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UP: कर्दमेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में मिलीं चार अदृश्य ऊर्जा रेखाएं, पंचक्रोशी यात्रा का ये पहला पड़ाव
Tue, 18 Aug 2026 09:44 AM IST
Sharukh Khan
हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला, वाराणसी
हिमांशु अस्थाना, अमर उजाला, वाराणसी
Published by: Sharukh Khan
Updated Tue, 18 Aug 2026 09:44 AM IST
सार
वाराणसी के कंदवा स्थित 1400 साल प्राचीन कर्दमेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में चार अदृश्य ऊर्जा रेखाएं मिलीं हैं। पंचक्रोशी यात्रा का ये पहला पड़ाव है। प्राचीन काल में मंदिर निर्माण के पीछे यही आधार था। बीएचयू के पुराने रिसर्च को आधार बनाकर सर्वे शुरू हुआ था।
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kardameshwar mahadev temple
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
बीएचयू और अमेरिकी इतिहासकारों ने पंचक्रोशी यात्रा के पहले पड़ाव कंदवा स्थित 1400 साल प्राचीन कर्दमेश्वर महादेव मंदिर के गर्भगृह में चार अदृश्य ऊर्जा रेखाएं चिह्नित की हैं। ये ऊर्जा रेखाएं मंदिर के गर्भगृह में एक दूसरे से मिल रही हैं।
इसका एक मैप भी तैयार किया गया है जिससे स्पष्ट होता है कि तीन दिशा उत्तर, दक्षिण और पश्चिम की ओर से चार अदृश्य ऊर्जा रेखाएं आ रही हैं। वहीं, मंदिर से सटे तालाब और आसपास के इलाके को मिलाकर कुल 10 रेखाओं की मैपिंग की गई है।
इस सर्वे के दौरान पंचक्रोशी के रामेश्वर और कपिलधारा में भी ऐसी ही ऊर्जा रेखा की पहचान की गई है। बताया जा रहा है कि प्राचीन काल में मंदिर निर्माण का आधार यही ऊर्जा रेखाएं थीं। अमेरिका में अर्थ एनर्जी एक्सप्लोरर्स के संस्थापक माइकल ने बीएचयू के पर्यटन और कला इतिहास के विशेषज्ञों के साथ मिलकर 2025 में ये सर्वे शुरू किया।
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इसका एक मैप भी तैयार किया गया है जिससे स्पष्ट होता है कि तीन दिशा उत्तर, दक्षिण और पश्चिम की ओर से चार अदृश्य ऊर्जा रेखाएं आ रही हैं। वहीं, मंदिर से सटे तालाब और आसपास के इलाके को मिलाकर कुल 10 रेखाओं की मैपिंग की गई है।
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इस सर्वे के दौरान पंचक्रोशी के रामेश्वर और कपिलधारा में भी ऐसी ही ऊर्जा रेखा की पहचान की गई है। बताया जा रहा है कि प्राचीन काल में मंदिर निर्माण का आधार यही ऊर्जा रेखाएं थीं। अमेरिका में अर्थ एनर्जी एक्सप्लोरर्स के संस्थापक माइकल ने बीएचयू के पर्यटन और कला इतिहास के विशेषज्ञों के साथ मिलकर 2025 में ये सर्वे शुरू किया।
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इसमें बीएचयू के पूर्व भूगोलवेत्ता प्रो. राणा पीबी सिंह के रिसर्च को आधार बनाया है। इस सर्वे में 400 साल पुरानी तकनीक डाउजिंग कॉपर रॉड्स का इस्तेमाल किया गया है। माइकल ने इस पूरे सर्वे का एक वीडियो अपनी वेबसाइट पर जारी किया है। इसमें उन्होंने बताया है कि मंदिर के तालाब के दोनों ओर से अलग-अलग ऊर्जा मार्ग बन रहे हैं।
प्राचीन काल में मंदिर वहीं बनते थे जहां मिलती थीं ऊर्जा रेखाएं
उत्तर की रेखाएं महिला और दक्षिण की रेखाएं पुरुष ऊर्जा के रूप में हैं। एक रेखा मंदिर के पश्चिम में सड़क के पार कुएं के पास विष्णु और सूर्य मंदिर के विग्रह तक जा रही है। यह रिसर्च अभी चल रहा है। माइकल के साथ सर्वे कर रहे बीएचयू के डॉ. राणा प्रवीन सिंह ने बताया कि इसे पृथ्वी की ऊर्जा रेखा भी कहते हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने मंदिर बनाने के लिए जिन जगहों को चुना वो पहले से ही ऊर्जा स्थल थे।
उत्तर की रेखाएं महिला और दक्षिण की रेखाएं पुरुष ऊर्जा के रूप में हैं। एक रेखा मंदिर के पश्चिम में सड़क के पार कुएं के पास विष्णु और सूर्य मंदिर के विग्रह तक जा रही है। यह रिसर्च अभी चल रहा है। माइकल के साथ सर्वे कर रहे बीएचयू के डॉ. राणा प्रवीन सिंह ने बताया कि इसे पृथ्वी की ऊर्जा रेखा भी कहते हैं। हमारे ऋषि-मुनियों ने मंदिर बनाने के लिए जिन जगहों को चुना वो पहले से ही ऊर्जा स्थल थे।
रॉड पकड़ते ही दबाव महसूस हुआ
सर्वे में सदस्यों को हैरानी तब हुई जब कॉपर रॉड्स लेकर वे ऊर्जा रेखा की ओर गए। वहां पहुंचते ही रॉड की दिशा उलटी मुड़ जा रही थी। कुछ सदस्यों ने कहा कि उन्हें लगा जैसे कोई रॉड पर बल लगाकर मोड़ रहा है तो वहीं कुछ को लगा कि रॉड पकड़ते ही दबाव महसूस हो रहा है।
सर्वे में सदस्यों को हैरानी तब हुई जब कॉपर रॉड्स लेकर वे ऊर्जा रेखा की ओर गए। वहां पहुंचते ही रॉड की दिशा उलटी मुड़ जा रही थी। कुछ सदस्यों ने कहा कि उन्हें लगा जैसे कोई रॉड पर बल लगाकर मोड़ रहा है तो वहीं कुछ को लगा कि रॉड पकड़ते ही दबाव महसूस हो रहा है।
ज्यादा दिलचस्पी तब बढ़ी जब दल गर्भगृह में पहुंचा। अनुसरण करने पर देखा गया कि ये रेखाएं गर्भगृह में प्रवेश करते हुए शिवलिंग के चारों ओर घूमती भी हैं। दक्षिणी दिशा में तालाब पर चार अदृश्य लाइन और उत्तर की ओर से दो रेखाएं तालाब में हैं। उत्तर की बाकी दो रेखाएं तालाब में जाते-जाते उत्तर-पश्चिम की ओर मुड़कर सड़क के पास मंदिर में जा रही हैं।
जलाभिषेक करने पर फैल रही ऊर्जा रेखा
डॉ. राणा प्रवीन ने बताया कि कर्दमेश्वर मंदिर में आने वाली ऊर्जा रेखा को महिला और पुरुष में बांटने के पीछे का कारण यह है कि जो लाइन उत्तर की ओर से आ रही है वो गर्भगृह तक पहुंचने से पहले देवी माता के एक छोटे मंदिर से गुजरती है।
डॉ. राणा प्रवीन ने बताया कि कर्दमेश्वर मंदिर में आने वाली ऊर्जा रेखा को महिला और पुरुष में बांटने के पीछे का कारण यह है कि जो लाइन उत्तर की ओर से आ रही है वो गर्भगृह तक पहुंचने से पहले देवी माता के एक छोटे मंदिर से गुजरती है।
वहीं, पुरुष ऊर्जा मंदिर की दीवार पर बने कर्दम ऋषि के विग्रह से गर्भगृह में प्रवेश कर रही है। ये सभी ऊर्जा की रेखाएं अरघे के पास गोल मुड़कर मंदिर के पिछले हिस्से में जाकर मिल जा रही हैं। वहीं, गर्भगृह में जब जलाभिषेक किया गया तो पता चला कि ये ऊर्जा रेखा शिवलिंग के आसपास तक पहुंच रही हैं और जल चढ़ाने वाले भक्तों को भी छू रही है।
गर्भगृह-भू आकृतियों के बीच संबंधों का चलेगा पता
माकइल के अनुसार, इस सर्वे के आधार पर कर्दमेश्वर महादेव मंदिर की स्थापत्य संरचना, तालाब के जलस्रोत, मंदिर के गर्भगृह और उसके आसपास की भू-आकृतियों के बीच संभावित संबंधों को समझने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, डाउजिंग से पहचानी गईं इन ऊर्जा रेखाओं को आधुनिक विज्ञान में प्रमाणित भौतिक ऊर्जा-रेखाओं के रूप में स्थापित करने के लिए दूसरे प्रयोग भी किए जाने हैं।
माकइल के अनुसार, इस सर्वे के आधार पर कर्दमेश्वर महादेव मंदिर की स्थापत्य संरचना, तालाब के जलस्रोत, मंदिर के गर्भगृह और उसके आसपास की भू-आकृतियों के बीच संभावित संबंधों को समझने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि, डाउजिंग से पहचानी गईं इन ऊर्जा रेखाओं को आधुनिक विज्ञान में प्रमाणित भौतिक ऊर्जा-रेखाओं के रूप में स्थापित करने के लिए दूसरे प्रयोग भी किए जाने हैं।