समान कार्य के लिए समान वेतन समेत विभिन्न मांगों को लेकर सोनभद्र स्थित रेणुसागर पॉवर प्रोजेक्ट के गेट पर आठ दिनों से धरना दे रहे भारतीय मजदूर संघ से जुड़े संविदा श्रमिकों को शाम को बल का प्रयोग कर हटा दिया और 24 लोगों को हिरासत में भी ले लिया। इससे गुस्साए कुछ श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों ने जमकर बवाल काटा। पुलिस पर पथराव किया, बाइकों में आग लगा दी। घटना में छह से अधिक पुलिस कर्मियों और अन्य के घायल होने की खबर है। आगे की स्लाइड्स में देखें...
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- फोटो : अमर उजाला
यूपी के सोनभद्र रेणुसागर पावर प्रोजेक्ट के गेट नंबर दो पर शुक्रवार की शाम जमकर बवाल हुआ। घंटों अफरातफरी की स्थिति रही। आठ दिनों से धरना दे रहे भारतीय मजदूर संघ से जुड़े संविदा श्रमिकों को शुक्रवार को पुलिस द्वारा जबरन हटाने के बाद हालात तेजी से बिगड़े। पुलिस ने बल पूर्वक श्रमिकों को खदेड़ा और 24 श्रमिकों को हिरासत में ले लिया, जिसके बाद श्रमिकों के समर्थक उग्र हो गए और पथराव और आगजनी की। उपद्रवियों ने परियोजना परिसर में खड़ी तीन बाइकों को फूंक दिया। हालात बेकाबू होते देख पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े जिससे एक बालिका जख्मी हो गई।
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डीएम अमित कुमार सिंह और एसपी किरिट राठोड समेत अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभाला धरने के दौरान शुक्रवार को मौके पर पहुंचे एडीएम उमाकांत त्रिपाठी, एसडीएम रामचंद्र यादव, एएसपी अरुण कुमार दीक्षित, सीओ राहुल मिश्रा ने श्रमिकों से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन वे तैयार नहीं हुए। इस पर पुलिस ने लाठियां भांजकर श्रमिकों को खदेड़ दिया।
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घटना में संविदा श्रमिकों के साथ स्थानीय लोगों के शामिल हो जाने से माहौल तनावपूर्ण हो गया है। पत्थरबाजी में पुलिस की जीप के शीशे टूट गए। फोर्स कम पड़ने पर प्रशासन बैकफुट पर आ गया। घटना में दो इंस्पेक्टर समेत 6 पुलिसवाले घायल हो गए। डीएम, एसपी ने घटनास्थल का मुआयना किया। एसपी ने जिले की कई थानों की फोर्स बुला ली । उपद्रवी रुक-रुक कर पथराव कर रहे थे। शुक्रवार सुबह से माहौल तनावपूर्ण है।
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आरोप है कि शांति से धरना दे रहे लोगों को पुलिस ने कंपनी के दबाव में हटा दिया। एसपी किरीट राठोड ने कहा कि संविदाकर्मी अनाधिकृत रूप से धरना दे रहे थे। कोर्ट ने परिसर के अंदर धरना प्रदर्शन को अवैध करार दिया है। इसीलिए पुलिस कार्रवाई की जा रही थी। कुछ अराजक तत्व लोगों को गुमराह कर रहे हैं। ऐसे लोगों को चिह्नित कर कार्रवाई की जा रही है। डीएम अमित कुमार सिंह ने कहा कि धरना दे रहा संगठन पंजीकृत नहीं है। तीन पंजीकृत संगठन हैं, जिन्होंने आंदोलन से अपने को दूर रखा है।
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