मौजूदा दौर में जहां हिंदू और मुस्लिम के नाम पर सियासत की जा रही है वहीं, कुछ ऐसे लोग भी हैं जो अपने प्रयासों से आपसी सौहार्द का संदेश देने के साथ ही सर्व समाज के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं। एक ऐसा ही अनूठा प्रयास कर रहा है मानव सेवा ट्रस्ट जिसने प्राचीन मंदिर परिसर को ही स्कूल बना दिया और इसमें गरीब और बेसहारा बच्चों को निशुल्क शिक्षा दी जा रही है। इस स्कूल में हिंदू और मुस्लिम के बच्चे एक साथ पढ़ रहे हैं। यहां पढ़ने वालों में कुष्ठ रोगियों के बच्चों के साथ ही 50 फीसदी से अधिक मुस्लिम बच्चे शिक्षा हासिल कर रहे हैं।
यूपी: मंदिर को बनाया स्कूल, एकसाथ पढ़ रहे पूजा और रसूल, तस्वीरों में जानें पूरी कहानी
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शहर की पुरानी अनाज मंडी क्षेत्र में श्रीराम पंचायत सिद्धपीठ मानस निकेतन मंदिर है। यह मंदिर करीब 500 वर्ष पुराना बताया जाता है। पिछले कुछ दशक से मंदिर के आसपास मुस्लिम आबादी बस चुकी है। समय के साथ मंदिर में पूजा करने के लिए पहुंचने वालों की संख्या कम होती चली गई। मंदिर की देखभाल करने वाले परिवार ने करीब आठ वर्ष पहले यह मंदिर मानव सेवा ट्रस्ट को सौंप दिया।
मानव सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉक्टर एसएस कुमार, सचिव राजेंद्र चुघ और कोषाध्यक्ष सीए संजय धींगरा ने करीब आठ वर्ष पहले मंदिर में वृद्धाश्रम की शुरूआत की। वर्तमान में कई बुजुर्ग यहां रह रहे हैं। इसके साथ ही दो वर्ष पहले ट्रस्ट ने यहां समाज के पिछड़े और गरीब तबके के बच्चों की नि:शुल्क शिक्षा के लिए मंदिर को स्कूल का रूप दे दिया और मानव लर्निंग सेंटर खोला।
ट्रस्ट के सदस्यों ने कूड़ा बीनने वाले और कुष्ठ आश्रम में रहने वाले रोगियों के बच्चों को स्कूल से जोड़ा। वर्तमान में स्कूल में 98 बच्चे पंजीकृत हैं। इनमें करीब 60 बच्चे मुस्लिम हैं। इन बच्चों की पढ़ाई और अन्य चीजों पर हर माह करीब 60 हजार रुपये खर्च आ रहा है। इसे ट्रस्ट के सदस्य और साथी वहन कर रहे हैं। जब अमर उजाला की टीम स्कूल पहुंची तो पूजा और नुसरत एक साथ पढ़ती मिलीं। बड़ी संख्या में नेपाली बच्चे भी हैं, जिनके परिजन वर्षों से सहारनपुर में आकर बसे हुए हैं।
हुनरमंद बनकर निकल रहे बच्चे
ट्रस्ट बच्चों को शिक्षित बनाने के साथ ही उनको हुनरमंद भी बना रहा है। ट्रस्ट की ओर से वोकेशनल ट्रेनिंग भी दी जा रही है, जिसमें ब्यूटीशियन, मेहंदी लगाना, सिलाई, कढ़ाई, लिफाफे बनाना, कंप्यूटर ट्रेनिंग आदि शामिल हैं। कंप्यूटर ट्रेनिंग के लिए पांच कंप्यूटर की लैब बनाई गई है। इसके लिए दस हजार रुपये महीना पर एक ट्रेनर रखा गया है। शिक्षकों ने बताया कि इन बच्चों में कई बच्चे अच्छे गायक और डांसर भी हैं। उन्हें किसी ने सिखाया नहीं है।
साथ मनाते हैं दीपावली, ईद और अन्य त्योहार
स्कूल में हिंदू और मुसलमान समाज दोनों के बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में स्कूल में दीपावली और होली के साथ ही क्रिसमस और ईद भी मनाई जाती है। मंदिर परिसर में ईद का मनाया जाना अपने आप में एक सबक देने वाली पहल है। खास बात यह है कि ट्रस्ट के सदस्य खुद इन त्योहारों में शामिल होकर बच्चों में इंसानियत के गुण भरने का काम करते हैं।
कभी होती थी पूजा, आज सजे हैं कंप्यूटर
मंदिर परिसर में भूतल पर बीचोंबीच भगवान शिव का मंदिर है। मंदिर के ठीक सामने श्री हनुमान जी की मूूर्ति सजी है। एक दिशा में बाबा सेवादास जी महाराज की गद्दी सजी है। बीच में खाली पड़े स्थान पर बैठकर कभी लोग पूजा अर्चना किया करते थे। मगर आज इस स्थान को कंप्यूटर लैब का आकार दे दिया गया है। एक दीवार पर प्रोजेक्टर लगा है।
यह हैं सहयोगी
ट्रस्ट को चलाने में सबसे बड़ा योगदान डॉक्टर एसएस कुमार, राजेंद्र चुघ और संजय धींगरा का है। मगर इनके अलावा भी अनेक लोग हैं, जो सहयोग करते आ रहे हैं। इनमें सांसद राघव लखनपाल शर्मा, विनोद बजाज, अधिवक्ता विक्रम चावला, हरीश अरोड़ा, बलबीर सिंह, कौशलेंद्र स्वामी, राजकुमार, महंत राघवेंद्र स्वामी आदि शामिल हैं।
भगवान का रूप हैं बच्चे : कुमार
ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉक्टर एसएस कुमार का कहना है कि मंदिर में पूजापाठ आज भी होता है, मगर बच्चे भी भगवान का ही रूप हैं। उन्होंने बताया कि वह बच्चों में हिंदू और मुसलमान नहीं, बल्कि इंसान देखते हैं। बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का मकसद शिक्षित और अच्छा इंसान बनाना है। कल यही बच्चे देश का भविष्य बनेंगे।