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इच्छामृत्यु की अनुमति: 13 साल से कोमा में थे हरीश, सुप्रीम कोर्ट ने सुनी गुहार, मेरठ की रिपोर्ट बनी आधार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Fri, 13 Mar 2026 10:55 AM IST
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सार

गाजियाबाद के हरीश राणा 13 साल से कोमा में थे। मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज और एम्स की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दी।

Supreme Court allows Passive Euthanasia to man in coma for 13 years, Meerut Report Serves as Basis
सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को इच्छामृत्यु की दी इजाजत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के हरीश राणा को इच्छामृत्यु देने का आदेश दिया है। हरीश 13 साल से कोमा में थे। मेरठ के लाला लाजपत राय मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों की रिपोर्ट इच्छामृत्यु का आधार बनी। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी प्रोसीडिंग में इस रिपोर्ट का उल्लेख किया है।

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गाजियाबाद के सीएमओ के आग्रह पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य ने चार सदस्यीय बोर्ड बनाया था। न्यूरो सर्जरी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. अखिल प्रकाश शर्मा इस बोर्ड के अध्यक्ष थे। डॉ. अखिल ने बताया कि हरीश का उपचार चंडीगढ़ पीजीआई और दिल्ली एम्स सहित कई जगह हुआ था।
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हरीश चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग के छात्र थे। पीजी की चौथी मंजिल से गिरने के कारण उनके सिर और कमर पर गंभीर चोटें आई थीं। इस हादसे के बाद वह हमेशा के लिए कोमा में चले गए थे। उनके पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट से उपचार हटाने की अनुमति मांगी थी। इस पर शीर्ष कोर्ट ने प्राथमिक और द्वितीय मेडिकल बोर्ड का गठन किया था।

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स्वास्थ्य परीक्षण और रिपोर्ट
डॉ. अखिल प्रकाश ने बताया कि परीक्षण बोर्ड में न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. सचिन गर्ग, एनेस्थियोलॉजिस्ट डॉ. अंकित कुमार और प्लास्टिक सर्जन डॉ. अमित श्रीवास्तव शामिल थे। 11 सितंबर 2025 को हरीश का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।

परीक्षण में पाया गया कि उनके शरीर में ध्वनि, प्रकाश या स्पर्श के प्रति कोई प्रतिक्रिया नहीं थी। उनका शरीर केवल हड्डी और त्वचा की मामूली परत जैसा रह गया था। हड्डियां भी विकसित होने की जगह क्षय होकर भीतर की ओर मुड़ने लगी थीं।

स्वस्थ होने की नगण्य उम्मीद
चिकित्सकों की टीम ने हरीश राणा के स्वस्थ होने की संभावना को नगण्य पाया। इस प्राथमिक रिपोर्ट के बाद एम्स के द्वितीय बोर्ड ने भी जांच की। उन्होंने भी मेरठ के डॉक्टरों की राय से सहमति जताई।

उन्होंने भी सुप्रीम कोर्ट में अपनी रिपोर्ट दाखिल की। दोनों बोर्डों की रिपोर्ट के आधार पर ही सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु का आदेश दिया। यह निर्णय उनके लंबे समय से कोमा में रहने और स्वस्थ होने की कोई उम्मीद न होने पर आधारित है।
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