मेरठ की जाकिर काॅलोनी में तीन मंजिला मकान धराशायी हो गया। इसके मलबे में पूरा परिवार दब गया। एक ही परिवार के 10 लोगों की माैत हो गई। रविवार को दस शव एकसाथ सुपुर्द ए खाक किए गए तो हर किसी का कलेजा कांप उठा।
Meerut: हादसे की कहानी चश्मदीदों की जुबानी, साजिद ने मलबे से निकाला हाथ, सायमा चिल्लाई-प्यास लगी है...पानी!
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कुछ देर बाद ही नगर निगम की टीम भी मौके पर पहुंच गई। तभी मलबे के बीच से साजिद का हाथ दिखाई दिया। लोगों ने तेजी से मलबा हटाया और उसे बाहर निकाला। साजिद गंभीर रूप से घायल था। उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज ले गए।
इसके कुछ देर बाद मलबे के नीचे से सायमा की आवाज आई। वह चिल्लाकर बोली कि मुझे बचा लो, प्यास लगी है पानी पिला दो। इसके बाद लोगों ने तेजी से मलबा हटाकर उसे बाहर निकाला और निजी अस्पताल में भर्ती कराया। साजिद को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। जबकि सायमा की हालत देर रात तक गंभीर बनी हुई थी।
एक घंटे के बाद होता हादसा तो मलबे में दब जाते 40 लोग
नफ्फो उर्फ नफीसा की डेयरी पर रोजाना शाम करीब साढ़े पांच बजे लगभग 30 लोग दूध लेने लिए पहुंचते थे। शनिवार को 4:30 बजे भयावह हादसा हो गया। आसपास के लोगों ने बताया कि अगर एक घंटे बाद हादसा होता तो लगभग 40 लोग मलबे में दब सकते थे।
रेस्क्यू अभियान के साथ अधिकारियों ने हादसे की जांच शुरू की। प्राथमिक जांच में मकान की नींव कमजोर होने की पुष्टि हुई। बारिश में मकान में सीलन आ गई और डेयरी का पानी जाने के कारण नींव पहले से कमजोर थी, जिसके चलते हादसा हुआ। घर में डेयरी संचालन से नगर निगम और प्रशासन की लापरवाही भी उजागर हुई। स्थानीय लोगों ने इस संबंध अधिकारियों से भी शिकायत की थी।