एक बस चालक ने ढाई साल की बच्ची को कुचल दिया। जिससे बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद परिजनों में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं नन्ही परी की मौत से मां सदमे में है।
ढाई साल की बच्ची को बस ने कुचला, नन्ही परी की 'मौत' से सदमे में मां, तस्वीरें
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घटना यूपी के मेरठ जिले की है। यहां शास्त्रीनगर में शुक्रवार को स्कूल बस के चालक ने ढाई साल की बच्ची को रौंद डाला। बच्ची की मौके पर ही मौत हो गई। आरोपी चालक ने स्कूल बस को लेकर भागने का प्रयास किया तो लोगों ने पथराव कर दिया। इसके बाद चालक बस छोड़कर फरार हो गया। नौचंदी पुलिस ने स्कूल बस को कब्जे में ले लिया है। पुलिस चालक की तलाश कर रही है।
इंस्पेक्टर नौचंदी बृजेश सिंह के अनुसार, शास्त्रीनगर सेक्टर- 11 निवासी मोहम्मद अमजद की किराना की दुकान है। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे दुकानदार की ढाई साल की बेटी रिमसा घर से बाहर खेलती हुई आरटीओ रोड की तरफ चली गई। इस बीच तेजी से आती हाईनेस पब्लिक स्कूल की बस आरटीओ पुल से अंदर सेक्टर-11 की तरफ टर्न हुई और बच्ची को कुचल दिया। रिमसा की मौके पर ही मौत हो गयी। इस दौरान दो छोटे -छोटे बच्चे भी वहीं पर खेल रहे थे, गनीमत रही कि वह दोनों बच्चे बस की चपेट में नहीं आए। इस दौरान वहां मौजूद लोगों ने शोर मचाया तो चालक ने बस दौड़ा दी। इस बीच लोगों ने बस पर पथराव कर दिया।
लोग बस के पीछे दौड़ पडे़। कुछ दूरी पर आरोपी चालक बस को पार्क के पास छोड़कर फरार हो गया। परिजन और अन्य लोग आनन फानन में बच्ची को गोद में उठाकर पास में ही एक निजी अस्पताल में ले गये जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। नौचंदी पुलिस मौके पर पहुंची और बस को कब्जे में लेकर थाने भेज दिया। पुलिस ने आरोपी चालक की तलाश की, लेकिन वह हत्थे नहीं चढ़ा। बच्ची की मौत के बाद परिवार के लोगों का रोकर बुरा हाल था। इस दौरान परिजनों ने इंस्पेक्टर से कहा कि वह इस मामले में बच्ची का पोस्टमार्टम नहीं कराना चाहते। जिसके बाद पुलिस ने बच्ची के परिजनों को ही शव सौंप दिया। इंस्पेक्टर नौचंदी का कहना है कि बस को कब्जे में ले लिया गया है। इस मामले में तहरीर नहीं आयी है। तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
बस में थे बच्चे
हादसे के वक्त स्कूल बस में कुछ बच्चे भी थे। चालक ने बस में बैठे बच्चों की परवाह भी नहीं की और पहले बस को अंधाधुंध भगाया और फिर इन बच्चों को छोड़कर फरार हो गया। जब पीछा करते हुए लोग बस तक पहूंचे तो बस में बच्चों को देखकर उन्होंने बच्चों के परिजनों को फोन करके बुलाया और बच्चों को उन्हें सौंपा।
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