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काशी के तीन युवाओं से मिलने बनारस आए थे स्वामी विवेकानंद

Thu, 12 Jan 2017 05:21 PM IST
तबस्सुम, अमर उजाला, वाराणसी
तबस्सुम, अमर उजाला, वाराणसी Updated Thu, 12 Jan 2017 05:21 PM IST
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Swami Vivekananda came Varanasi to meet three young
swami vivekanand - फोटो : अमर उजाला

केदारनाथ, जामिनी रंजन और चारुचंद्र दास...। लक्सा स्थित रामकृष्ण मिशन अस्पताल की नींव रखने वाले इन तीन युवाओं से स्वामी विवेकानंद खुद मिलने काशी आए थे। स्वामी विवेकानंद से ही प्रेरणा लेकर इन तीन युवाओं ने गंगा किनारे रामापुरा में दो कमरे के मकान में गरीबों और असहायों की सेवा करनी शुरू की थी। स्वामी जी 1902 में जब अपनी दूसरी विदेश यात्रा से लौटे तो सबसे पहले काशी आए। काशी आने पर उन्हें लोगों ने बताया कि आपकी प्रेरणा से यहां के युवाओं ने एक चिकित्सालय की स्थापना की है। वह बेहद खुश हुए और उनसे मिलने पहुंच गए।

Swami Vivekananda came Varanasi to meet three young
स्‍वामी व‌िवेकानंद
जब उन्होंने अस्पताल का नाम देखा तो गंभीर हो गए। युवाओं ने अस्पताल का नाम रखा था ‘पूअर मेंस रिलीफ एसोसिएशन’।इस पर स्वामी जी का सवाल था-‘आप राहत देने वाले कौन होते हैं?’ स्वामी विवेकानंद ने खुद उस अस्पताल का नाम रखा ‘होम ऑफ सर्विस’। बाद में यह रामकृष्ण मिशन से जुड़ गया। मिशन के सचिव स्वामी ऋतानंद बताते हैं कि देश भर में रामकृष्ण मिशन है लेकिन काशी में ये इकलौता ‘राम कृष्ण मिशन होम ऑफ सर्विस’ है। 1902 में जब स्वामी विवेकानंद काशी आए, उस वक्त बृंगा के तपस्वी राजा उदय प्रताप सिंह की उनसे मिलने की इच्छा हुई ।
Swami Vivekananda came Varanasi to meet three young
स्‍वामी व‌िवेकानंद
लेकिन उन्होंने ये व्रत ले रखा था कि वह मृत्यु तक अपने भोजूबीर स्थित बगीचे में ही रहेंगे। एक संन्यासी ने ही विवेकानंद को उनकी इच्छा के बारे में बताया। वह फौरन राजा से मिलने पहुंच गए ताकि उनका व्रत न टूटे। दोनों में वेदांत पर चर्चा हुई। राजा ने स्वामी जी को वेदांत के प्रचार के लिए 500 रुपये दान में दिए। इसी दान से लक्सा स्थित अस्पताल परिसर में रामकृष्ण अद्वैत आश्रम बनाया गया। हालांकि तब तक स्वामी जी ने महासमाधि ले ली थी। स्वामी वरिष्ठानंद बताते हैं कि अपने अंतिम काशी आगमन से पहले स्वामी विवेकानंद 1880 में भी आए थे।
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Swami Vivekananda came Varanasi to meet three young
स्‍वामी व‌िवेकानंद
उस वक्त वह संकट मोचन मंदिर दर्शन करने पहुंचे थे। वहां से निकलने के दौरान बंदर उनका पीछा करने लगे। वह भागे लेकिन बंदरों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। दुर्गा कुंड मंदिर के पास एक संन्यासी ने उन्हें रोका। कहा, ‘रुको, पशुओं का सामना करो’। इस पर वह रुके और बंदरों को सामना किया। यहीं से उन्हें ये सीख भी मिली कि चुनौतियों से भागना नहीं बल्कि उनका सामना करना चाहिए और यही सीख उन्होंने विश्व को दी। माना जाता है कि स्वामी विवेकानंद की मां संतान प्राप्ति के लिए कोलकाता से काशी आईं थीं।
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Swami Vivekananda came Varanasi to meet three young
swami varishthanand - फोटो : अमर उजाला
सिंधिया घाट स्थित विरेश्वर शिव मंदिर में उन्होंने शिव की आराधना की। व्रत रहीं। एक रात उन्हें सपना आया, जिसमें उनसे किसी ने कहा, माता आने घर शिव जन्मा है और उसके बाद स्वामी जी का जन्म हुआ। शिव के आशीर्वाद से उनका जन्म हुआ था इसलिए पहले उनका नाम ‘बिले’ रखा गया और फिर इसके बाद नरेेंद्रनाथ नाम रखा गया। रामकृष्ण मिशन की ओर से लक्सा स्थित परिसर में ही विवेकानंद सेंटर फॉर यूथ काउंसलिंग एंड पॉजिटिव थिंकिंग युवाओं को सकारात्मक ऊर्जा से जोड़ रहा है। स्वामी वरिष्ठानंद ने बताया कि इस केंद्र में हर रविवार तीन-चार घंटे प्रार्थना, योग, व्यायाम और ध्यान का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें करीब 70 से 80 बच्चे और युवा शामिल होते हैं। 
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