डूडा कर्मी विक्रांत की मौत का राज उसके अंतिम संस्कार के साथ ही दफन हो गया था। 17 अप्रैल को बड़गांव थाना पुलिस ने शव नहर से बरामद किया। 72 घंटे तक पहचान नहीं होने पर शव का लावारिस में अंतिम संस्कार कर दिया गया। राखी कश्यप की हत्या के बाद विक्रांत की मौत का राज भी सामने आ गया। परिजनों ने कपड़ों के आधार पर विक्रांत की पहचान की।
बता दें, कि आरोपियों ने विक्रांत का शव दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के फ्लाईओवर से नीचे नहर में फेंका था, जिसे कपड़े में बांधा गया था। आरोपियों ने इस मकसद से शव यहां लाकर फेंका था कि वह पानी में आगे चला जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। शव वहीं पर झाड़ियों में फंस गया। 17 अप्रैल को पुलिस को शव मिला।
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विक्रांत की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
72 घंटे तक उसे पहचान के लिए रखा गया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद बड़गांव पुलिस ने लावारिस मानकर उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। इससे विक्रांत की मौत का राज दफन हो गया था।
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राखी की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
लावारिस मानकर पुलिस ने भी खास सक्रियता नहीं दिखाई। 10 दिन बाद यानी 27 अप्रैल को मिर्जापुर थाना क्षेत्र में राखी कश्यप का शव मिलने के बाद विक्रांत हत्याकांड का पर्दा भी उठ गया। विक्रांत के परिजन बड़गांव थाने पहुंचे और कपड़ों के आधार पर उन्होंने पहचान की।
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राखी कश्यप की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विक्रांत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया था कि शरीर में गोली का निशान था और अन्य हिस्सों पर भी चोट मारी गई थी। इसके बाद पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज कर ली थी।
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राखी कश्यप की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जिनसे खतरा बताकर बनवाया शस्त्र लाइसेंस वही करेंगे पैरवी
राखी कश्यप की हत्या की पैरवी अब वहीं लोग करेंगे, जिनसे जान का खतरा बताकर उसने अपना शस्त्र लाइसेंस बनवाया था। उसके मायके वाले अब पैरवी करने की तैयारी में लग गए और शुक्रवार को सहारनपुर भी गए।