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तीन हत्यारों को फांसी की सजा: फैसले के 52 पेजों में जज ने लिखा..., और मरकर भी वकील की आवाज इंसाफ ही रचती है

मदन बालियान, मुजफ्फरनगर Published by: Mohd Mustakim Updated Tue, 07 Apr 2026 02:01 AM IST
सार

Muzaffarnagar News: अधिवक्ता समीर सैफी की हत्या में कोर्ट ने सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को दोषी पाया। तीनों को फांसी की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने अपने 52 पन्नों के फैसले में बड़ी ही मार्मिक टिप्पणी की है। 

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Death sentence to three murderers: In 52 pages of the judgement, the judge wrote
अधिवक्ता समीर सैफी। - फोटो : अमर उजाला
लद्दावाला के समीर सैफी (28) की हत्या के मामले में कोर्ट ने 52 पेज का फैसला लिखा है। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-तीन के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने रिश्तों में हत्या, मानवीय पहलू, अधिवक्ताओं के अधिकार और विवेचना की स्थिति पर टिप्पणी की। एक कविता भी लिखी है। उन्होंने लिखा है कि और मरकर भी वकील की आवाज इंसाफ ही रचती है।
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Death sentence to three murderers: In 52 pages of the judgement, the judge wrote
हत्यारों को जेल ले जाती पुलिस। - फोटो : अमर उजाला
अदालत ने अपने फैसले में लिखा कि अधिवक्ता बंधुओं पर हमला केवल अधिवक्ताओं पर ही हमला नहीं है, बल्कि यह एक संस्था पर हमले के समान है। उस संस्था अर्थात एडवोकेट बार को सीधे चुनौती देने जैसा है। अधिवक्ता समाज में न्याय, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों के संरक्षक के रूप में कार्य करते हैं, इसलिए अधिवक्ताओं को न्याय का प्रहरी भी कहा जाता है। अधिवक्ता समाज में शांति और व्यवस्था बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। वास्तव में शांति-व्यवस्था की समाप्ति पर समाज का अस्तित्व ही खतरे में पड़ जाएगा।
 
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समीर सैफी। - फोटो : अमर उजाला
सामान्य सुविधाएं नहीं, हत्या देती है निराशा का संदेश
कोर्ट ने टिप्पणी में कहा कि ज्यादातर जिलों में अधिवक्ता बंधुओं के बैठने के लिए चैंबर आदि की मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं। जनपद न्यायालयों में ज्यादातर अधिवक्ताओं के लिए चैंबर, लाईब्रेरी, वाई-फाई और बैठने की उचित व्यवस्था नहीं है। पार्किंग जैसी छोटी-छोटी सुविधाएं भी अधिवक्ताओं के पास नहीं हैं। इस कारण से अधिवक्ता बंधुओं को काफी समस्याएं झेलनी पड़ती हैं। अधिवक्ता की हत्या निराशा का संदेश देती है।
 
Death sentence to three murderers: In 52 pages of the judgement, the judge wrote
जेल जाते हत्यारे। - फोटो : अमर उजाला
दोस्त की हत्या...भरोसे की नींव को खत्म करने वाला
सिंगोल अल्वी (मुख्य अभियुक्त) को गवाह नंबर एक ने मृतक एडवोकेट समीर का दोस्त, विश्वासपात्र एवं व्यवसायिक साथी बताया है। प्रकरण में एक दोस्त की सुनियोजित साजिश के तहत लालच में निर्मम हत्या की गई है। दोस्त की हत्या करना सिर्फ एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह मानवीय संबंधों के टूटने का सबसे निचला स्तर है। दोस्ती को सबसे पवित्र और चुने हुए रिश्ते के रूप में देखा जाता है। जब कोई दोस्त अपने दोस्त को मारता है, तो वह केवल शरीर को नष्ट नहीं करता है बल्कि भरोसे की नींव को खत्म कर देता है। दोस्त की हत्या यह सिद्ध करती है कि मानव स्वभाव में प्रेम व विश्वास के साथ-साथ अत्यंत अंधेरा और हिंसक पक्ष भी हो सकता है।


 
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समीर सैफी। फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
फैसले में इस तरह लिखी कविता...
कचहरी की सीढ़ियों पर,
आज सन्नाटा कुछ बोल रहा है,
जहां दलीलों की गूंज थी कल,
वहां खामोशी डोल रही है,
काला कोट जो ढाल बना था,
सच की हर एक लड़ाई में,
वो गिर पड़ा आज जमीन पर,
झूठ की गहरी साजिश में,
कल तक जो कानून था जिंदा,
हर जुर्म को आईना दिखाता था,
आज उसी के रखवाले को,
किसी ने बेरहमी से सुला डाला,
पर ये खून बेकार नहीं जाएगा,
हर बूंद गवाही बन जाएगी,
जो सच दबाने निकले थे,
उनकी साजिश जल जाएगी,
क्योंकि हर वकील की सांसों में,
एक अदालत बसती है,
और मरकर भी वकील की आवाज,
इंसाफ ही रचती है।
 
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