पहाड़ की दुर्गम चोटियों पर चीते जैसी फुर्ती दिखाकर दुश्मनों को नेस्तनाबूद करने वाली 18 गढ़वाल राइफल्स के वीरों ने 20 साल पहले कारगिल के युद्ध में इतिहास रच दिया था। जय बद्री विशाल का उद्घोष करते हुए 21 साल के कैप्टन सुमित रॉय के नेतृत्व में इस रेजीमेंट के जांबाजों ने दुश्मन से अपनी जमीन मुक्त कराकर उस पर तिरंगा लहराया था। मातृभूमि की रक्षा करते हुए कैप्टन सुमित रॉय समेत 18 जवान शहीद हुए। अगली स्लाइडों में जानिए पूरा इतिहास:-
कारगिल युद्ध: 18 गढ़वाल राइफल्स ने रचा था इतिहास, दुश्मनों से जमीन मुक्त कराकर फहराया था तिरंगा
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मई 1999 में जम्मू-कश्मीर के कारगिल क्षेेत्र में पाकिस्तानियों द्वारा घुसपैठ की खबर पर भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय के तहत कार्रवाई शुरू की। 18 गढ़वाल राइफल्स को कारगिल के द्रास सेक्टर में कार्रवाई की जिम्मेदारी मिली। बटालियान को 19 जून की रात प्वाइंट 5140 पर कब्जा करना था। दुर्गम पहाड़ियों की चोटियों पर यह बेहद ही कठिन टास्क था। 18 गढ़वाल राइफल्स के जियालों ने वीरता का परिचय देकर द्रास सेक्टर की दुर्गम चोटियों पर फिर से तिरंगा लहरा दिया। इसके बाद 22 जून 1999 को बटालियन को प्वाइंट 4700 से जंक्शन प्वाइंट तक की चौकियों पर कब्जा करने का आदेश मिला। प्वाइंट 4700 दो किलोमीटर दुर्गम क्षेत्र में फैला हुआ था। यहां भी गढ़वाल राइफल्स के जवानों ने कैप्टन सुमित रॉय के नेतृत्व में अदम्य साहस का परिचय देते हुए पाकिस्तानी सेना को हराकर चोटियों पर पर कब्जा किया।
कैप्टन सुमित रॉय को मरणोपरांत वीर चक्र
इस युद्ध में कैप्टन सुमित रॉय समेत 18 वीर शहीद हो गए। 21 साल की उम्र में शहीद हुए कैप्टन सुमित रॉय को मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया। इस ऑपरेशन में चार सरदार साहेबान और 48 जवान घायल हुए। साहस और शौर्य के लिए बैटल ऑनर द्रास और थियेटर ऑनर कारगिल से सम्मानित किया गया। यह सम्मान इन्फेन्ट्री बटालियन के लिए गौरव की बात होती है। बटालियन को इसके लिए छह वीर चक्र, एक बार टू सेना मेडल, सात सेना मेडल, सात मेंशन इन डिस्पैच, दो थल सेनाध्यक्ष प्रशंसा पत्र मिले।
ये वीर हुए शहीद
कैप्टन सुमित रॉय, सीएचएम कृपाल सिंह, हवलदार जगत सिंह, हलवदार पदम राम, लांस नायक शंकर राजा राम शिंदे, नायक भारत सिंह, नायक कश्मीर सिंह, नायक मंगत सिंह, नायक राकेश सिंह, राइफलमैन अनुसूइया प्रसाद, राइफलमैन किशन सिंह, राइफलमैन कुलदीप सिंह, राइफलमैन डबल सिंह, राइफलमैन कुलविंदर सिंह, राइफलमैन नरपाल सिंह, राइफलमैन विक्रम सिंह।
34 साल में हर जगह फतेह
फरवरी 2019 में 18 गढ़वाल राइफल्स ने 34वीं वर्षगांठ मनाई। 15 फरवरी 1985 में गठन के बाद से 18 गढ़वाल राइफल्स ने सभी महत्वपूर्ण ऑपरेशन में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। ये बटालियन अक्टूबर 1987 से दिसंबर 1989 तक श्रीलंका के ऑपरेशन पवन में शामिल थी। नवंबर 1991 से अप्रैल 1992 तक पंजाब के ऑपरेशन रक्षक में, मार्च 1993 से अगस्त 1993 तक सियाचिन के ऑपरेशन मेघदूत में, दिसंबर 1997 से दिसंबर 1999 तक जम्मू-कश्मीर के ऑपरेशन रक्षक में, मई-जुलाई 1999 तक कारगिल के ऑपरेशन विजय में, जुलाई 2003 से जुलाई 2005 तक तवांग के ऑपरेशन फाल्कन में और जुलाई 2005 से अगस्त 2006 तक मणिपुर के ऑपरेशन हिफाजत में बटालियन ने साहसिक योगदान दिया।
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