पुलवामा हमले में शहीद हुए मेरठ के जवान अजय कुमार के बेटा केवल ढाई साल का है। घर में मचे कोहराम से उसे ये अंदाजा तो है कि कुछ हुआ है लेकिन क्या इससे वह अनजान है। ढाई साल का आरव अभी इतना बड़ा नहीं कि उसे इस गम का पता हो। बस बार बार अपने पिता को याद करता और और अपनी दादी से बात कराने की जिद करने लगता। चार माह बाद अजय के घर में एक और मेहमान का आगमन होने वाला था लेकिन अजय उस नन्हीं जान का चेहरा देखने से पहले ही अलविदा कह गए: -
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#Pulwama: नन्हीं जान का चेहरा देखने से पहले ही शहीद हो गए अजय, 4 माह बाद घर में गूंजनी थी किलकारी
Tue, 19 Feb 2019 03:10 PM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Tue, 19 Feb 2019 03:10 PM IST
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martyr ajay kumar son
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अजय के मासूम बेटे ने सुबह सबको रोते देखा तो वो भी रोने लगा। बार-बार दादी से कहता कि नीतू भइया से बात करा दो अम्मा। पोते को देखकर दादी और गांव की दूसरी महिलाएं बस यही कहतीं कि इसे कौन बताए कि अब उसके नीतू भइया कभी बात नहीं करेंगे। रोते-रोते मासूम दादी की गोद में सो गया। दादी उसे देखकर यही बोलतीं कि मेरे बेटे ने तो कुछ देखा ही नहीं।
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सिपाही अजय कुमार के घर का नाम नीतू था। आरव अजय के बड़े भाई के साथ ही खेलता था। छह माह पहले उनकी मौत के बाद से वो अकेला सा रहने लगा। अजय जनवरी में छुट्टी आए तो आरव ने उनसे कहा कि आप मेरे नीतू भइया हैं। इसके बाद वो पापा को नीतू भइया कहने लगा।
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रविवार रात को भी उसने फोन पर बात करते हुए कहा कि नीतू भइया कब आओगे। सोमवार को आरव जगा तो सभी रो रहे थे। उनको देखकर वो भी रोने लगा। रोते-रोते वह थककर दादी की गोद में ही सो गया।
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दादी कमलेश दिनभर पोते को लिपटाए बैठी रहीं। वे इस अफसोस में थी कि इसके भविष्य का क्या होगा। कौन ख्याल रखेगा। उन्होंने बताया कि आरव अभी तीन साल का भी नहीं हुआ। छह जुलाई को उसका जन्मदिन है। सबकुछ खत्म हो गया।