बिलारी मोहल्ला रजानगर के लिए रविवार की रात कयामत की रात बनकर आई। जैसे ही गुरुग्राम से एक परिवार के पांच शव पहुंचे तो रजानगर ही नहीं लगभग पूरा शहर उमड़ पड़ा। एक मां और उसकी चार मासूम संतानों के शवों को देखते ही परिजनों की चीखें गूंजने लगीं तो पूरे मोहल्ले के महिला-पुरुषों की रुलाई फूट गई।
किसी के चेहरे पर गम था तो किसी के गुस्सा लेकिन मन में एक ही सवाल कि हेयर सैलून संचालक नाजिम इतना बेरहम कैसे हो गया कि प्रेम संबंधों में अपने पहले पति को छोड़कर कोर्ट मैरिज करने वाली नाजमा और बच्चों इकरा, शिफा, आयान और खदीजा नूर की जान ले ली।
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बिलारी में माैजूद गमगीन लोग
- फोटो : संवाद
रात करीब 9.30 बजे पांचों शव शाहबाद रोड स्थित मोहल्ला रजानगर पहुंचे तो जिसने सुना उधर दौड़ पड़ा। चीख-पुकार और चीत्कार के बीच रात करीब 11 बजे पांचों जनाजे साथ उठे तो चीखों की आवाज और तेज हो गई। बिलारी के शुमाली स्थित कब्रिस्तान में पांचों को दफन किया गया। नाजिम के घर से लेकर कब्रिस्तान तक लोगों के सिर ही सिर दिखाई दे रहे थे।
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बच्चों के शव देख महिलाओं की निकली चीख
- फोटो : संवाद
घर से उठतीं महिलाओं की चीखें थमने का नाम नहीं ले रही थीं। देर रात तक जमा भीड़ में शामिल आसपास की महिलाएं व रिश्तेदार बिलखते परिजनों को ढांढस बंधाने की कोशिशें करते रहे। तमाम शहरियों और विधायक फहीम इरफान ने भी गम में घिरे परिवार का दुख बांटने की कोशिश की लेकिन परिजनों की बहती आंखें सूख नहीं पा रही थीं। नाजिम की वृद्ध मां परवीन और वृद्ध पिता नबावजान रोते-रोते बेसुध हो जा रहे थे।
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पांच हत्या की जांच के लिए जाते हुए पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हेयर सैलून चलाते हैं सभी छह भाई
मोहल्ला रजानगर के निवासी नवाबजान का बेटा नाजिम (33) गुरुग्राम के वजीरपुर में किराये के मकान में पत्नी व चार बच्चों के साथ रहता था। गुरुग्राम के एक अन्य गांव में वह हेयर सैलून चलाता था। उसके अन्य पांच भाई भी सैलून चलाते हैं। नाजिम इनमें दूसरे नंबर का है। नाजिम से बड़े भाई आसिम और छोटे भाई सलमान की शादी हो चुकी है। नाजिम के तीन सगे छोटे भाई जीशान, अरमान और रानू अभी अविवाहित हैं। यह तीनों एक साथ वजीरपुर (गुरुग्राम) में किराये के मकान में रहते हैं।
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महिला नाजमा की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पोती-पोते का फोन पर हालचाल लेती रहती थीं बुजुर्ग परवीन
नाजिम के बड़े भाई आसिम के अनुसार उसकी मां परवीन नाजिम की तीनों बेटियों और बेटे से काफी प्यार करती थीं। वह ईद व अन्य मौकों पर फोन करके नाजिम को सपरिवार बिलारी बुलाती थीं। पोते-पोतियों का फोन पर हाल जानती रहती थीं।