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मेरठ अग्निकांड: जान पर खेल कर बचाई आठ जिंदगियां, झुलस गया आसिम; कपड़ा कारोबारी और पड़ोसियों ने बयां किया दर्द
Wed, 25 Feb 2026 03:24 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
Published by: शाहरुख खान
Updated Wed, 25 Feb 2026 03:24 PM IST
सार
मेरठ के किदवई नगर में आग लगने के बाद आसिम ने जान पर खेल कर बचाई आठ जिंदगियां बचाईं। कपड़ा कारोबारी और पड़ोसियों ने दर्द बयां किया।
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आग से झुलसे आसिम के मरहम लगाता साथी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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मेरठ के किदवई नगर में कपड़ा कारोबारी आसिम और पड़ोसियों ने सोमवार रात घर में लगी आग के दौरान जान जोखिम में डालकर परिवार के आठ जिंदगी बचा लीं। वहीं, आग और धुएं के कारण आसिम की पत्नी रुखसार, उनकी छह माह की जुड़वां बेटियां अनबिया, आयत उर्फ इनायत, बेटे अकदस (4), उनके भाई फारूक बेटी मेहविश (12), उनका बेटा हम्माद (4) की झुलसने और दम घुटने से मौत हो गई थी। हादसे के समय घर में तीन महिलाएं, एक युवती और दस बच्चे मौजूद थे। परिवार को बचाने के प्रयास में आसिम झुलस गया था और पड़ोसी शहजाद बेहोश गया था।
मृतक बच्चे और महिला
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
परिवार और पड़ोस के लोग तीन महिलाओं, एक युवती और दस बच्चों को कंधे पर लेकर दौड़ते हुए राजधानी अस्पताल तक पहुंचे। मंगलवार को आसिम और परिवार को बचाने का प्रयास करने वाले लोगों ने अपनी पीड़ा बताई। उनका कहना है कि वह अपनी जान पर खेल गए लेकिन दमकलकर्मियों की देरी के कारण छह लोगों की जान चली गई। अगर दमकल की टीम समय पर पहुंच जाती तो हंसता-खेलता परिवार नहीं उजड़ता।
आग में झुलसी नाजिश
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बिना सोचे छत से रास्ते मकान में दाखिल हो गए
आसिम ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलने पर मस्जिद से दौड़ते हुए वह घर पहुंच गए। घर के सामने स्थित मेहताब के मकान की छत पर पहुंचे तो देखा उनके परिवार की महिलाएं और बच्चे मदद के लिए चिल्ला रहे थे। वह बिना कुछ सोचे सबसे पहले लोहे की सीढ़ी के सहारे अपने मकान की पहली मंजिल पर पहुंच गए।
आसिम ने बताया कि आग लगने की सूचना मिलने पर मस्जिद से दौड़ते हुए वह घर पहुंच गए। घर के सामने स्थित मेहताब के मकान की छत पर पहुंचे तो देखा उनके परिवार की महिलाएं और बच्चे मदद के लिए चिल्ला रहे थे। वह बिना कुछ सोचे सबसे पहले लोहे की सीढ़ी के सहारे अपने मकान की पहली मंजिल पर पहुंच गए।
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महिला और तीन बच्चों के एक साथ उठे जनाजे में शामिल आसपास के लोग व परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने अन्य लोगों की मदद से पहले भाई के बच्चों शहरीश, अरहम, रयाल, अपनी बेटी नबिया, फिर मां अमीर बानो, भाई फारूक की पत्नी नाजिश, डॉ. अरशद की पत्नी नाजमा और बहन जकिया को बाहर निकाला। इनका अस्पताल में इलाज कराया गया। इसके बाद वह दूसरी मंजिल पर पहुंचे। यहां एक कमरे में उनकी पत्नी रुखसार और जुड़वां बेटियां अनबिया, आयत उर्फ इनायत और बेटा अकदस बेहोश पड़े थे।
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महिला और तीन बच्चों के एक साथ उठे जनाजे में शामिल आसपास के लोग व परिजन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
वह चारों को बाहर निकाल रहे थे, तब दमकलकर्मी पहुंचे। लेकिन परिवार के लोग ही सभी लोगों को अस्पताल लेकर गए। वहां उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिवार को बचाने के प्रयास में आसिम के हाथ झुलस गए और पैर में भी चोट आई।