तरह उन्होंने दो दिन में 200 रुपये का खाना खाया, यह रुपये उन्होंने अपने पायजामा में छिपाकर रखे हुए थे।

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Hashimpura massacre: died on alvida jumma date of 42 men in Meerut
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दो दिन की थी बेटी, बहुत सितम झेले 
हाशिमपुरा कांड में मारे गए इकबाल की पत्नी जैबुनिशां बताती हैं कि उनकी एक बेटी उस समय महज दो दिन की थी। इसके बाद उन्होंने बहुत सितम और परेशानियां झेलीं। परेशानियां झेलकर किसी तरह परिवार को संभाला। बेटियों की परवरिश की। कोर्ट के फैसले से वह काफी हद तक संतुष्ट हैं।

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Hashimpura massacre: died on alvida jumma date of 42 men in Meerut
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प्रशासन मांगता है भाई होने का सुबूत  
इस्लामुद्दीन का कहना है कि उनका भाई भी इस हादसे में मारा गया था, उसके पास तमाम सुबूत हैं। उसे एक बार आर्थिक सहायता भी मिल चुकी है। लेकिन इसके बाद जो सहायता सरकार ने दी, वह नहीं मिली। वह इस संबंध में कई बार प्रशासनिक अधिकारियों के पास जा चुके हैं। लेकिन हर बार उन्हें भगा दिया जाता है। अगर अब उन्हें इंसाफ नहीं मिला तो वह परिवार सहित आत्मदाह कर लेंगे।

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