महाभारत सर्किट: यहां जीवंत है कौरव-पांडवों की गाथा, सरकार की अनदेखी ने दर्शनीय को बना दिया दयनीय
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मेरठ से करीब 38 किलोमीटर दूर स्थित बरनावा में प्राचीन टीला है। यहीं लाक्षागृह के अवशेष है। टीला 33 एकड़ में फैला है। यहां महानंद संस्कृत विद्यालय भी संचालित है। यहां से थोड़ी दूर हिंडन और कृष्णा नदी का संगम है। एक साल पहले टीले पर उत्खनन हुआ था। वह स्थान भी झाड़ियों से घिरा है। वहां भी म्यूजियम नहीं बनाया गया।
खेतों से निकलकर नीचे की ओर जाते हैं जहां महाभारत कालीन सुरंग है। कहा जाता है कि पुरोचन के कक्ष में आग लगाकर पांडव इसी सुरंग से बाहर निकले थे। लाक्षागृह पर पर्यटकों की भीड़ नहीं है। यह स्थान सुनसान पड़ा है। लोगों के नाम पर एक प्रेमी जोड़ा ही दिखाई दिया। टीला भी कुछ खंडहरों को खामोश लिए खड़ा है।
संस्कृत विद्यालय के प्रधानाचार्य विनोद कुमार ने बताया कि पर्यटन मंत्रालय द्वारा इस स्थान के विकास के लिए एक करोड़ 40 लाख रुपये स्वीकृत किए गए थे। विकास कार्यों के शिलान्यास के शिलापट तैयार हो गए पुरातत्व विभाग ने इसमें रोक लगा दी।
नहीं मिली पुरातत्व विभाग की अनुमति
क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी अंजू चौधरी ने बताया कि करीब तीन साल पहले केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत लाक्षागृह में विकास कार्य किया जाना था लेकिन एएसआई से इसकी अनुमति नहीं मिली।